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पाकिस्तान: बिलावल भुट्टो लंदन रवाना, पूर्व पीएम नवाज से कर सकते हैं मुलाकात, जानें पूरा मामला
Wed, 20 Apr 2022 04:16 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 20 Apr 2022 04:16 PM IST
सार
पाकिस्तान में चल रही सियासी उठापटक के बीच लंदन रवाना हुए बिलावल भुट्टो जरदारी पूर्व पीएम नवाज से मुलाकात कर सकते हैं। इस बीच ये संभावना भी जताई जा रही है कि वे वापस आकर विदेश मंत्री की शपथ भी ले सकते हैं।
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बिलावल भुट्टो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पाकिस्तान में चल रही सियासी उठापटक के बीच पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी बुधवार को लंदन रवाना हो गए हैं। जहां पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग(नवाज) के सुप्रीमो नवाज शरीफ से मुलाकात कर सकते हैं। इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच पाकिस्तान के वर्तमान के राजनैतिक हालातों को लेकर चर्चा हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, पीपीपी के सेक्रेटरी जनरल फरहातुल्ला बाबर ने उनके इस दौरे को लेकर बताया कि नवाज शरीफ से मुलाकात का सबसे बड़ा मकसद गठबंधन सरकार की बधाई देना और पाकिस्तान के मौजूदा राजनीतिक हालात के बारे में उन्हें अवगत कराना है।
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पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, शहबाज शरीफ और उनके अन्य सहयोगी दलों के बीच सब कुछ ठीक नहीं था, जिसे पीएम शहबाज शरीफ सुलझाना चाहते थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिलावल भुट्टो जरदारी कैबिनेट में नवाज शरीफ के साथ ही मोहसिन डावर और एएनपी और बीएनपी को भी शामिल करना चाहते थे।
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गौरतलब है कि पाकिस्तान के कार्यकारी राष्ट्रपति सादिक संजरानी ने मंगलवार को 34 सदस्यों वाली मंत्रिपरिषद को शपथ दिलाई।
प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ की वर्तमान गठबंधन सरकार पीपीपी में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। गठबंधन दलों के बीच मतभेदों के कारण कैबिनेट गठन में कई दिनों की देरी हुई। दरअसल, शुरुआत में मुख्य रूप से पीपीपी ने कैबिनेट में शामिल होने से इनकार कर दिया था। हालांकि, शहबाज शरीफ यह चाहते थे कि बिलावल की पार्टी पीपीपी उनकी सरकार में शामिल हो। मंगलवार को कैबिनेट गठन के पहले चरण में दो बार की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बेटे बिलावल अनुपस्थिति रहे, जिसके बाद इसको लेकर कई सवाल भी उठे।
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पीपीपी के सूत्रों ने कहा कि 33 वर्षीय बिलावल अभी भी मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए इच्छुक नहीं हैं। उनका मानना है कि इससे साल के आखिर में होने वाले चुनाव से पहले उनकी राजनीतिक गतिविधियों में बाधा आ सकती है,लेकिन शहबाज शरीफ इस बात पर अड़े हैं कि उन्हें इसमें शामिल होना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, बिलावल प्रमुख मुद्दों पर नवाज शरीफ के साथ चर्चा कर सौहार्दपूर्ण समाधान निकालना चाहते हैं। इस बीच इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि अगर नवाज शरीफ के साथ बातचीत में सब कुछ ठीक रहा तो बिलावल लंदन से लौटने पर विदेश मंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पाकिस्तान के दो मुख्य राजनीतिक दल हैं, जो वैकल्पिक रूप से सत्ता में रहे हैं, जब सेना देश पर शासन नहीं कर रही थी।