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China: टेक्नलॉजी कंपनियों पर चीन सरकार के शिकंजे से विदेशी निवेशकों में घबराहट; जानें पूरा मामला

Tue, 14 Mar 2023 10:31 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बीजिंग
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बीजिंग Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 14 Mar 2023 10:31 PM IST
सार

विशेषज्ञों के मुताबिक शी की टिप्पणी का मतलब है कि वे अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनजर चीन की कंपनियों एक एकजुट होकर काम करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह संदेश दिया है कि अगर चीन की निजी और सरकारी कंपनियों ने एकजुट होकर काम करना शुरू नहीं किया, तो प्रतिस्पर्धा में वे अमेरिकी कंपनियों से पिछड़ जाएंगी। 

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Panic among foreign investors due to Chinese government clampdown on technology companies Latest News Update
शी जिनपिंग - फोटो : Social Media

विस्तार

चीन में अब टेक्नोलॉजी सेक्टर पर सरकार का शिकंजा और कसेगा। चीन की ससंद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के सोमवार को खत्म हुए सत्र के दौरान यह बात जाहिर हुई। इस संकेत से विदेशी निवेशक आशंकित हैं। कुछ खबरों में अंदेशा जताया गया है कि सरकार की तरफ से संभावित सख्ती के कारण चीन से पूंजी का पलायन शुरू हो सकता है। 

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अमेरिका की तरफ से लगातार लगाए जा रहे प्रतिबंधों के कारण अब चीन सरकार ने टेक्नोलॉजी क्षेत्र में ‘आत्म सुधार और आत्म विकास’ की नीति अपना ली है। जानकारों के मुताबिक इस नीति के तहत जो कदम उठाए जाएंगे, वह दो साल अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग्स आदि जैसी कंपनियों के खिलाफ हुई कार्रवाई से भी ज्यादा आगे जाएंगे। 
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीते छह मार्च को बीजिंग फ्रेंडशिप होटेल में चीन की पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधियों के साथ इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया। यह कांफ्रेंस चीन की सर्वोच्च राजनीतिक सलाहकार समिति है, जिसका सत्र हर वर्ष नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के साथ ही होता है। छह मार्च को हुई बैठक के बारे में कुछ खास जानकारियां अब सामने आई हैं। 
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वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में कॉन्टेम्पॉरेरी ऐमपेरेक्स टेक्नोलॉजी (सीएटीएल) के चेयरमैन जेंग युकुन ने कहा कि उनकी कंपनी लगातार छह वर्ष तक विश्व बैटरी बाजार में अग्रणी रही है। इस पर शी ने प्रतिक्रिया दी कि इसको लेकर वे खुश हैं, लेकिन चिंतित भी हैं। उन्होंने अंदेशा जताया कि इससे देश के बैटरी उद्योग में एक होड़ शुरू हो जाएगी, जिससे अंत में यह उपलब्धि समाप्त हो जाएगी। उन्होंने इस मामले में सरकार के अधिक नियंत्रण की जरूरत बताई। 

विशेषज्ञों के मुताबिक शी की टिप्पणी का मतलब है कि वे अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनजर चीन की कंपनियों एक एकजुट होकर काम करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह संदेश दिया है कि अगर चीन की निजी और सरकारी कंपनियों ने एकजुट होकर काम करना शुरू नहीं किया, तो प्रतिस्पर्धा में वे अमेरिकी कंपनियों से पिछड़ जाएंगी। 

चीन सरकार ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में देश की शक्ति बढाने और संसाधनों को इकट्ठा करने का एक नया राष्ट्रव्यापी सिस्टम निर्मित करने का आह्वान किया है। देश की नई विज्ञान एवं तकनीक नीति को बीते शुक्रवार को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने पारित किया, जिसमें इस बात का उल्लेख है। 

इस नीति के पारित होने के बाद विदेशी निवेशक चिंतित हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि अब कंपनियों के मामले में सरकारी दखल बढ़ेगा। इसका खराब असर कंपनियों की आविष्कार और उत्पादक क्षमता पर पड़ सकता है। 


बाजार के जानकारों के मुताबिक निवेशकों को चीन की नीति में ऐसे बदलाव का अंदेशा पहले से था। दिसंबर में जब चीन ने जीरो कोविड नीति को बदला, तब अचानक चीन और हांगकांग के शेयर बाजारों में निवेश की होड़ लग गई। जनवरी में हांगकांग के शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों ने 20.4 बिलियन डॉलर का निवेश किया। लेकिन मार्च में बिकवाली तेज हो गई है। सिर्फ बीते शुक्रवार को निवेशकों ने सात करोड़ 60 लाख युवान की रकम हांगकांग के शेयर बाजार से निकाल ली। 

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