{"_id":"684e767f97f536ce290c9b4e","slug":"preparations-to-implement-democracy-in-guinea-military-junta-formed-body-for-presidential-general-elections-2025-06-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Guinea: गिनी में लोकतंत्र लागू करने की तैयारी, सैन्य जुंटा ने राष्ट्रपति और आम चुनाव के लिए गठित किया निकाय","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Guinea: गिनी में लोकतंत्र लागू करने की तैयारी, सैन्य जुंटा ने राष्ट्रपति और आम चुनाव के लिए गठित किया निकाय
Sun, 15 Jun 2025 01:00 PM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, डाकार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, डाकार
Published by: बशु जैन
Updated Sun, 15 Jun 2025 01:00 PM IST
सार
गिनी में सत्ता सेना के हाथ में है। यहां सेना ने नागरिक शासन की वापसी में देरी की है। 2021 से सत्ता में काबिज जनरल मामादी डौम्बौया ने 31 दिसंबर 2024 की समयसीमा के बाद लोकतांत्रिक परिवर्तन शुरू करने पर सहमति जताई थी। अब यहां चुनाव को लेकर तैयारी शुरू हो गई है।
विज्ञापन
गिनी के राष्ट्रपति जनरल मामादी डौम्बौया।
- फोटो : presidence.gov.gn/biographie/
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी में सैन्य शासन खत्म करने के बाद अब लोकतंत्र लागू करने की तैयारी हो रही है। गिनी के सैन्य जुंटा (सत्ता चलाने वाली समिति) ने सितंबर में होने वाले सांविधानिक जनमत संग्रह और दिसंबर में होने वाले आम और राष्ट्रपति चुनाव के लिए निकाय का गठन किया है। यह निकाय चुनाव प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगा।
जुंटा नेता जनरल मामादी डौम्बौया ने एक आदेश में एलान किया कि चुनाव महानिदेशालय (डीजीई) अन्य कर्तव्यों के अलावा, चुनावों के आयोजन, मतदाता सूची के प्रबंधन और चुनावी निष्पक्षता के लिए जिम्मेदार होगा। संस्था के दो प्रमुखों की नियुक्ति राष्ट्रपति के आदेश से की जाएगी। यह निकाय उप-क्षेत्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनावी निकायों में गिनी का प्रतिनिधित्व भी करेगा।
ये भी पढ़ें: 'अगर हमला हुआ तो पूरी अमेरिकी सेना आप पर टूट पड़ेगी', ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी
विज्ञापन
गिनी में सेना के हाथ में सत्ता
गिनी में सत्ता सेना के हाथ में है। यहां सेना ने नागरिक शासन की वापसी में देरी की है। 2021 से सत्ता में काबिज जनरल मामादी डौम्बौया ने 31 दिसंबर 2024 की समयसीमा के बाद लोकतांत्रिक परिवर्तन शुरू करने पर सहमति जताई थी। सत्तारूढ़ जुंटा के समय सीमा का पालन न करने पर विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके कारण जनवरी में गिनी की राजधानी कोनाक्री में जनजीवन ठप हो गया था।
दिसंबर में होने हैं चुनाव
पिछले महीने प्रधानमंत्री अमादौ ओरी बाह ने कहा था कि आम और राष्ट्रपति चुनाव दिसंबर 2025 में होंगे। उन्होंने 21 सितंबर को एक नया संविधान अपनाने के लिए जनमत संग्रह का भी एलान किया। अब जब चुनाव का एलान हो गया है तो विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ रही है। सैन्य शासन ने पिछले साल 50 से अधिक राजनीतिक दलों को भंग कर दिया था। दावा किया गया था कि यह कदम राजनीतिक बिसात को साफ करने के लिए उठाया गया था।
ये भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी का साइप्रस दौरा तुर्किये को संदेश, पाकिस्तान के दोस्त को झटका देने की तैयारी
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि सत्ता ने स्वतंत्र मीडिया पर भी शिकंजा कस दिया है। इसके तहत सोशल नेटवर्क और निजी रेडियो स्टेशनों को अक्सर बंद कर दिया जाता है और सूचना साइटों को बिना किसी कारण के कई महीनों तक बाधित या निलंबित कर दिया जाता है। पत्रकारों को हमलों और गिरफ्तारियों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
जुंटा नेता जनरल मामादी डौम्बौया ने एक आदेश में एलान किया कि चुनाव महानिदेशालय (डीजीई) अन्य कर्तव्यों के अलावा, चुनावों के आयोजन, मतदाता सूची के प्रबंधन और चुनावी निष्पक्षता के लिए जिम्मेदार होगा। संस्था के दो प्रमुखों की नियुक्ति राष्ट्रपति के आदेश से की जाएगी। यह निकाय उप-क्षेत्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चुनावी निकायों में गिनी का प्रतिनिधित्व भी करेगा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: 'अगर हमला हुआ तो पूरी अमेरिकी सेना आप पर टूट पड़ेगी', ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी
विज्ञापन
गिनी में सेना के हाथ में सत्ता
गिनी में सत्ता सेना के हाथ में है। यहां सेना ने नागरिक शासन की वापसी में देरी की है। 2021 से सत्ता में काबिज जनरल मामादी डौम्बौया ने 31 दिसंबर 2024 की समयसीमा के बाद लोकतांत्रिक परिवर्तन शुरू करने पर सहमति जताई थी। सत्तारूढ़ जुंटा के समय सीमा का पालन न करने पर विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके कारण जनवरी में गिनी की राजधानी कोनाक्री में जनजीवन ठप हो गया था।
दिसंबर में होने हैं चुनाव
पिछले महीने प्रधानमंत्री अमादौ ओरी बाह ने कहा था कि आम और राष्ट्रपति चुनाव दिसंबर 2025 में होंगे। उन्होंने 21 सितंबर को एक नया संविधान अपनाने के लिए जनमत संग्रह का भी एलान किया। अब जब चुनाव का एलान हो गया है तो विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ रही है। सैन्य शासन ने पिछले साल 50 से अधिक राजनीतिक दलों को भंग कर दिया था। दावा किया गया था कि यह कदम राजनीतिक बिसात को साफ करने के लिए उठाया गया था।
ये भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी का साइप्रस दौरा तुर्किये को संदेश, पाकिस्तान के दोस्त को झटका देने की तैयारी
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि सत्ता ने स्वतंत्र मीडिया पर भी शिकंजा कस दिया है। इसके तहत सोशल नेटवर्क और निजी रेडियो स्टेशनों को अक्सर बंद कर दिया जाता है और सूचना साइटों को बिना किसी कारण के कई महीनों तक बाधित या निलंबित कर दिया जाता है। पत्रकारों को हमलों और गिरफ्तारियों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन