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South Korea: 175 देशों का प्लास्टिक प्रदूषण घटाने पर जोर, भारत बोला- विकासशील को मिले वित्तीय और तकनीकी मदद

Sat, 30 Nov 2024 05:14 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, बुसान
एजेंसी, बुसान Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 30 Nov 2024 05:14 AM IST
सार

भारत ने साफ कहा कि विकासशील देशों को वित्तीय और तकनीकी मदद के साथ ही प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मिलना चाहिए। समिति के अध्यक्ष वाल्डिविसो की ओर से जारी सुझाव में प्लास्टिक उत्पादों की वैश्विक सूची बनाने और गरीब देशों को वैश्विक प्लास्टिक संधि पर काम करने के लिए वित्तीय मदद देने जैसे विचार शामिल हैं। 

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Representatives of 175 countries gathered in Busan South Korea to curb plastic pollution
प्लास्टिक प्रदूषण (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी

विस्तार

प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए दक्षिण कोरिया के बुसान में जुटे 175 देशों के प्रतिनिधि कई मुद्दों पर एकमत नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय संधि पर इस वार्ता के अध्यक्ष लुईस वायस ने शुक्रवार को एक दस्तावेज जारी किया, ताकि सभी देश एक समझौते तक पहुंच सकें। हालांकि इसके सुझावों का विरोध भी शुरू हो गया है।

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दस्तावेज में प्लास्टिक उत्पादन में कमी करने के लिए वैश्विक लक्ष्य तय करने का जिक्र नहीं है। वहीं, भारत ने साफ कहा कि विकासशील देशों को वित्तीय और तकनीकी मदद के साथ ही प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मिलना चाहिए। समिति के अध्यक्ष वाल्डिविसो की ओर से जारी सुझाव में प्लास्टिक उत्पादों की वैश्विक सूची बनाने और गरीब देशों को वैश्विक प्लास्टिक संधि पर काम करने के लिए वित्तीय मदद देने जैसे विचार शामिल हैं। इसमें कहा गया कि प्लास्टिक प्रदूषण गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य समस्या है। बुसान में संयुक्त राष्ट्र अंतर-सरकारी वार्ता समिति (आईएनसी-5) की पांचवीं और अंतिम बैठक में प्लास्टिक पर वैश्विक रूप से बाध्यकारी नियमों पर सहमति बनाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। एक दिसंबर को बैठक का आखिरी दिन है। हालांकि दस्तावेज में यह स्पष्ट नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय संधि में प्लास्टिक उत्पादन में कमी के लिए वैश्विक लक्ष्य तय करना चाहिए या नहीं। दस्तावेज में यह भी साफ नहीं किया गया कि समृद्ध देश फंड में कितनी रकम देंगे। 
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प्लास्टिक उत्पादन कम करना जरूरी
ग्रीनपीस के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जी. फोर्ब्स ने कहा कि प्लास्टिक उत्पादन को कम करना संधि का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। प्लास्टिक निर्माता संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाली अंतरराष्ट्रीय रासायनिक संघ परिषद के प्रवक्ता ने स्टीवर्ट हैरिस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए इन कोशिशों का समर्थन किया है, लेकिन वह उत्पादन की सीमा तय करने के बजाय प्लास्टिक अपशिष्ट को कम करने और पुनर्चक्रण पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। दूसरी तरफ, सऊदी अरब जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पादक देश प्लास्टिक उत्पादन पर सीमा लगाने का विरोध करते रहे हैं।
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भारत : प्लास्टिक के विकल्पों का समर्थन, लेकिन इन उत्पादों को बढ़ाव नहीं
सिंगल यूज वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने और टिकाऊ विकल्पों को अपनाने का आह्वान करने वाले भारत ने कहा कि वह प्लास्टिक के विकल्पों और तकनीकों के शोध व विकास का समर्थन करता है, लेकिन इन उत्पादों या तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा नहीं देना चाहता। भारत ने आईएनसी-5 के अध्यक्ष वाल्डिविसो के प्लास्टिक उत्पादों में हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल कम करने के सुझाव का भी विरोध किया है। भारत ने तर्क दिया कि प्लास्टिक प्रदूषण संबंधी अंतिम समझौते में अन्य अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

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