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महिलाओं की बढ़ती आत्महत्या से दक्षिण कोरिया परेशान, रिस्क ग्रुप में 20 से 30 उम्र की महिलाएं

Mon, 14 Dec 2020 03:55 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 14 Dec 2020 03:55 PM IST
सार

पड़ोसी देश जापान में भी नौजवानों के बीच आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने की खबर है। पिछले दिनों टोक्यो के अखबार जापान टाइम्स में छपे एक सर्वे के मुताबिक 19 मार्च 2020 के बाद से वहां हर दस में से कम से कम चार नौजवानों ने कभी ना कभी आत्म हत्या करने की बात सोची है...

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South Korea upset over rising the suicide cases of women, aged between 20 to 30 in risk group
South Korea - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दक्षिण कोरिया को एक बार फिर बढ़ती आत्म-हत्याओं की समस्या से निपटना पड़ रहा है। दक्षिण कोरिया में आत्म हत्या की दर हमेशा से ज्यादा रही है, लेकिन इस साल इसमें एक नया ट्रेंड जुड़ा है। इस साल जहां पुरुषों के आत्म हत्या करने के मामले घटे हैं, वहीं महिलाओं की खुदकुशी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। खासकर 20 से 30 साल उम्र तक की महिलाओं में ये दर ज्यादा दर्ज की गई है।

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हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी के हवाले से छपा है कि इस साल के पहले छह महीनों में 1,924 महिलाओं ने खुदकुशी की। यह संख्या पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में सात फीसदी ज्यादा है। इस समस्या पर देश का ध्यान बीते नवंबर में गया, जब 20 से 30 साल के बीच की उम्र की चार महिलाएं एक पहाड़ी पर बेहोश पाई गईं। बाद में सामने आया कि उन्होंने एक इंटरनेट चैट रूम में बात करते हुए सामूहिक रूप से आत्महत्या करने का फैसला किया था।
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अब इस समस्या को दक्षिण कोरिया में इतना गंभीर माना जाने लगा है कि वहां की सरकार ने 20 से 30 वर्ष की उम्र की महिलाओं को आत्महत्या के लिहाज से रिस्क ग्रुप के रूप में घोषित कर दिया है। पिछले साल इस समस्या पर विचार करने के लिए प्रधानमंत्री चुंग सी-क्यून ने अपनी ही अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी, जिसमें दक्षिण कोरिया के जेंडर, स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रियों को शामिल किया गया था। साथ ही दक्षिण कोरिया में खास स्थानों पर ऐसे हॉर्डिंग लगाए गए हैं, जिनमें जिंदगी के महत्व और उम्मीद कायम रखने से संबंधित संदेश लिखे गए हैं।     
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लेकिन सवाल यह है कि आखिर दक्षिण कोरिया में महिलाएं इतनी बड़ी संख्या में क्यों आत्महत्या कर रही हैं। दक्षिण कोरिया की आबादी लगभग सवा पांच करोड़ है। इस आबादी की तुलना में यहां आत्महत्या की दर ज्यादातर विकसित या विकासशील देशों से ज्यादा है। पिछले महीने आत्महत्या निवारण समिति की बैठक में प्रधानमंत्री चुंग ने कहा था- यह कहना कठिन है कि जिस देश में पहले से ही आत्महत्याओं की दर बाकी दुनिया से ज्यादा है, वहां कोविड-19 महामारी का क्या असर होगा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि गुजरे दशकों में आत्महत्या की दर बढ़ती चली गई है।

दक्षिण कोरिया 1997-98 में एशियाई विदेशी मुद्रा संकट और अपने देश के अंदर वित्तीय संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। तब आत्महत्या की दर में भारी बढ़ोतरी हुई थी। अब ज्यादातर जानकारों का मानना है कि कोरोना महामारी के कारण हालत बदतर हुई है।

पड़ोसी देश जापान में भी नौजवानों के बीच आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने की खबर है। पिछले दिनों टोक्यो के अखबार जापान टाइम्स में छपे एक सर्वे के मुताबिक 19 मार्च 2020 के बाद से वहां हर दस में से कम से कम चार नौजवानों ने कभी ना कभी आत्म हत्या करने की बात सोची। दो साल पहले हुए एक ऐसे ही सर्वे से तुलना करने पर जाहिर हुआ कि इस मनोदशा में जाने वाले नौजवानों की संख्या में इस साल दस गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कोरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर वॉकेशनल एजुकेशन से जुड़े अनुसंधानकर्ता नाम जाए-वुक ने अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि नौजवानों में इस वक्त डिप्रेशन और आत्मघाती सोच खतरनाक सीमा पर है। उन्होंने कहा कि महामारी के बीच मानसिक समस्याओं से ग्रस्त नौजवानों पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। कुछ दूसरे विशेषज्ञों ने कहा है कि 20 से 30 साल की महिलाओँ में आत्म हत्या की बढ़ी प्रवृत्ति का कारण सिर्फ महामारी नहीं हो सकती। उनका कहना है कि इस उम्र की महिलाओं के सामने रोजगार पाने की जो समस्या है, वह महामारी के पहले से जारी है।

कोरियन वूमन्स डेपलपमेंट इंस्टीट्यूट से जुड़ी शोधकर्ता किम यंग-ताइक के मुताबिक ऐसी घटनाओं की सबसे बड़ी वजह आर्थिक ही है। 2008 की मंदी के बाद से ही महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा आत्महत्या कर रही हैं, इसकी वजह उनके पास धन और सामाजिक संसाधनों का कम हो जाना है। इन दोनों चीजों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी समझा जाता है।


कोरोना महामारी के दौरान दक्षिण कोरिया में बेरोजगारी बढ़ी है। इस साल अक्तूबर में पिछले साल की तुलना में रोजगार हासिल लोगों की संख्या चार लाख 21 हजार कम थी। महिलाओं में ये संख्या दो लाख 83 कम हुई थी। जबकि पुरुषों के बीच इसमें सिर्फ एक लाख 9 हजार की गिरावट आई थी। अनेक विशेषज्ञों की राय है कि रोजगार और सामाजिक हैसियत में यही गैर बराबरी महिलाओं में बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं का प्रमुख कारण है।
 

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