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संजय भंडारी प्रत्यर्पण मामला: अब ब्रिटेन सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकेगी सरकार, लंदन HC ने खारिज की भारत की अपील

Tue, 08 Apr 2025 04:10 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: बशु जैन Updated Tue, 08 Apr 2025 04:10 PM IST
सार

रक्षा क्षेत्र के सलाहकार संजय भंडारी के प्रत्यर्पण के आदेश को लंदन हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। लंदन हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। इस फैसले के खिलाफ भारत सरकार ने हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए अपील दायर की थी। इसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। 

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Sanjay Bhandari extradition case: govt will not be able to go UK Supreme Court, UK HC rejects India's appeal
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

संजय भंडारी प्रत्यर्पण मामले में भारत सरकार को बड़ा झटका लगा है। लंदन हाईकोर्ट ने भारत सरकार के ब्रिटेन सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के आवेदन को खारिज कर दिया है। रक्षा क्षेत्र के सलाहकार संजय भंडारी को नई दिल्ली लाने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनके खिलाफ कर चोरी और धन शोधन मामला चलाया जा सके। 

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लंदन हाईकोर्ट के जज लॉर्ड जस्टिस टिमोथी होलरोयड ने पिछले महीने भारत सरकार द्वारा दायर आवेदन के जवाब में रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस में सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। भारत सरकार ने लंदन हाईकोर्ट में अपील दायर करते हुए कहा था कि इस मामले में जो मुद्दे हैं, वे केवल कानूनी नहीं, बल्कि सार्वजनिक महत्व के हैं। 
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जस्टिस होलरोयड ने कहा कि अदालत को भारत सरकार की ओर से एक आवेदन प्राप्त हुआ। इसमें सामान्य महत्व के कानूनी बिंदुओं के प्रमाणीकरण तथा सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की अनुमति मांगी गई थी।लिखित प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद हमने पाया कि  मौखिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। साथ ही आगे कोई और प्रस्तुतिकरण की आवश्यकता भी नहीं है। जिन दो बिंदुओं पर अपील की अनुमति मांगी गई थी, उन्हें अस्वीकार कर दिया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि सामान्य महत्व के कानून के दोनों बिंदुओं को न्यायालय के निर्णय में शामिल नहीं किया गया।
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कोर्ट ने कहा कि अपील में पहला बिंदु आरोपी व्यक्ति पर लगाए गए प्रमाण के मानक से संबंधित था तथा दूसरा दिल्ली की तिहाड़ जेल की स्थितियों से जुड़ा था। इन दोनों बिंदुओं में से कोई भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विचार किए जाने योग्य नहीं है। मामले में भारत सरकार ने दो-चरणीय प्रक्रिया में पहले चरण के रूप में आवेदन दायर किया था। लेकिन पहले चरण को अस्वीकार कर दिए जाने के साथ सरकारी अधिकारियों को अभी यह पुष्टि करनी है कि क्या आगे की अपील की अनुमति के लिए आवेदन सीधे यूके के सर्वोच्च न्यायालय में भेजा जा सकता है।


लंदन हाईकोर्ट के जज जस्टिस टिमोथी होलरोयड और जस्टिस कैरन स्टेन ने 28 फरवरी को संजय भंडारी के प्रत्यर्पण के आदेश को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। कोर्ट ने मानवाधिकार के आधार पर यह फैसला दिया था। ब्रिटेन की तत्कालीन गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने नवंबर 2022 में संजय भंडारी को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश जारी किया था। वेस्ट मिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस आदेश को मंजूरी दी थी। लेकिन हाईकोर्ट ने मानवाधिकार के आधार पर इसे रद्द कर दिया था। 

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कोर्ट ने कहा था, अगर संजय भंडारी को तिहाड़ जेल भेजा गया, तो उन्हें वहां के अन्य कैदी और जेल अधिकारी परेशान कर सकते हैं या उनके साथ मारपीट कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि भंडारी की प्रत्यर्पण प्रक्रिया यूरोपीय मानवाधिकार समझौते के अनुच्छेद तीन के खिलाफ है, जो उन्हें शारीरिक उत्पीड़न से बचाता है। इसके अलावा अदालत ने यह भी माना था कि भंडारी को निष्पक्ष और सही तरीके से न्याय पाने का अधिकार है, जैसा कि अनुच्छेद 6 में बताया गया है। 

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