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Hindi News ›   World ›   Secretary-General's remarks to High-Level Side Event: Ways to Include Women in the Future of Afghanistan

UN: 'महिलाओं की भागीदारी के बिना कोई भविष्य नहीं', अफगानिस्तान के हालात पर संयुक्त राष्ट्र में उठी आवाज

Tue, 24 Sep 2024 02:04 PM IST
काव्या मिश्रा यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 24 Sep 2024 02:04 PM IST
सार

रौंगटे खड़े कर देने वाली आपबीतियां और विचार अफगान महिलाओं और दुनिया भर से आए उनके समर्थकों ने सोमवार को यूएन मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किए। 

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Secretary-General's remarks to High-Level Side Event: Ways to Include Women in the Future of Afghanistan
अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं की हालत पर चिंता - फोटो : संयुक्त राष्ट्र

विस्तार

अफगान महिलाओं ने मतदान करने का अधिकार, लगभग एक सदी पहले हासिल कर लिया था। मगर आज तालेबान शासन में, महिलाओं को वास्तव में सार्वजनिक जीवन से गायब कर दिया गया है और उन्हें गीत गाने-गुनगुने तक से रोक दिया गया है। 

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यूएन के मुख्यालय में हुआ कार्यक्रम
इस तरह की रौंगटे खड़े कर देने वाली आपबीतियां और विचार, अफगान महिलाओं और दुनिया भर में उनके समर्थकों ने सोमवार को यूएन मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किए। इस कार्यक्रम का आयोजन अफगान समाज में महिलाओं की भागेदारी और उनके अधिकारों को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए किया गया था। 
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मामलों में महिलाओं को सार्थक ढंग से शामिल किया जाए
अफगानिस्तान की राजनयिक रह चुकी और अब अफगानिस्तान पर महिलाओं के फोरम के लिए काम कर रहीं असीला वारदक ने कहा, 'अब, पहले से कहीं अधिक ये बहुत अहम है कि अफगानिस्तान के भविष्य से संबंधित तमाम मामलों में महिलाओं को सार्थक ढंग से शामिल किया जाए।'
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असीला वारदक ने जोर देकर कहा कि देश का भविष्य आधी आबादी को अलग-थलग करके नहीं बनाया जा सकता है। साथ ही ये कि महिलाओं को समाधान का हिस्सा बनाया जाए, नाकि उन्हें दरकिनार कर दिया जाए। 

इन लोगों की मदद से हुआ कार्यक्रम
इस कार्यक्रम का सहआयोजन आयरलैंड, इंडोनेशिया, स्विटजरलैंड और कतर ने, ‘अफगानिस्तान पर महिला फोरम’ के साथ मिलकर किया। यह फोरम यह सुनिश्चित करने के लिए काम करता है कि देश के भविष्य के बारे में किसी भी संवाद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णय-प्रक्रिया में, अफगान महिलाओं को शामिल किया जाए।

यह कार्यक्रम यूएन महासभा के 79वें सत्र की उच्चस्तरीय जनरल डिबेट शुरू होने से एक दिन पहले आयोजित किया गया। यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने भी, अपनी भारी व्यस्तता के बावजूद, इस कार्यक्रम की शुरुआत में शिरकत करके, अफगान महिलाओं के लिए, अंतराष्ट्रीय एकजुटता प्रकट की।

महिलाओं की आवाजों को बुलंद करना जारी रखेंगे
उन्होंने कहा, 'हम अफगान महिलाओं की आवाजों को बुलंद करना जारी रखेंगे और उनसे देश के जीवन में अपनी पूर्ण भूमिका निभाने की पुकार लगाते हैं, देश की सीमाओं के भीतर और वैश्विक स्तर पर।'

अफगानिस्तान में जो कुछ हो रहा...
एंतोनियो गुटेरेश ने एलान करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र दुनिया भर में कहीं भी, लिंग आधारित भेदभाव को एक सामान्य स्थिति बन जाने की इजाजत कभी भी नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में जो कुछ हो रहा है उसकी तुलना, हाल के अतीत में, कुछ अति दमनकारी व्यवस्थाओं के साथ की जा सकती है।

तालेबान ने अगस्त 2021 में सत्ता में वापसी के बाद से ही, महिलाओं व लड़कियों के अधिकारों में लगातार कटौती की है। देश में सत्ताधीन ताकत के रूप में तालेबान ने, 70 से अधिक आदेश, निर्देश और फतवे जारी किए हैं, जिनमें लड़कियों की प्राथमिकी स्तर की शिक्षा को सीमित किया जाना और महिलाओं को पार्कों, जिन और अन्य सार्वजनिक स्थानों के प्रयोग करने से भी रोक लगा दी गई है।

हमें बहुत जोखिम भरे हालात में मिल रहा: स्वीडन की पूर्व विदेश मंत्री 
स्वीडन की पूर्व विदेश मंत्री और ‘अफगानिस्तान पर महिला फोरम’ की अध्यक्ष मारगॉट वॉलस्ट्रॉम ने इस कार्यक्रम का संचालन करते हुआ कहा कि हमें बहुत जोखिम भरे हालात में मिल रहा है। अफगानिस्तान में इस समय एक महिला होना, शायद इतिहास में सबसे खतरनाक बात है।

उन्होंने कहा, 'तालेबान का नवीनतम आदेश महिलाओं को ख़ामस कर देना चाहता है, जिसमें उनके गाने-गुनगुनाने पर भी पाबंदी है, और उन्हें अदृश्य बना देना चाहता है। अलबत्ता यहां संयुक्त राष्ट्र में नहीं। आज हम उनकी आवाजों और उनकी चिंताओं को सुनेंगे।'

अफगानिस्तान की महिला मामलों की मंत्री रह चुकीं हबीबा सराबी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 (2000) को लागू किए जाने की मांग की, जिमसें शांति व सुरक्षा प्रयासों में, महिलाओं की भूमिका की पुष्टि की गई है। उन्होंने साथ ही, अन्य सिफारिशों के अलावा, महिलाओं के विरुद्ध तमाम तरह के भेदभाव के उन्मूलन पर यूएन कन्वेंशन पर अमल किए जाने का भी आग्रह किया। 

'यह एक लड़ाई'
इस बीच, अफगान संसद की पूर्व उपाध्यक्ष फौजिया कूफी ने अफगानिस्तान की महिलाओं के लिए एक पैगाम जारी किया। उन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कहा, 'यह एक लड़ाई है। हम इसे जीतकर रहेंगे।'


फौजिया कूफी ने सुरक्षा परिषद से, अफगानिस्तान के मुद्दे पर एकजुट होने का आहवान करते हुए, देशों से, 'अपने राजनैतिक मतभेद एक तरफ रख देने का आग्रह भी किया, क्योंकि अफगानिस्तान में जो कुछ हो रहा है, उसके सुरक्षा नतीजे आपकी राजधानियों में भी हो सकते हैं, भले ही अगर मानवाधिकार प्रभाव नहीं भी हों।'
 
(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)

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