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इमरान के फैसले के कारण पाक में चक्का जाम, आम आदमी से लेकर बिजनेसमैन तक सड़कों पर उतरे
Sun, 14 Jul 2019 05:23 AM IST
Avdhesh Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sun, 14 Jul 2019 05:23 AM IST
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इमरान खान
पाकिस्तान में आज आम आदमी से लेकर बिजनेसमैन तक सड़क पर उतर आए, जिससे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, पाकिस्तान की आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए इमरान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज लेने का फैसला किया। लेकिन मंजूरी मिलने के बाद भी कर्ज की शर्तों ने पाकिस्तानियों में बेचैनी पैदा कर दी है। जिसके कारण पाकिस्तानी नागरिकों ने शनिवार इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया।
पाकिस्तान के तमाम बड़े शहर शनिवार को बंद रहे और पाकिस्तान के अन्य विपक्षी दलों ने भी इस बंद को समर्थन दिया। बंद पर कारोबारी संगठनों का कहना है कि उन्हें इससे आपत्ति नहीं है कि सरकार कर दायरे को बढ़ाना चाहती है, लेकिन यहां बल प्रयोग किया जा रहा है जो मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में उद्योग-धंधों की हालत खस्ता है। कारोबारियों के संगठन ऑल पाकिस्तान मरकजी अंजुमन-ए-ताजिरान के अध्यक्ष अजमल बलोच ने इस्लामाबाद में कहा कि यह हड़ताल सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि आईएमएफ के निर्देश पर बजट में किए गए ‘कारोबारी विरोधी’ कर प्रावधान के खिलाफ है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान की सरकार अभी तक जनता को जो करों में राहत दे रही थी, उसे वापस लेना होगा। इसके अलावा नए करों को लागू करना है। यही नहीं, आईएमएफ का कहना है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान की सरकार को सरकारी नौकरियों में भी कटौती करनी होगी, ताकि सरकार पर आर्थिक बोझ कम हो सके। जिसके बाद से ही विरोध हो रही है।
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पाकिस्तान के तमाम बड़े शहर शनिवार को बंद रहे और पाकिस्तान के अन्य विपक्षी दलों ने भी इस बंद को समर्थन दिया। बंद पर कारोबारी संगठनों का कहना है कि उन्हें इससे आपत्ति नहीं है कि सरकार कर दायरे को बढ़ाना चाहती है, लेकिन यहां बल प्रयोग किया जा रहा है जो मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में उद्योग-धंधों की हालत खस्ता है। कारोबारियों के संगठन ऑल पाकिस्तान मरकजी अंजुमन-ए-ताजिरान के अध्यक्ष अजमल बलोच ने इस्लामाबाद में कहा कि यह हड़ताल सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि आईएमएफ के निर्देश पर बजट में किए गए ‘कारोबारी विरोधी’ कर प्रावधान के खिलाफ है।
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गौरतलब है कि पाकिस्तान की सरकार अभी तक जनता को जो करों में राहत दे रही थी, उसे वापस लेना होगा। इसके अलावा नए करों को लागू करना है। यही नहीं, आईएमएफ का कहना है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान की सरकार को सरकारी नौकरियों में भी कटौती करनी होगी, ताकि सरकार पर आर्थिक बोझ कम हो सके। जिसके बाद से ही विरोध हो रही है।
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