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Pentagon: पेंटागन ने की भारत की तारीफ, कहा- हिंदुस्तान उनके लिए महान उदाहरण, जो हमसे सुरक्षा सहायता ले रहे
Wed, 18 Jan 2023 07:29 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वांशिगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वांशिगटन
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 18 Jan 2023 07:29 PM IST
सार
सुरक्षा सहयोग को देखते हुए अमेरिका के दृष्टिकोण से हम यह कह सकते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा क्षमताओं को शामिल करना अधिक भरोसेमंद है और इसे बनाए भी रखा गया है।
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भारत और अमेरिका।
- फोटो : Social Media
विस्तार
अमेरिका ने भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने कहा है कि भारत ऐसे देशों का महान उदाहरण है जो अमेरिकी सुरक्षा प्रणालियों पर भरोसा कर रहे हैं और अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को खरीदना चुनते हैं। इस दौरान पेंटागन के प्रवक्ता पैट राइडर ने रूस से हथियार खरीदने वाले देशों पर बिना नाम लिए निशाना भी साधा।
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पेंटागन ने फिर की भारत की तारीफ
वाशिंगटन में मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसे कई देश हैं जो रूस के साथ सुरक्षा या रक्षा संबंध बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि अलग-अलग देशों के लिए एक संप्रभु निर्णय है। यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका द्वारा उनके साथ साझा की जा सकने वाली जानकारी या प्रौद्योगिकी को रूस के साथ साझा किए जाने पर कोई चिंता नहीं है? राइडर ने यह प्रतिक्रिया दी।
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पैट राइडर ने आगे कहा कि सुरक्षा सहयोग को देखते हुए अमेरिका के दृष्टिकोण से हम यह कह सकते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा क्षमताओं को शामिल करना अधिक भरोसेमंद है और इसे बनाए भी रखा गया है। ऐसे देशों के रूप में भारत एक महान उदाहरण है।
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भारत के साथ संबंधों को बताया था महत्वपूर्ण
इससे पहले हाल ही में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने कहा था कि अमेरिका के भारत के साथ रक्षा संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं। पेंटागन के प्रेस सचिव जनरल पैट राइडर ने कहा था कि जब सुरक्षा व रक्षा सहयोग की बात आती है तो भारत-अमेरिका के बीच संबंध बेहद अहम हो जाता है। इसलिए हम भारतीय नेतृत्व के साथ जुड़ना जारी रखने की उम्मीद करते हैं। उन्होंने कहा था कि हम पहले से ही ‘क्वाड’ (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के समूह) से जुड़े हैं और कई मोर्चों पर सहयोग में शामिल हैं। इसलिए हम 2023 में ऐसा करना जारी रखने के लिए तत्पर हैं।
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ा रक्षा व्यापार
गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा व्यापार में काफी बढोतरी हुई है। 1997 में जहां भारत और अमेरिका के बीच रक्षा व्यापार लगभग नगण्य था वहीं आज यह 20 बिलियन अमरीकी डॉलर से भी ऊपर पहुंच गया है।
रूस के खिलाफ यूएन में वोटिंग से भारत के दूर रहने पर हुई थी आलोचना
यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के मतदान से दूर रहने का विकल्प चुनने के लिए भारत को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों अमेरिकी सांसदों की आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, अमेरिकी अधिकारियों ने रूस से भारत द्वारा एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद पर चिंता व्यक्त की थी।
रूस से S-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीदने पर अमेरिका ने की थी कड़ी आपत्ति
साल 2018 में अक्टूबर माह में तत्कालीन ट्रम्प प्रशासन की चेतावनी के बावजूद भारत ने अपनी वायु सेना को मजबूत बनाने के लिए S-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की पांच इकाइयां खरीदने के लिए रूस के साथ 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस पर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। साथ ही अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों की धमकी के बावजूद भारत ने अपने फैसले में कोई भी बदलाव करने से इनकार कर दिया था। इतना ही नहीं मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद पर भारत रूस के साथ आगे बढ़ रहा है।
विदेश मंत्रालय ने नवंबर 2021 में साफ किया था कि भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है। इसके रक्षा अधिग्रहण उसके राष्ट्रीय सुरक्षा हितों द्वारा निर्देशित होते हैं।