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पश्चिम एशिया तनाव: मक्का की तरफ भेजा गया ड्रोन सऊदी ने इंटरसेप्ट किया, हूतियों का हमले से इनकार
Wed, 16 Sep 2026 10:36 AM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Wed, 16 Sep 2026 10:36 AM IST
सार
मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश से पहले ड्रोन मार गिराने के सऊदी दावे ने हूती-सऊदी संघर्ष को नया आयाम दे दिया है। हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है, जबकि दोनों ओर से हवाई और ड्रोन हमले जारी हैं। इस बीच सऊदी क्राउन प्रिंस ने मोखा और बाब अल-मंदब क्षेत्र में हूतियों के खिलाफ मिस्र से राजनीतिक समर्थन मांगा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले एक ड्रोन को मार गिराया है। सऊदी सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने चेतावनी दी कि मक्का और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा उसके लिए 'रेड लाइन' है और किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं और लाल सागर के रणनीतिक इलाकों में अपनी सैन्य स्थिति मजबूत कर ली है। हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप को खारिज किया है, लेकिन सीमा पार हमलों और सऊदी हवाई कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव को फिर चरम पर पहुंचा दिया है।
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मक्का के पास ड्रोन को लेकर बढ़ा तनाव
सऊदी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में पहुंचने से पहले ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। अल-मलिकी ने कहा कि पवित्र शहर और वहां आने वाले जायरीनों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि सऊदी अरब भविष्य में ऐसे हमलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकता है। हालांकि हूती पक्ष ने इस दावे को सीधे खारिज कर दिया। हूती नेता हाजेम अल-असद ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर मक्का को निशाना बनाए जाने के आरोप को “पुराना और बेबुनियाद” बताया। ऐसे में ड्रोन की उत्पत्ति और उसके वास्तविक लक्ष्य को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
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हूतियों ने सऊदी हमलों का बदला लेने की चेतावनी दी
मक्का के पास ड्रोन गिराए जाने की घटना से कुछ ही समय पहले हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने दावा किया था कि सऊदी लड़ाकू विमानों ने यमन के पांच प्रांतों में 52 हवाई हमले किए। उनके मुताबिक, एफ-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों ने सऊदी अरब के खमीस मुशैत और ताइफ स्थित हवाई ठिकानों से उड़ान भरकर तैज, अल-जौफ, अल-बायदा, सादा और अमरान में हमले किए। हूती पक्ष ने दावा किया कि इन हमलों में स्कूलों, पुलों, सड़कों और अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया गया। सऊदी अधिकारियों ने इन आरोपों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। हूती प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि सऊदी हवाई हमलों का जवाब दिया जाएगा।
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तैज में नागरिकों के मारे जाने का दावा
हूती संचालित अल-मसीरा टीवी ने बताया कि तैज प्रांत के धुबाब और मकबाना जिलों में सऊदी हवाई हमलों में तीन नागरिक मारे गए, जिनमें दो बच्चे शामिल हैं। दो अन्य लोगों के घायल होने की भी बात कही गई है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले सोमवार को हूतियों की ओर से खमीस मुशैत, अबहा और ताइफ को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की जानकारी सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दी थी। गठबंधन के अनुसार इन हमलों में 13 नागरिक घायल हुए। सऊदी पक्ष ने इसके बाद हूती हमलों के खिलाफ “जिम्मेदार और दृढ़” जवाब देने की बात कही थी।
सऊदी क्राउन प्रिंस ने मिस्र से मांगा समर्थन
बढ़ते सीमा-पार हमलों के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान मंगलवार को काहिरा पहुंचे और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने लाल सागर और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई। मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय ने सऊदी अरब के प्रति अपने 'अटूट समर्थन' की बात कही। हालांकि बैठक के बाद दोनों देशों ने सैन्य सहयोग या किसी संयुक्त अभियान की ठोस योजना की घोषणा नहीं की। काहिरा की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मिस्र अरब जगत में प्रभावशाली देश है और पिछले कुछ वर्षों में उसने क्षेत्रीय संघर्षों में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। वह ईरान और उसके सहयोगियों के साथ भी संपर्क बनाए हुए है। ऐसे में रियाद के लिए मिस्र का राजनीतिक समर्थन व्यापक अरब समर्थन जुटाने में उपयोगी हो सकता है।
मोखा और मायून पर कब्जे से बढ़ी चिंता
हूती विद्रोहियों ने 3 सितंबर से शुरू हुए अपने नए सैन्य अभियान में यमन के पश्चिमी तट पर तेजी से बढ़त बनाई है। 10 सितंबर को उन्होंने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया। इसके अगले दिन बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के बीच स्थित मायून द्वीप पर भी नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया गया। इसके अलावा बाब अल-मंदब के आसपास के अन्य रणनीतिक इलाकों में भी हूतियों की स्थिति मजबूत हुई है। यह घटनाक्रम सऊदी अरब के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाब अल-मंदब लाल सागर को अदन की खाड़ी और खुले समुद्र से जोड़ता है। एशिया की ओर जाने वाले सऊदी तेल निर्यात के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है।
तेल आपूर्ति पर भी मंडरा रहा खतरा
लाल सागर में सुरक्षा संकट के साथ सऊदी अरब की तेल आपूर्ति व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है। कुछ दिन पहले देश की महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके पीछे इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया का हाथ होने की बात कही गई है। पाइपलाइन की मरम्मत में कई सप्ताह लगने की आशंका है। इससे प्रतिदिन कई मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में समुद्री मार्गों पर हूती हमले और पाइपलाइन को नुकसान, दोनों मिलकर सऊदी अरब के सामने ऊर्जा आपूर्ति की चुनौती को और गंभीर बना रहे हैं।
सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई या कूटनीति का विकल्प
सऊदी अरब ने 2015 से हूतियों के खिलाफ लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाया था, लेकिन जमीन पर निर्णायक सफलता नहीं मिल सकी। 2022 में संघर्ष में एक तरह की शांति आने के बाद हालात अपेक्षाकृत शांत हुए थे। अब हूतियों की नई सैन्य बढ़त ने उस स्थिति को फिर बदल दिया है। रियाद के सामने अब यह सवाल है कि वह हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को कितना आगे बढ़ाए। बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने से सऊदी शहरों और तेल प्रतिष्ठानों पर जवाबी हमलों का खतरा बढ़ सकता है। दूसरी ओर, हूतियों को बाब अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के आसपास मजबूत स्थिति बनाने देना भी सऊदी सुरक्षा और तेल निर्यात के लिए चुनौती बन सकता है।
यमन में फिर गहराया मानवीय संकट
युद्ध के दोबारा तेज होने का सबसे गंभीर असर यमन की आम आबादी पर पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में हूती और सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष में 500 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इससे पहले के सप्ताह में करीब 200 लोगों के मारे जाने की जानकारी थी। लगभग 94,000 लोग विस्थापित हुए हैं। सेव द चिल्ड्रन के मुताबिक, 1 अगस्त से 9 सितंबर के बीच कम से कम 117 नागरिक मारे गए, जिनमें 19 बच्चे थे। सितंबर के पहले सप्ताह में 43 बच्चों के मारे जाने या घायल होने की जानकारी दी गई है। संगठन ने कहा कि बढ़ती हिंसा का सबसे बड़ा खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
लाल सागर संकट का असर मिस्र तक
हूती हमलों से मिस्र की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है। गाजा युद्ध के दौरान लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण स्वेज नहर से गुजरने वाले समुद्री यातायात में गिरावट आई थी, जिससे मिस्र के राजस्व पर दबाव पड़ा। अब सऊदी तेल निर्यात पर किसी बड़ी बाधा का असर स्वेज नहर और क्षेत्र के अन्य ऊर्जा परिवहन मार्गों पर भी पड़ सकता है। सऊदी अरब के लिए स्थिति इसलिए भी जटिल है क्योंकि उसका सबसे अहम सहयोगी अमेरिका पहले से ही क्षेत्रीय युद्धों और तनाव के बीच अपनी भूमिका को लेकर दबाव में है। संयुक्त अरब अमीरात भी हूतियों के खिलाफ सऊदी नेतृत्व वाले पुराने सैन्य गठबंधन से पीछे हट चुका है।
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संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता
यमन के संयुक्त राष्ट्र राजदूत अब्दुल्ला अल-सादी ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद में हूतियों के खिलाफ हथियार प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने और बढ़ती हिंसा की निंदा करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि बाब अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण व्यापार और ऊर्जा मार्ग को किसी सशस्त्र संगठन के दबाव के साधन में बदलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। यमन की स्थिति अब केवल एक घरेलू संघर्ष नहीं रह गई है। मक्का के पास ड्रोन को लेकर सऊदी दावे, लाल सागर में हूती गतिविधियां, बाब अल-मंदब पर नियंत्रण की लड़ाई और तेल आपूर्ति पर पड़ता दबाव इन सभी घटनाओं ने संकट को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे में बदल दिया है। आने वाले दिनों में सऊदी अरब की सैन्य प्रतिक्रिया और मिस्र समेत अरब देशों के राजनीतिक समर्थन से यह तय होगा कि तनाव किस दिशा में बढ़ता है।