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पश्तून नरसंहार मुद्दे पर जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के बाहर लगाए गए पाकिस्तान विरोधी पोस्टर

Tue, 17 Sep 2019 07:11 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Gaurav Pandey Updated Tue, 17 Sep 2019 07:11 PM IST
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Posters highlighting Pashtun genocide in Pakistan put up in front of the United Nations in Geneva
पश्तून नरसंहार के खिलाफ लगाए गए पोस्टर - फोटो : एएनआई

पाकिस्तान में पश्तून नरसंहार के मुद्दे को उठाते हुए स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा में पाक विरोधी पोस्टर लगाए गए। पाकिस्तान द्वारा मानव अधिकारों के उल्लंघन को प्रदर्शित करने वाले ये पोस्टर जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के बाहर भी लगाए गए। बता दें कि फिलहाल जिनेवा में 42वां संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद सत्र चल रहा है। इसमें भारत, पाकिस्तान समेत कई देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। 

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बलूच कार्यकर्ता का आरोप, कई दशकों से नरसंहार कर रही पाक सेना

Posters highlighting Pashtun genocide in Pakistan put up in front of the United Nations in Geneva
पश्तून नरसंहार के खिलाफ लगाए गए पोस्टर - फोटो : एएनआई

बता दें कि लंबे समय से पाकिस्तान से आजादी की मांग कर रहे बलूचिस्तान के लोग इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सामने अपने क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों को बताते हुए अपनी बात रखी थी। बलूच कार्यकर्ता करीमा बलूच ने मार्च में इसी मंच से कहा था कि पाक सेना कई दशकों से बलूच प्रांच में स्थानीय लोगों की हत्या करती रही है। 

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पाक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी से की यूएन में मुद्दा उठाने की अपील

Posters highlighting Pashtun genocide in Pakistan put up in front of the United Nations in Geneva
पश्तून नरसंहार के खिलाफ लगाए गए पोस्टर - फोटो : एएनआई

पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सिंध, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले मानवाधिकार उल्लंघन का मामला संयुक्त राष्ट्र में उठाया जाया। पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के कार्यकर्ताओं ने भी नरेंद्र मोदी से इसी तरह की मांग रखी है। 

एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिका में सिंधी फाउंडेशन के निदेशक सूफी लगहरी ने कहा कि सिंध में परेशानी यह है कि वहां लोगों में डर है और सबसे कठिन चुनौती उस डर को दूर करना है। इसे सिंध के अंदर से दूर नहीं किया जा सकता है, इसलिए एकमात्र आशा बाहर के मुल्कों से है। 

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लगातार खराब हो रही है बलूचिस्तान की स्थिति

Posters highlighting Pashtun genocide in Pakistan put up in front of the United Nations in Geneva
पश्तून नरसंहार के खिलाफ लगाए गए पोस्टर - फोटो : एएनआई

लगहरी ने आगे कहा कि मैं सुझाव दूंगा कि जब पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र में आएंगे, तो उन्हें सिंध के बारे में बात करनी चाहिए क्योंकि भारत को इसका नाम सिंध से मिला था और सिंधियों के बहुत से लोग भारत में रह रहे हैं। लगहरी ने कहा कि कम से कम वह मानव अधिकारों के बारे में बात कर सकते हैं, वह सिंध में धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में बात कर सकते हैं।

इस कार्यक्रम में पीओके, बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। बलूचिस्तान के मानवाधिकार आयोग के प्रमुख ताज बलूच ने कहा कि बलूचिस्तान में स्थितियां लगातार खराब हो रहा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय हमारे ऊपर किए जा रहे अत्याचारों पर चुप्पी साधे हुए हैं। 

उन्होंने कहा कि पहले प्रांत में सिर्फ अपहरण होते थे, फिर मारो और गायब करो की शुरुआत हुई और अब गांवों को जलाने का काम किया जा रहा है। इसे नरसंहार कहते हैं। आयोग के प्रमुख ने आगे कहा कि यूएन और मानवाधिकार संस्थानों को बलूचिस्तान में आ कर यहां किए जा रहे अत्याचारों की जांच करनी चाहिए। उन्हें पाक सेना द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को रोकना होगा।

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