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रानिल विक्रमसिंघे: चुनाव में नहीं जीत पाए थे एक भी सीट, फिर भी बन गए श्रीलंका के प्रधानमंत्री, भारत से है करीबी 

Thu, 12 May 2022 10:03 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Amit Mandal Updated Thu, 12 May 2022 10:03 PM IST
सार

तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के विरोध के बावजूद विक्रमसिंघे ने कोलंबो बंदरगाह के पूर्वी टर्मिनल पर भारत के साथ समझौते का समर्थन किया था। 

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Ranil Wickremesinghe: A politician who could manage economy with far-sighted policies
श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे - फोटो : पीटीआई

विस्तार

श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, एक वकील से राजनेता विक्रमसिंघे 45 वर्षों से संसद में हैं। अपनी यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) की अगस्त 2020 के आम चुनाव में हुई करारी हार और एक भी सीट जीतने में विफल रहने के लगभग दो साल बाद जबरदस्त वापसी की है। 73 वर्षीय नेता को भारत का करीबी माना जाता है, उन्हें देश में सबसे खराब आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे द्वारा श्रीलंका के 26 वें प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें राजनीतिक हलकों में एक ऐसे व्यक्ति के रूप में स्वीकार किया जाता है जो दूरदर्शी नीतियों के साथ अर्थव्यवस्था का प्रबंधन कर सकता है। उनकी नियुक्ति ने नेतृत्व के शून्य को भरा है क्योंकि श्रीलंका में सोमवार से सरकार नहीं थी, जब गोटबाया के बड़े भाई और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने हिंसक विरोध के बाद इस्तीफा दे दिया था।

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भारत के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए
श्रीलंकाई राजनेता के रूप में माने जाने वाले विक्रमसिंघे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कमान संभाल सकते हैं। उन्होंने अपने साढ़े चार दशक के राजनीतिक जीवन के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने श्रीलंका के नजदीकी पड़ोसी भारत के साथ एक व्यक्तिगत संबंध बनाया और प्रधानमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान चार अवसरों - अक्टूबर 2016, अप्रैल 2017, नवंबर 2017 और अक्टूबर 2018 में देश का दौरा किया। इसी अवधि के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका की दो यात्राएं कीं और उन्होंने विक्रमसिंघे के एक व्यक्तिगत अनुरोध पर भी कार्रवाई की जो श्रीलंका को 1990 एम्बुलेंस प्रणाली स्थापित करने में मदद करने में कोविड 19 के दौरान बेहद मददगार साबित हुई।
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भारत के साथ समझौते का समर्थन किया था
तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के विरोध के बावजूद विक्रमसिंघे ने कोलंबो बंदरगाह के पूर्वी टर्मिनल पर भारत के साथ समझौते का समर्थन किया था, जिसे राजपक्षे ने 2020 में खारिज कर दिया था। उनकी पार्टी यूएनपी देश की सबसे पुरानी पार्टी है जो 2020 संसदीय में एक भी सीट जीतने में विफल रही थी। वह 1977 के बाद पहली बार बिना सीट के रह गए थे, लेकिन बाद में संचयी राष्ट्रीय वोट के आधार पर यूएनपी को आवंटित एकमात्र राष्ट्रीय सूची के माध्यम से वह संसद पहुंच गए। 
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पहली बार 1993-1994 तक रहे प्रधानमंत्री 
उनके डिप्टी साजिथ प्रेमदासा ने अलग होकर समागी जन बालवेगया (एसजेबी) का नेतृत्व किया और मुख्य विपक्ष बन गए। श्रीलंका के पहले कार्यकारी राष्ट्रपति जूनियस जयवर्धने के भतीजे विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा की हत्या के बाद पहली बार 1993-1994 तक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। उन्हें 2001-2004 तक प्रधानमंत्री के रूप में भी चुना गया था जब 2001 में संयुक्त राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने आम चुनाव जीता था। लेकिन चंद्रिका कुमारतुंगा द्वारा जल्दी चुनाव कराने के बाद 2004 में उन्होंने सत्ता खो दी।

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