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World Environment Day 2019: सैनिकों को माइनस डिग्री तापमान में भी बंकर के अंदर नहीं लगेगी ठंड
Wed, 05 Jun 2019 07:06 AM IST
Avdhesh Kumar
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Wed, 05 Jun 2019 07:06 AM IST
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सैनिक
- फोटो : अमर उजाला
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दूध के पैकेट, कोल्ड ड्रिंक, बोतल, खाली चिप्स पैकेट, दवा की खाली बोतल आदि अब पर्यावरण में बाधा नहीं बनेगी। आईआईटी दिल्ली और सेना के जवान सचिन देशमुख ने ऐसे वेस्ट प्लास्टिक प्रोडक्ट से बर्फ में तैनात सैनिकों के लिए बंकर बनाया है। वेस्ट प्लास्टिक से तैयार प्रोडक्ट का प्रयोग करके दीवार बनाई गई हैं। इन बंकर के अंदर सर्दियों में बाहर के माइनस डिग्री तापमान का कोई फर्क नहीं पड़ता है। बल्कि अंदर का तापमान गरम रहता है। इन प्रोडक्ट को बनाने में एक खास मशीन रूपी तकनीक भी इजाद की है।
भारतीय सेना में तैनात सचिन देशमुख ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ अभियान के तहत पर्यावरण को बचाने के लिए कुछ करना चाहता था। मैंने पहाड़ों से लेकर समुद्र तक नौकरी के दौरान देखा कि प्लास्टिक प्रयोग करने के बाद सड़कों, नदियों, पहाड़ों से लेकर समुद्र तक नुकसान पहुंचाते हैं। उसके चलते बरसात में नाले ब्लॉक की समस्या और समुद्री जीव भी मर रहे हैं। इसलिए प्लास्टिक प्रदूषण की रोकथाम के लिए वेस्ट प्लास्टिक प्रोडक्ट मशीन की तकनीक इजाद की।
सचिन के पर्यावरण प्रेम में उनकी पत्नी रिया देशमुख भी सहयोग दे रही हैं। वेस्ट प्लास्टिक से प्रोडक्ट बनाने को लेकर रिया ने देशमुख रिसर्च इंडस्ट्री भी शुरू की है। अभी तक सचिन ने वेस्ट प्लास्टिक से रोड डिवाइडर, स्पीड ब्रेकर, कृत्रिम छोटे नाले, आर्यलैंड तक बनाए है।
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इन मशीन के माध्यम से किसी भी आकार का उत्पादन किया जा सकता है। मशीन कचरे से प्लास्टिक को अलग कर देती है। जबकि अन्य कचरा खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। स्वच्छता मुहिम की तकनीक छह इंटरनेशनल और चार भारतीय रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हो चुकी है। आईआईटी ने इस तकनीक का पेटेंट भी करवा लिया है।
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भारतीय सेना में तैनात सचिन देशमुख ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ अभियान के तहत पर्यावरण को बचाने के लिए कुछ करना चाहता था। मैंने पहाड़ों से लेकर समुद्र तक नौकरी के दौरान देखा कि प्लास्टिक प्रयोग करने के बाद सड़कों, नदियों, पहाड़ों से लेकर समुद्र तक नुकसान पहुंचाते हैं। उसके चलते बरसात में नाले ब्लॉक की समस्या और समुद्री जीव भी मर रहे हैं। इसलिए प्लास्टिक प्रदूषण की रोकथाम के लिए वेस्ट प्लास्टिक प्रोडक्ट मशीन की तकनीक इजाद की।
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सचिन के पर्यावरण प्रेम में उनकी पत्नी रिया देशमुख भी सहयोग दे रही हैं। वेस्ट प्लास्टिक से प्रोडक्ट बनाने को लेकर रिया ने देशमुख रिसर्च इंडस्ट्री भी शुरू की है। अभी तक सचिन ने वेस्ट प्लास्टिक से रोड डिवाइडर, स्पीड ब्रेकर, कृत्रिम छोटे नाले, आर्यलैंड तक बनाए है।
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150 माइक्रोन से कम साइज के वेस्ट प्लास्टिक का निपटान
इस मशीन का खासियत है कि 150 माइक्रोन से कम साइज के वेस्ट प्लास्टिक का भी निपटान कर सकती है। इस मशीन से ऊष्णता से प्लास्टिक की अवस्था बदल रहे हैं, न की जला रहे हैं। इसलिए प्रदूषण की मात्रा बेहद कम है। मैनुअल मशीन और सेमी-ऑटोमेशन मशीन सूखे प्लास्टिक और ऑटोमेशन मशीन सूखे और भीगे प्लास्टिक पर काम करती है।इन मशीन के माध्यम से किसी भी आकार का उत्पादन किया जा सकता है। मशीन कचरे से प्लास्टिक को अलग कर देती है। जबकि अन्य कचरा खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। स्वच्छता मुहिम की तकनीक छह इंटरनेशनल और चार भारतीय रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हो चुकी है। आईआईटी ने इस तकनीक का पेटेंट भी करवा लिया है।