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बाइडन ने रोकी थी खेप, ट्रंप ने की जारी: इस्राइल को 40 हजार खतरनाक बम देगा अमेरिका, जानें कितने में हुई डील?
Wed, 16 Sep 2026 07:49 AM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Wed, 16 Sep 2026 07:49 AM IST
सार
ट्रंप प्रशासन इस्राइल को 2,000 पाउंड के बेहद शक्तिशाली बम भेजने की तैयारी कर रहा है। ये हथियार 2.8 अरब डॉलर के प्रस्तावित हथियार सौदे का हिस्सा हैं। इन बमों की आपूर्ति को लेकर गाजा में बड़े पैमाने पर नागरिकों के हताहत होने की आशंका जताई गई थी, जिसके चलते बाइडन प्रशासन ने करीब दो साल पहले इनकी एक खेप की डिलीवरी रोक दी थी।
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डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ट्रंप प्रशासन 2.8 अरब डॉलर के प्रस्तावित हथियार सौदे के तहत इस्राइल को 40,000 शक्तिशाली 2,000 पाउंड के बम देने की तैयारी कर रहा है। इनमें 20,000 एमके-84 और 20,000 बीएलयू-117 बम शामिल हैं। यह वही श्रेणी के हथियार हैं जिनकी एक खेप बाइडन प्रशासन ने 2024 में गाजा में बड़े पैमाने पर नागरिकों के हताहत होने की आशंका के चलते रोक दी थी। प्रस्तावित सौदा ऐसे समय में सामने आया है जब गाजा में युद्ध को लेकर इस्राइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा हुआ है और युद्धविराम के बावजूद हिंसा जारी है।
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40 हजार बमों का प्रस्तावित सौदा
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, 2.8 अरब डॉलर के इस पैकेज में कुल 40,000 बम शामिल हैं। इनमें 20,000 एमके-84 (Mk84) और 20,000 बीएलयू-117 (BLU-117) बम हैं। दो अमेरिकी अधिकारियों और इस योजना से परिचित एक व्यक्ति ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। इन सभी ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बात की, क्योंकि हथियारों का यह पैकेज अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है।
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कांग्रेस को दी गई सौदे की जानकारी
अमेरिकी कांग्रेस को प्रस्तावित हथियार सौदे के बारे में अनौपचारिक रूप से जानकारी दे दी गई है। इस सौदे की बड़ी राशि विदेशी सैन्य वित्त पोषण (Foreign Military Financing) के जरिए चुकाई जाएगी। इस व्यवस्था के तहत अमेरिका इस्राइल को सैन्य सहायता के लिए धन देता है और इस्राइल उसी धन से अमेरिका से हथियार खरीदता है।
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इस्राइल की सैन्य क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक और कदम
यह प्रस्तावित सौदा ट्रंप प्रशासन की ओर से इस्राइल की सैन्य क्षमता मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों की कड़ी में नया कदम है। गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष में दसियों हजार फलस्तीनियों की मौत हुई है और पूरा इलाका बुरी तरह तबाह हुआ है। अमेरिका की मध्यस्थता से एक नाजुक युद्धविराम हुआ था, लेकिन इसके बावजूद हिंसा जारी रही है।
गाजा युद्ध के बीच बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
यह हथियार सौदा ऐसे समय में सामने आया है जब गाजा में युद्ध को लेकर इस्राइल को बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अलगाव का सामना करना पड़ रहा है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के घातक हमले के जवाब में इस्राइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद से इस्राइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ा है।
ईरान संघर्ष के बावजूद कायम है अमेरिका-इस्राइल गठजोड़
प्रस्तावित हथियार सौदा यह संकेत देता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच संबंधों में आए कुछ तनाव के बावजूद दोनों देशों का सैन्य और रणनीतिक गठजोड़ मजबूत बना हुआ है। खास तौर पर फरवरी में दोनों देशों द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने के बाद दोनों नेताओं के बीच कुछ मतभेद सामने आए थे। ट्रंप और नेतन्याहू के संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। ईरान संघर्ष को लेकर ट्रंप ने जुलाई में व्हाइट हाउस में नेतन्याहू से अपनी मुलाकात से पहले उनसे जुड़ी कुछ बातों पर नाराजगी भी जाहिर की थी।
बाइडन ने रोकी थी बमों की एक खेप
2024 में बाइडन प्रशासन ने इन 2,000 पाउंड के बमों की एक खेप इस्राइल को भेजने से रोक दी थी। हालांकि, ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उन्होंने उस रोक को हटा दिया। पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस की सामान्य समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए इस्राइल के साथ करीब 3 अरब डॉलर के हथियार सौदे को मंजूरी दी थी। इसमें 35,500 से अधिक बम शामिल थे। इसके बाद जनवरी में ट्रंप प्रशासन ने इस्राइल के लिए हथियारों की नई श्रृंखला को मंजूरी दी, जिसकी कुल कीमत 6.67 अरब डॉलर थी।
2,000 पाउंड के बम कितने शक्तिशाली हैं?
2,000 पाउंड के बमों के कई अलग-अलग संस्करण हैं। इनमें कुछ ऐसे बम हैं जिन्हें जमीन के भीतर मौजूद या भूमिगत लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। वहीं, कुछ संस्करण जमीन के ऊपर विस्फोट करते हैं और बड़े इलाके में व्यापक तबाही मचा सकते हैं।
गाजा में अमेरिकी बमों के इस्तेमाल के सबूत
इस्राइली सेना ने गाजा में इस्तेमाल किए गए बमों और तोपों के बारे में बहुत कम जानकारी सार्वजनिक की है। हालांकि, हमले के वीडियो फुटेज और घटनास्थलों से मिले विस्फोटक अवशेषों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा में अमेरिका निर्मित इन बमों का इस्तेमाल किया गया है। इन हथियारों का इस्तेमाल हमास द्वारा बनाए गए सुरंग नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए किया गया माना जाता है। लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों में इनके इस्तेमाल के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
युद्धविराम के बावजूद गाजा में हमले जारी
अक्टूबर में नाजुक युद्धविराम लागू होने के बाद गाजा में सबसे भारी लड़ाई भले ही कम हो गई हो, लेकिन इस्राइल ने इलाके में हमले जारी रखे हैं। सोमवार रात से मंगलवार तक भी किए गए कुछ हमलों में कई लोगों के मारे जाने की खबर है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब ट्रंप के दामाद और मध्य पूर्व में वार्ता के प्रमुख वार्ताकारों में शामिल जेरेड कुशनर ने पिछले महीने नेतन्याहू से मुलाकात की थी। इस मुलाकात का उद्देश्य युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाना था। कुशनर ने इस्राइल से अपने हमले कम करने का भी आग्रह किया था।
हमलों को लेकर इस्राइल और हमास के अलग-अलग दावे
सशस्त्र समूहों ने इस्राइली सैनिकों पर गोलीबारी के हमले किए हैं। इस्राइल का कहना है कि गाजा में उसके हवाई हमले ऐसे हमलों और युद्धविराम के अन्य उल्लंघनों के जवाब में किए जा रहे हैं।
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7 अक्टूबर के हमले में करीब 1,200 लोगों की मौत
2023 में हमास के नेतृत्व में दक्षिणी इस्राइल पर किए गए हमले में करीब 1,200 लोगों की मौत हुई थी। इस हमले के दौरान 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके जवाब में इस्राइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस्राइल के इस अभियान में अब तक 73,264 से अधिक फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है। इस आंकड़े में युद्धविराम लागू होने के बाद मारे गए लोग भी शामिल हैं।