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जलवायु परिवर्तन: जहां गर्मियों में 58 डिग्री तक पहुंचा जाता है पारा, उस सहारा के रेगिस्तान में गिर रही बर्फ, माइनस में पहुंचा तापमान
Tue, 18 Jan 2022 09:05 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, आइन सेफ्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, आइन सेफ्रा
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 18 Jan 2022 09:05 PM IST
सार
जानकारों की मानें तो पिछले 42 साल में यह पांचवीं बार है, जब सहारा में बर्फबारी की घटना देखी गई है।
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सहारा के रेगिस्तान में गिरी बर्फ।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
दुनिया में सबसे बड़े रेगिस्तान सहारा में बर्फ गिरी है। अल्जीरिया के उत्तरपश्चिम में स्थित सहारा आइन सेफ्रा शहर में रेत के ऊंचे-ऊंचे टीलों पर सोमवार रात जबरदस्त बर्फबारी हुई। रेगिस्तान की जो हालिया फोटो जारी हुई हैं, उनमें रेत को बर्फ से ढके देखा जा सकता है। मजेदार बात यह है कि सहारा में गर्मियों के मौसम में तापमान 58 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है और साल के अधिकांश समय यहां पारा 25 डिग्री से ऊपर ही रहता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते सहारा में भी बर्फ गिरने के वाकये सामने आने लगे हैं।
बताया गया है कि बर्फबारी की वजह से आइन सेफ्रा शहर में तापमान माइनस दो डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। जानकारों की मानें तो पिछले 42 साल में यह पांचवीं बार है, जब सहारा में बर्फबारी की घटना देखी गई है। इससे पहले 1979, 2016, 2018 और 2021 में भी इस रेगिस्तान में बर्फ गिरी थी। आइन सेफ्रा को सहारा रेगिस्तान का दरवाजा भी कहा जाता है और यह स्थान समुद्र से करीब तीन हजार फीट ऊपर पहाड़ियों से घिरा है।
गौरतलब है कि उत्तरी अफ्रीका का अधिकतर हिस्सा सहारा रेगिस्तान ही है। पिछले सैकड़ों सालों में यह क्षेत्र जबरदस्त सूखे का शिकार हुआ है। जलवायु परिवर्तन के चलते इस जगह पर मौसम में भी बदलाव जारी है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के चक्र में 15 हजार साल बाद यह फिर से हरा-भरा हो जाएगा।
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बताया गया है कि बर्फबारी की वजह से आइन सेफ्रा शहर में तापमान माइनस दो डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। जानकारों की मानें तो पिछले 42 साल में यह पांचवीं बार है, जब सहारा में बर्फबारी की घटना देखी गई है। इससे पहले 1979, 2016, 2018 और 2021 में भी इस रेगिस्तान में बर्फ गिरी थी। आइन सेफ्रा को सहारा रेगिस्तान का दरवाजा भी कहा जाता है और यह स्थान समुद्र से करीब तीन हजार फीट ऊपर पहाड़ियों से घिरा है।
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गौरतलब है कि उत्तरी अफ्रीका का अधिकतर हिस्सा सहारा रेगिस्तान ही है। पिछले सैकड़ों सालों में यह क्षेत्र जबरदस्त सूखे का शिकार हुआ है। जलवायु परिवर्तन के चलते इस जगह पर मौसम में भी बदलाव जारी है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के चक्र में 15 हजार साल बाद यह फिर से हरा-भरा हो जाएगा।
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