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ईरान के शीर्ष नेतृत्व में आई दरार?: विदेश मंत्री अराघची को हटाना चाहते हैं पेजेश्कियन और गालिबाफ, जानें वजह

Fri, 01 May 2026 10:04 PM IST
Rahul Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान। Published by: Rahul Kumar Updated Fri, 01 May 2026 10:04 PM IST
सार

अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान के शीर्ष नेतृत्व में गंभीर मतभेद उभर आए हैं और हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। राष्ट्रपति पेजेश्कियन और संसद अध्यक्ष  मोहम्मद बागेर गालिबाफ विदेश मंत्री अराघची  को पद से हटाने की तैयारी में हैं। 
 

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Rift in Iran Top Leadership President and Parliament Speaker Seek to Remove Foreign Minister Araghchi
ईरान के नेत़ृत्व में पड़ी फूट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ईरान-अमेरिका के बीच जारी संघर्षविराम के बीच तेहरान में नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान के शीर्ष नेतृत्व में दरार आ गई है और तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ विदेश मंत्री अब्बास अराघची को हटाना चाहते हैं, जिन पर रिवोल्यूशनरी गार्ड के निर्देशों का पालन करने का आरोप है। इस बीच, ईरान ने युद्ध समाप्त करने के मकसद से अमेरिका के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान को एक नया प्रस्ताव सौंपा है।

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ईरानी शासन में शीर्ष स्तर पर आंतरिक कलह की रिपोर्ट ब्रिटेन स्थित मीडिया आउटलेट ईरान इंटरनेशनल ने दी है। सूत्रों के हवाले से ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि पेजेश्कियन और गालिबाफ ने अराघची पर राष्ट्रपति पद की अवहेलना करके इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के निर्देशों का पालन करने का आरोप लगाया है। अराघची पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कैबिनेट मंत्री की भूमिका से अधिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर अहमद वाहिदी के सहायक के रूप में कार्य किया है। वह राष्ट्रपति पेजेश्कियन को सूचित किए बिना उनके निर्देशों के आधार पर नीतियां लागू कर रहे हैं। इस आंतरिक मतभेद से पेजेश्कियन बेहद नाराज बताए जाते हैं। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने अपने करीबी लोगों से कहा है कि यदि वर्तमान स्थिति बनी रहती है तो वह अराघची को बर्खास्त कर देंगे।
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नए प्रस्ताव का ब्योरा नहीं
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ईरना ने शुक्रवार को बताया कि तेहरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए अपना नवीनतम प्रस्ताव पाकिस्तानी मध्यस्थों को भेजा है। हालांकि, एजेंसी ने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पाकिस्तान की तरफ से इस प्रस्ताव को अमेरिका भेजा गया है या नहीं। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई ने कहा है कि मौजूदा सैन्य तनाव के बावजूद तेहरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए निरंतर संपर्क बनाए रखा है। वहीं, दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों ने बताया कि ईरान ने हवाई रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया है और हमले की स्थिति में व्यापक जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई है।
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अमेरिका को ईरान की नसीहत
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कूटनीति के लिए तेहरान के तैयार होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपना विस्तारवादी दृष्टिकोण और धमकी भरी बयानबाजी बदलनी होगी। अराघची ने यह बात तुर्किये, कतर, सऊदी अरब, मिस्र, इराक और अजरबैजान के समकक्षों से कही। यह जानकारी उनके आधिकारिक टेलीग्राम खाते पर एक पोस्ट में दी गई। पोस्ट के अनुसार, ईरान कूटनीति के लिए तैयार है। इसके लिए अमेरिकी पक्ष को अपना विस्तारवादी दृष्टिकोण, धमकी भरी बयानबाजी और उत्तेजक कार्रवाई बदलनी होगी। ईरान की सशस्त्र सेनाएं भी पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं। वे देश को किसी भी खतरे या आक्रामकता से निर्णायक रूप से बचाएंगी।


ये भी पढ़ें: ट्रंप की यूरोपीय संघ को दो टूक: कार और ट्रक पर लगेगा 25% टैरिफ, अमेरिका में उत्पादन करने पर ही मिलेगी छूट

ट्रंप प्रशासन बोला, ईरान में जंग खत्म
ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अप्रैल की शुरुआत में लागू हुए युद्धविराम के चलते ईरान में संघर्ष प्रभावी रूप से समाप्त हो चुका है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में व्हाइट हाउस को कांग्रेस से औपचारिक अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं बनती। यह टिप्पणी रक्षा मंत्री हेगसेथ के उस बयान को भी मजबूत करती है, जो उन्होंने बृहस्पतिवार को सीनेट में दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि युद्धविराम ने जमीनी स्तर पर लड़ाई को रोक दिया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि 1973 के उस कानून के तहत जरूरी प्रक्रिया लागू नहीं होती, जिसमें 60 दिनों से अधिक सैन्य अभियान जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है।


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