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Hindi News ›   World ›   Question of BBCs credibility : Tension between Russia-China and Western countries reached to media, Russian media alleged the BBC gets extra money for British propaganda

साख पर सवाल: रूस-चीन व पश्चिम देशों में तनाव की आंच मीडिया तक, बीबीसी को ब्रिटिश प्रोपेगैंडा के लिए अतिरिक्त धन

Tue, 04 May 2021 08:50 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 04 May 2021 08:50 PM IST
सार

रूसी मीडिया का आरोप है कि ब्रिटेन ने बीबीसी को 80 लाख पाउंड दिए हैं, जिनसे वह ब्रिटिश सरकार के 'सूचना युद्ध' को आगे बढ़ाएगी
 

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Question of BBCs credibility : Tension between Russia-China and  Western countries reached to  media, Russian media alleged the BBC gets extra money for British propaganda
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

विस्तार

पश्चिमी देशों के रूस और चीन के साथ बढ़ रहे तनाव की आंच दोनों पक्षों के मीडिया संस्थानों पर पड़ी है। दोनों पक्षों ने एक दूसरे के मीडिया घरानों पर पक्षपात और पूर्वाग्रह से भरी खबरें दिखाने का आरोप लगाया है। अब आलोचकों ने ताजा खबर के आधार पर कहा है कि इससे ब्रिटिश प्रसारण संस्था- बीबीसी की साख पर नए सवाल उठे हैं।

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खबर के मुताबिक ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए 80 लाख पाउंड का अतिरिक्त बजट मंजूर किया है, ताकि वह ‘हानिकारक दुष्प्रच्रार का मुकाबला’ कर सके। रूसी मीडिया संस्थानों ने आरोप लगाया है कि इस धन से बीबीसी ब्रिटिश सरकार के 'सूचना युद्ध' को आगे बढ़ाएगा। इन संस्थानों ने कहा है कि ऐसा करने का बीबीसी का पुराना इतिहास रहा है।
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40 भाषाओं में प्रसारण, दर्शक संख्या 35 करोड़ से ज्यादा
बीबीसी 40 से ज्यादा भाषाओं में प्रसारण करता है। प्रति हफ्ते उसके दर्शकों/ श्रोताओं की संख्या 35 करोड़ से अधिक है। बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की खबरें और बहसें दुनिया भर में देखी जाती हैं।  बीबीसी को ब्रिटिश सरकार के विदेश, कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एफसीडीओ), और सीधे ब्रिटिश सरकार के बजट से पैसा मिलता है। इसके अलावा उसकी आमदनी का एक सीमित स्रोत विज्ञापन भी हैं। 

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पूर्वाग्रह से मुक्त व निष्पक्ष संस्था : राब

जानकारों का कहना है कि बीबीसी ब्रिटिश सरकार के हाथ में पूरी दुनिया में अपनी राय प्रचारित करने का एक मजबूत माध्यम है। विदेश मंत्री राब ने बीबीसी के लिए अतिरिक्त बजट का एलान करते हुए उसे 'पूर्वाग्रह से मुक्त और निष्पक्ष' संस्था बताया।

लेकिन इस साल इंटीग्रेटेड रिव्यू नामक ब्रिटिश सरकार के दस्तावेज में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को ब्रिटिश ‘सॉफ्ट पॉवर’ का एक उपकरण बताया गया था। इस दस्तावेज में ब्रिटिश विदेश और रक्षा मंत्रालयों की प्राथमिकताओं का जिक्र था। उसमें रूस और चीन जैसे ‘प्रतिस्पर्धियों’ के खिलाफ जिन उपकरणों के इस्तेमाल की बात कही गई, उनमें बीबीसी का नाम भी था। उसी दस्तावेज को आधार बना कर डॉमिनिक राब ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस को 80 लाख पाउंड की अतिरिक्त रकम मुहैया कराने का एलान किया है। 

उन्होंने कहा कि ये रकम हानिकारक दुष्प्रचार का मुकाबला करने, दुनिया भर में 'गलत रिपोर्टिंग' को चुनौती देने और डिजिटल प्रसारण में सुधार करने के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि बीसीसी को एफसीडीओ से 2016 के बाद से 37 करोड़ 80 पाउंड की रकम दी गई है। अब दी गई रकम उसके अतिरिक्त होगी।

रशिया टुडे ने कहा-ब्रिटिश सरकार के फायदों का अभियान चलेगा

रूसी टीवी चैनल रशिया टुडे की वेबसाइट पर छपी एक टिप्पणी में कहा गया है कि बीबीसी को 'फेक न्यूज' का मुकाबला करने जैसे अस्पष्ट मिशन पर लगाया गया है। इसका मतलब यह होगा कि ये प्रसारण संस्था ब्रिटिश सरकार के भू-राजनीतिक फायदों के मुताबिक सूचना अभियान चलाएगी। 

इस टिप्पणी में कहा गया है कि ऐसा करने का बीबीसी का पुराना इतिहास रहा है। पिछले मार्च में जारी दस्तावेजों से जाहिर हुआ था कि बीबीसी की चैरिटी एजेंसी- बीबीसी मीडिया एक्शन ने खुल कर रूसी पत्रकारों से संबंध बढ़ाए। उसका इस्तेमाल करते हुए उसने रूसी भाषी इलाकों में ब्रिटिश सरकार समर्थक और रूस विरोधी प्रचार अभियान चलाया। ऐसा एफसीडीओ के इशारे पर किया गया। 

इसके पहले 2018 में एफसीडीओ की दुष्प्रचार विरोधी और मीडिया डेवलपमेंट शाखा के प्रमुख एंडी प्राइस ने ब्रिटिश सरकार का मिशन साफ शब्दों में बताया था। उन्होंने कहा कि मकसद पत्रकारों और मीडिया संगठनों को साथ लेकर रूस सरकार के प्रभाव को कमजोर करना है।

ब्रिटिश सरकार के नजरिए को सच बताया जाएगा
रशिया टुडे ने कहा है कि बीसीसी और एफसीडीओ के इस पुराने इतिहास को देखते हुए अनुमान है कि नए मिले धन का उपयोग बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ब्रिटिश सरकार के नजरिए से जो सच है, उसे फैलाने की कोशिश करेगी। इस टिप्पणी में आरोप लगाया गया है कि इस काम में सिर्फ बीबीसी ही नहीं, बल्कि समाचार एजेंसी थॉमसन रॉयर्टस फाउंडेशन भी शामिल है। 

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