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ट्रंप का बड़ा फैसला: ओंटारियो झील का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' किया, कनाडा से तनाव के बीच क्यों लिया फैसला?
Thu, 27 Aug 2026 11:37 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन डीसी।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन डीसी।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 27 Aug 2026 11:37 PM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओंटारियो झील का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' करने का आदेश दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर तनाव चल रहा है। आखिर ट्रंप के इस फैसले की वजह क्या है? पढ़िए रिपोर्ट
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसमें ओंटारियो झील का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' करने की बात है। ट्रंप ने कहा कि यह बदलाव तुरंत लागू होगा। रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी।
व्हाइट हाउस के अधिकारी ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि इस आदेश में अमेरिकी गृह मंत्रालय और उसके सचिव डग बर्गम को नाम बदलने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।
कहां स्थित है यह झील?
ओंटारियो झील उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों में से एक है। यह झील कनाडा के ओंटारियो प्रांत और अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य दोनों से लगी हुई है।
ये भी पढ़ें: नेपाल त्रासदी: हाथों में अपनों की तस्वीर, आंखों में उम्मीद; प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई तबाही की दर्दनाक कहानी
ट्रंप पिछले कुछ दिनों से नाम बदलने का विचार सामने रख रहे थे। इसी बीच अमेरिका ने सप्ताहांत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के कनाडाई सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता टूटने के बाद यह फैसला लिया गया। ट्रंप पिछले साल व्हाइट हाउस लौटने के बाद से अमेरिका के उत्तरी पड़ोसी कनाडा पर लगातार दबाव बना रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया था कि जिस सहयोगी देश के साथ कभी अमेरिका के अच्छे संबंध थे, उसे अमेरिका का 51वां राज्य बना देना चाहिए।
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कनाडा ने इस हफ्ते ट्रंप के टैरिफ का जवाब दिया। उसने 20 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाया। इसमें इस्पात, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण और खेती के सामान शामिल हैं।
ट्रंप ने यह आदेश ओवल ऑफिस में इस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया। उनके पीछे एक स्टैंड पर बड़ा साइन रखा था। उस पर ग्रेट लेक्स का नक्शा था। ओंटारियो झील के ऊपर बड़े लाल अक्षरों में 'लेक अमेरिका' लिखा था। राष्ट्रपति के दूसरी तरफ एक और नक्शा था। उस पर लिखा था- मेकिंग द ग्रेट लेक्स ईवन ग्रेटर।
आदेश पर हस्ताक्षर करते समय ट्रंप ने कहा कि उन्होंने उन सभी लोगों को इसकी जानकारी दे दी है, जिन्हें जानकारी देना जरूरी था। उन्होंने कहा, इसलिए हमने वह सब कर दिया है, जो आपको करना होता है। यह आधिकारिक है। यह तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। लेकिन ट्रंप ने जिस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, उसमें कहा गया है कि ये बदलाव 30 दिनों के भीतर किए जाने हैं।
कनाडा के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस कदम को खारिज कर दिया। उन्होंने झील के मूल नाम से जुड़े वहां के आदिवासी इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह नाम कनाडा के एक देश के रूप में बनने और अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा दोनों से भी पहले का है। उन्होंने लिखा, कनाडाई लोग भी जानते हैं कि सही नाम हकीकत को बताता है। इसे लेक ओंटारियो ही कहना है। तब, अब और हमेशा।
नोवा स्कोटिया के मुख्यमंत्री टिम ह्यूस्टन ने भी ट्रंप के कदम को खारिज कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, अब हम सच में बेवकूफी वाली बातों तक पहुंच गए हैं। यह लेक ओंटारियो है, दोस्त। वहीं, न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल डेमोक्रेट हैं। उनके राज्य की सीमा इस झील से लगती है। व्हाइट हाउस की घोषणा के जवाब में उन्होंने एक्स पर लिखा, न्यूयॉर्क इसे उस नाम से नहीं बुलाएगा।
दुनिया में ऐसा कोई एक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं है, जो अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों के नाम तय करता हो। ट्रंप के पास इस बात को लेकर काफी अधिकार हैं कि अमेरिकी सरकार भौगोलिक जगहों और महत्वपूर्ण स्थानों को किस नाम से पहचानती है।
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व्हाइट हाउस के अधिकारी ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि इस आदेश में अमेरिकी गृह मंत्रालय और उसके सचिव डग बर्गम को नाम बदलने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।
कहां स्थित है यह झील?
ओंटारियो झील उत्तरी अमेरिका की पांच बड़ी झीलों में से एक है। यह झील कनाडा के ओंटारियो प्रांत और अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य दोनों से लगी हुई है।
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ट्रंप पिछले कुछ दिनों से नाम बदलने का विचार सामने रख रहे थे। इसी बीच अमेरिका ने सप्ताहांत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के कनाडाई सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता टूटने के बाद यह फैसला लिया गया। ट्रंप पिछले साल व्हाइट हाउस लौटने के बाद से अमेरिका के उत्तरी पड़ोसी कनाडा पर लगातार दबाव बना रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया था कि जिस सहयोगी देश के साथ कभी अमेरिका के अच्छे संबंध थे, उसे अमेरिका का 51वां राज्य बना देना चाहिए।
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कनाडा ने इस हफ्ते ट्रंप के टैरिफ का जवाब दिया। उसने 20 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाया। इसमें इस्पात, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण और खेती के सामान शामिल हैं।
ट्रंप ने यह आदेश ओवल ऑफिस में इस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया। उनके पीछे एक स्टैंड पर बड़ा साइन रखा था। उस पर ग्रेट लेक्स का नक्शा था। ओंटारियो झील के ऊपर बड़े लाल अक्षरों में 'लेक अमेरिका' लिखा था। राष्ट्रपति के दूसरी तरफ एक और नक्शा था। उस पर लिखा था- मेकिंग द ग्रेट लेक्स ईवन ग्रेटर।
आदेश पर हस्ताक्षर करते समय ट्रंप ने कहा कि उन्होंने उन सभी लोगों को इसकी जानकारी दे दी है, जिन्हें जानकारी देना जरूरी था। उन्होंने कहा, इसलिए हमने वह सब कर दिया है, जो आपको करना होता है। यह आधिकारिक है। यह तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। लेकिन ट्रंप ने जिस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, उसमें कहा गया है कि ये बदलाव 30 दिनों के भीतर किए जाने हैं।
कनाडा के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस कदम को खारिज कर दिया। उन्होंने झील के मूल नाम से जुड़े वहां के आदिवासी इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह नाम कनाडा के एक देश के रूप में बनने और अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा दोनों से भी पहले का है। उन्होंने लिखा, कनाडाई लोग भी जानते हैं कि सही नाम हकीकत को बताता है। इसे लेक ओंटारियो ही कहना है। तब, अब और हमेशा।
नोवा स्कोटिया के मुख्यमंत्री टिम ह्यूस्टन ने भी ट्रंप के कदम को खारिज कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, अब हम सच में बेवकूफी वाली बातों तक पहुंच गए हैं। यह लेक ओंटारियो है, दोस्त। वहीं, न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल डेमोक्रेट हैं। उनके राज्य की सीमा इस झील से लगती है। व्हाइट हाउस की घोषणा के जवाब में उन्होंने एक्स पर लिखा, न्यूयॉर्क इसे उस नाम से नहीं बुलाएगा।
दुनिया में ऐसा कोई एक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं है, जो अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्रों के नाम तय करता हो। ट्रंप के पास इस बात को लेकर काफी अधिकार हैं कि अमेरिकी सरकार भौगोलिक जगहों और महत्वपूर्ण स्थानों को किस नाम से पहचानती है।