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यूएन में भारत की पाकिस्तान को दो टूक: जयशंकर बोले- सीमा पार आतंक में शामिल सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए

Sat, 26 Sep 2026 11:10 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 26 Sep 2026 11:10 PM IST
सार

यूएन महासभा में एस. जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए पाकिस्तान पर नाम लिए बिना तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी राज्य का समर्थन और सीमा पार इस्तेमाल वैश्विक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। इसके साथ ही खाड़ी, लाल सागर, काला सागर और यूक्रेन में जारी संघर्षों पर चिंता जताते हुए उन्होंने समुद्री सुरक्षा, नागरिकों की रक्षा, खाद्यान्न और ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।

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S. Jaishankar address UN External Affairs Minister says war disrupting supplies attacks on ships unacceptable
विदेश मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत ने शनिवार को वैश्विक शांति, आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और बदलती विश्व व्यवस्था को लेकर अपना रुख साफ शब्दों में रखा। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपने गठन के नौवें दशक में पहुंच चुका है, लेकिन दुनिया आज भी युद्ध और टकराव से जूझ रही है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी राज्य का समर्थन मिलना और सीमा पार गतिविधियों के लिए उसका इस्तेमाल होना वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है। पाकिस्तान का नाम लिए बिना जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बताने या उसके परिणामों से बचने की कोशिश करने वालों की दलील स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का अधिकार है। इसके साथ ही उन्होंने खाड़ी क्षेत्र, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि अब अंतहीन युद्ध को युद्ध के अंत की ओर ले जाने का समय है।

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UN की उम्र बढ़ी, लेकिन दुनिया अब भी युद्ध के साए में
जयशंकर ने अपने संबोधन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र की मूल भावना और मौजूदा हालात के बीच के अंतर से की। उन्होंने कहा कि जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, तब उसका मकसद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना और देशों को मिलकर काम करने का रास्ता देना था। सदस्य देशों ने आपसी संबंध बेहतर करने और दुनिया में शांति मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी। लेकिन दशकों बाद भी संघर्ष और टकराव दुनिया की सबसे बड़ी चिंताओं में बने हुए हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि शांति कायम रखने में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की नाकामी का असर सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा असर विकास, अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। आज दुनिया इतनी जुड़ी हुई है कि एक क्षेत्र में शुरू हुआ युद्ध हजारों किलोमीटर दूर बैठे देशों को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि कई बार संघर्ष से सबसे ज्यादा नुकसान उन देशों को उठाना पड़ता है, जिनका उस युद्ध में कोई सीधा हाथ नहीं होता और जिनकी आवाज फैसले लेने वाली जगहों पर सबसे कम सुनाई देती है।
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‘युद्ध नहीं होना ही शांति नहीं’, संकट की सीमा पर खड़ी दुनिया
जयशंकर ने शांति की परिभाषा को सिर्फ युद्ध की अनुपस्थिति तक सीमित करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया लगातार खतरों, दबावों और अस्थिरता से घिरी रहे तो इसे वास्तविक शांति नहीं कहा जा सकता। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात ऐसे हैं कि दुनिया मानो संकट की गहरी खाई के किनारे खड़ी है और एक गलत कदम स्थिति को और बिगाड़ सकता है। उन्होंने स्थिरता, सुरक्षा और परिस्थितियों में स्पष्टता को शांति के लिए जरूरी बताया। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाज को प्रभावित किया है। उनके मुताबिक, हर चीज को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की सोच और रणनीतिक दबावों के कारण कई जगह ऐसे अवरोध पैदा हो रहे हैं, जो वैश्विक सहयोग को मुश्किल बनाते हैं। ऐसे माहौल में देशों के बीच बातचीत, व्यापक विचार-विमर्श और पारदर्शी फैसले पहले से ज्यादा जरूरी हो गए हैं।
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पाकिस्तान पर नाम लिए बिना निशाना, आतंकवाद पर सख्त संदेश
जयशंकर ने अपने भाषण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक दिन पहले दिए गए भाषण का सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन उनका निशाना साफ तौर पर पाकिस्तान की ओर था। उन्होंने कहा कि एक ऐसे व्यक्ति ने संयुक्त राष्ट्र में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया, जो आतंकवाद के मुद्दे पर लगातार विवादों में रहा है। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को सामान्य घटना की तरह पेश करने और उसके नतीजों से बचने की कोशिश करने वाली दलीलें स्वीकार नहीं की जाएंगी। उन्होंने साफ कहा, “आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दोस्ती और सद्भावना के साथ आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते। अगर कोई समझ किसी ऐसे व्यवहार पर आधारित है, तो उस पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे। जयशंकर ने आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिए लगातार बना हुआ खतरा बताते हुए कहा कि अगर किसी देश की ओर से उसे समर्थन मिलता है और उसका मकसद सीमा पार गतिविधियां चलाना है, तो यह सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देता है।

आतंकवाद की फंडिंग पर भी कड़ा प्रहार, जीरो टॉलरेंस कायम रखने की बात
विदेश मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ आतंकियों और उनके ठिकानों तक सीमित न रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक मदद के स्रोतों को सामने लाना और उन्हें रोकना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, जिन सरकारों की नीतियों या गतिविधियों से आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है, उन्हें जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। भारत अपनी आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति में किसी तरह की ढील नहीं देगा। जयशंकर का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे पर मिलकर और दृढ़ता से कार्रवाई करनी होगी। उनका संदेश था कि आतंकवाद को लेकर अलग-अलग मानदंड नहीं हो सकते। अगर किसी जगह आतंकवाद को गंभीर खतरा माना जाता है तो दूसरी जगह भी उसके प्रति वही रवैया होना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई को इस लड़ाई का अहम हिस्सा बताया और कहा कि इसके लिए देशों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

खाड़ी से लाल सागर और काला सागर तक जहाजों पर हमले ने बढ़ाई चिंता
जयशंकर ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भी बेहद गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जमीन पर मौजूद पुरानी समस्याओं के साथ समुद्र में नई चुनौतियां भी जुड़ गई हैं। खाड़ी क्षेत्र के अलावा लाल सागर से लेकर काला सागर तक वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और उनमें काम करने वाले नाविकों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। इन घटनाओं में भारतीय नाविकों के साथ दूसरे देशों के नागरिकों की भी जान गई है। हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि ओमान की खाड़ी में एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले बल्क कैरियर एमवी केप डाओ पर हमले में एक भारतीय नाविक की जान चली गई। इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एल गैया को भी निशाना बनाया गया था और उसमें सवार एक भारतीय चालक दल का सदस्य लापता हो गया था।

भारत ने 24 देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा का मोर्चा खोला
समुद्री मार्गों की सुरक्षा के मुद्दे पर भारत ने अपनी पहल का भी जिक्र किया। जयशंकर ने बताया कि भारत ने लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर जहाजों और नाविकों को अनुचित तरीके से निशाना बनाए जाने के खिलाफ वैश्विक जनमत तैयार करने की पहल की है। भारत और लाइबेरिया ने शुक्रवार को ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ की स्थापना की घोषणा की थी। यह पहल ऐसे समय हुई है जब अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हमलों की चिंता बढ़ी हुई है। जयशंकर ने कहा कि जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के साथ किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस काम में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह और सख्ती से पालन करने को जरूरी बताया। भारत के लिए यह मुद्दा खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भारतीय और विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं और इन संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरते हैं।

यूक्रेन पर भारत का संदेश- अंतहीन युद्ध अब खत्म होना चाहिए
जयशंकर ने यूक्रेन में जारी संघर्ष को भी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध अब अपने पांचवें साल की ओर बढ़ चुका है और इसकी वजह से पैदा होने वाली समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगस्त में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान कही गई बात को दोहराया कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध के अंत की दिशा में बढ़ना चाहिए। भारत ने बातचीत और शांति की दिशा में चल रही कोशिशों का समर्थन किया है। जयशंकर ने कहा कि युद्ध खत्म करने की कोशिशों के साथ-साथ जमीन पर लोगों की बुनियादी जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासकर समुद्री रास्तों से नाविकों की सुरक्षित आवाजाही और खाद्यान्न तथा ऊर्जा की आपूर्ति बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी मुश्किलों को कम करने के लिए अपनी ओर से हर संभव मदद करने को तैयार है। यानी भारत का संदेश सिर्फ युद्ध रोकने तक सीमित नहीं, बल्कि युद्ध के कारण पैदा होने वाले मानवीय और आर्थिक संकट को संभालने पर भी है।

पश्चिम एशिया में दो-राष्ट्र समाधान पर भारत का रुख साफ
विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी हिंसा और तनाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तनाव और हिंसा का जारी रहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत का मानना है कि स्थायी और टिकाऊ शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है। यानी इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें स्थायी शांति और सुरक्षा का रास्ता निकले। जयशंकर ने कहा कि जब तक ऐसा समाधान नहीं निकलता, भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत के प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने इस पूरे संकट को व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता से जोड़कर देखा। उनके मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों का असर अब एक-दूसरे से जुड़ता जा रहा है। ऐसे में ऊर्जा, खाद्यान्न, समुद्री व्यापार और नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे किसी एक देश की चिंता नहीं रह गए हैं, बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़े सवाल बन चुके हैं।

दुनिया बहुध्रुवीय हो रही, पुरानी व्यवस्था को बदलना होगा
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा भूमिका और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया अब तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और 1945 के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था नई वास्तविकताओं के सामने बदल रही है। उनके मुताबिक, इस बदलाव के दौरान देशों के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं होगा और आज दिखाई दे रही कई उथल-पुथल इसी बदलाव की मुश्किलों से पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारों और हितों वाली दुनिया को अधिक लोकतांत्रिक भविष्य की ओर बढ़ने से रोका नहीं जा सकता। ऐसी बहुलतावादी व्यवस्था में शांति बनाए रखने के लिए सभ्य संवाद, व्यापक विचार-विमर्श और पारदर्शी फैसले जरूरी हैं। जयशंकर ने कहा कि दुनिया की बड़ी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता। इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत का मामला हर गुजरते दिन के साथ और मजबूत हो रहा है।


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भारत ने दुनिया के सामने रखा अपना विकास मॉडल, 78 देशों में 600 परियोजनाएं
जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत की वैश्विक भूमिका और विकास के अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया के साथ साझा करने के लिए काफी कुछ है। देश का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर प्रशासन के साथ सामाजिक और आर्थिक लाभ पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत में बुनियादी ढांचे का विस्तार तेजी से हो रहा है और कारोबार तथा आम जिंदगी को आसान बनाने के लिए कई सुधार किए गए हैं। स्टार्टअप और नवाचार की संस्कृति तथा अलग-अलग क्षेत्रों पर केंद्रित अभियानों ने भी आर्थिक प्रगति को गति दी है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी प्रगति को सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखता। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अनुभव और संसाधन साझा करने की दिशा में भारत लगातार काम कर रहा है। जयशंकर के मुताबिक, 78 देशों में चल रही भारत की 600 प्रमुख विकास परियोजनाएं इसी प्रतिबद्धता को दिखाती हैं। इन परियोजनाओं में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और कृषि समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। इस तरह भारत ने UN के मंच से आतंकवाद और युद्ध पर सख्त रुख के साथ अपनी विकास साझेदारी और वैश्विक सहयोग की भूमिका भी सामने रखी।

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