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ब्रिटेन पहुंची प्रदर्शन की आंच, लंदन में मूर्तियों को तोड़ने और बचाने वाले गुट आए आमने-सामने

Sun, 14 Jun 2020 10:50 AM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: अनवर अंसारी Updated Sun, 14 Jun 2020 10:50 AM IST
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Protest in Britain over racism: Patriots defending statues clash with Black Lives Matter protesters and police in London
लंदन में प्रदर्शन - फोटो : Twitter

अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकी मूल के अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की मृत्यु के बाद से हो रहे विरोध प्रदर्शनों की आंच धीरे-धीरे दुनिया के प्रमुख शहरों में पहुंचना शुरू हो गई है। अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन में रंगभेद को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ब्रिटेन में कई जगहों पर प्रदर्शनों ने हिंसक रूप भी धारण कर लिया है। 

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शनिवार को ब्रिटेन में लंदन सहित 20 प्रमुख शहरों में लोगों ने हिंसक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को पुलिस पर पानी की बोतलों को फेंकते देखा गया। वहीं, इसके जवाब में पुलिस ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए लाठी चार्ज किया और उन पर आंसू गैस के गोले दागे। 
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दरअसल, लंदन में प्रदर्शनकारियों का दो समूह पहुंचा था। पहला समूह खुद को रंगभेद विरोधी बता रहा था। इसमें वे लोग शामिल थे, जो अब तक शहर में लगीं मूर्तियों को नुकसान पहुंचा रहे थे। वहीं, दूसरे समूह का कहना था कि वे यहां मूर्तियों की सुरक्षा करने के लिए आए हैं। इनमें से कई लोगों को पार्लियामेंट स्क्वायर में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की प्रतिमा को घेरकर खड़े हुए देखा गया। 
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दूसरी तरफ, हिंसक प्रदर्शनों को लेकर ब्रिटिश सरकार सख्त है। गृह सचिव प्रीति पटेल ने कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बता दें कि, प्रदर्शनों से पहले लंदन में देश-विदेश के प्रसिद्ध व्यक्तियों की मूर्तियों को ढंकने का सिलसिला जारी रहा।

अमेरिका में भी मूर्तियों को बचाने का काम जारी
ऐसा नहीं है कि मूर्तियों के साथ तोड़-फोड़ की घटनाएं केवल ब्रिटेन में हो रही है। प्रदर्शन का मुख्य गढ़ अमेरिका भी इसका गवाह बना हुआ है। यहां कई मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। इनमें से एक मूर्ति महात्मा गांधी की थी, जिसको लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुख भी जताया था। 

वहीं, अमेरिका के कोलंबिया शहर में प्रशासन ने कोलंबस की प्रतिमा को हटाकर सुरक्षित स्थान पर रख दिया है। अमेरिका की खोज करने वाले यात्री क्रिस्टोफर कोलंबस के नाम पर इस शहर का नाम रखा गया था। केंटकी में भी कई मूर्तियों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। 


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दुनियाभर के नेताओं ने दिया प्रदर्शन को समर्थन
अमेरिका में हो रहे प्रदर्शनों को दुनियाभर के नेताओं का समर्थन मिल रहा है। इन नेताओं ने प्रदर्शनों से निपटने में ट्रंप सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की आलोचना भी की है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने रंगभेद को लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर कहा कि कनाडा में भी व्यवस्थागत भेदभाव है। लेकिन हमें इसके खिलाफ लड़ाई में सहयोगी बनने की जरूरत है। 

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा कि ट्रंप का राजनीतिक अंदाज विवादास्पद है। प्रदर्शनों के चलते अमेरिकी समाज दो हिस्सों में बंट गया है। वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि सभी लोगों को अपने ऊपर हो रहे अन्याय पर भावनाएं व्यक्त करने के लिए प्रदर्शन का अधिकार है। 

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