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Report: 'भारत के मुसलमानों को यह नहीं भूलना चाहिए कि...' रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर बोला पाकिस्तानी मीडिया

Mon, 22 Jan 2024 04:12 PM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 22 Jan 2024 04:12 PM IST
सार

प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में संपन्न हुआ। पूरा देश राम मय हो गया है। आइए जानते हैं 500 साल बाद राम मंदिर मिलने पर पाकिस्तानी मीडिया की क्या प्रतिक्रिया है।

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Pakistani media reaction on ram mandir inauguration in Ayodhya world update news
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर पहुंचे। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

लंबे बरसे के बाद आखिरकार अयोध्या में रामलला विराजमान हो गए हैं। रामजन्मभूमि पर मस्जिद के निर्माण से लेकर वापस राम लला के भव्य मंदिर बनने तक लगभग पांच सदियां लग गईं। चुनौतियों और लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार भक्तों को उनका राम मंदिर मिल गया है। प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में संपन्न हुआ। पूरा देश राम मय हो गया है। आइए जानते हैं 500 साल बाद राम मंदिर मिलने पर पाकिस्तानी मीडिया की क्या प्रतिक्रिया है।

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वेटिकन सिटी जैसा शहर बनने को तैयार
भारत के साथ-साथ अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की चर्चा विदेशों में भी खूब हो रही हैं। पाकिस्तान के अखबारों ने इसे लेकर लिखा है कि बाबरी मस्जिद को गिराकर बनाए गए राम मंदिर में आज पीएम रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करने जा रहे हैं। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द डॉन ने एक ऑपिनियन लेख प्रकाशित किया है, जिसमें लेखक परवेज हुदभोय ने लिखा है कि जहां पहले पांच शताब्दी पुरानी बाबरी मस्जिद हुआ करती थी, अब वहां राम मंदिर बन रहा है। राम मंदिर के चारों तरफ वेटिकन सिटी जैसा शहर बनने को तैयार है।
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भारत के मुसलमान यह न भूलें
उन्होंने आगे लिखा, 'नए भारत में अब धार्मिक साम्प्रदायिकता घृणा की तरह नहीं मानी जाती है।' परवेज ने कहा, 'हिंदुत्व का संदेश दो वर्गों को टारगेट करता है। पहला है- भारत के मुसलमान, जिस तरह पाकिस्तान अपनी हिंदू आबादी को कम अधिकारों वाले दोयम दर्जे के नागरिकों के रूप में देखता है, उसी तरह भारत में मुसलमानों को भी यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि वे उन आक्रमणकारियों की अनचाही संतान हैं, जिन्होंने एक प्राचीन भूमि को बर्बाद कर दिया और उसकी महिमा को लूट लिया।'
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जैसे को तैसा मिला
पाकिस्तानी अखबार ने आगे लिखा है कि मार्च 2023 में 'जय श्री राम' के नारे लगाती भीड़ ने एक सदी पुराने मदरसे और प्राचीन लाइब्रेरी को जला दिया था। 12वीं सदी में मुस्लिम आक्रमणकारी, बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय को आग के हवाले कर दिया था, जिसमें वहां की विशाल लाइब्रेरी जलकर खाक हो गई थी। हिंदुत्ववादियों का मदरसे और लाइब्रेरी को जलाना 'जैसे को तैसा' वाली बात थी।

हिंदू विरोधी के रूप...
लेख में हिंदुत्व के दूसरे टार्गेट का जिक्र करते हुए लिखा गया, 'दूसरा संदेश भाजपा के विपक्ष, कांग्रेस के लिए है कि वो धर्मनिरपेक्षता को छोड़ धार्मिक पिच पर आए और भाजपा के साथ खेलती दिखी। अगर वो ऐसा नहीं करती है तो उसे हिंदू विरोधी के रूप में देखा जाएगा।'

भाजपा ने किया था वादा
पाकिस्तान टुडे ने लिखा है कि सोमवार को उस जगह पर एक विशाल मंदिर का उद्घाटन किया गया, जिसे लाखों भारतीय राम का जन्मस्थान मानते हैं। मंदिर का निर्माण पिछले 35 सालों से हो रहा है। मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी ने मंदिर निर्माण का वादा किया था और यह उनके लिए हमेशा से एक राजनीतिक मुद्दा रहा है, जिसने पार्टी को सत्ता में आने और यहां बने रहने में मदद की है।

अखबार ने लिखा, 'हिंदू समूह अयोध्या में उद्घाटन समारोह को सदियों से मुस्लिम और औपनिवेशिक शक्तियों के अधीन रहने के बाद हिंदू जागृति के रूप में चित्रित कर रहा है। समारोह को मई में होने वाले आम चुनावों के लिए पीएम मोदी के चुनावी अभियान की आभासी शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है।'

अखबार ने लिखा कि दशकों तक मंदिर स्थल विवाद का केंद्र रहा क्योंकि हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष ही इस पर अपना दावा करते रहे। साल 1992 में हिंदुओं की भीड़ ने 16वीं सदी में बनी बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया था। भारत के बहुसंख्यक हिंदुओं का कहना है कि यह स्थान भगवान राम का जन्मस्थान है और 1528 में मुस्लिम मुगलों ने एक मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया था। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन हिंदुओं को सौंप दी और मुसलमानों को अलग प्लॉट देने का आदेश दिया था।

2025 तक पूरा बनेगा मंदिर
राम मंदिर की विशालता का जिक्र करते हुए पाकिस्तानी अखबार ने लिखा, 'मंदिर 2.67 एकड़ में बनाया जा रहा है जिसका परिसर 70 एकड़ में फैला है। माना जा रहा है कि दिसंबर 2025 में मंदिर पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। अनुमान है कि मंदिर बनाने में 15 अरब रुपये खर्च होंगे।'

धर्मनिरपेक्षता भगवा राजनीति के पहाड़ तले दब गई
अलजजीरा ने एक ऑपिनियन लेख छापा है जिसमें लिखा है कि 'भारत की धर्मनिरपेक्षता भगवा राजनीति के पहाड़ तले दब गई है।' भारत की राजनीतिक टिप्पणीकार इंसिया वाहन्वति के लिखे लेख में कहा गया है कि धर्मनिरपेक्ष भारत के किसी प्रधानमंत्री का मंदिर का उद्घाटन करना अनुचित है।


लेख में कहा गया, 'बाबरी मंदिर का विध्वंस आज भी मुसलमानों के लिए दुखदायी है। विध्वंस के बाद हुए दंगों में जो लोग मारे गए, हममें से कई लोगों को आज भी वो याद हैं। राजनीतिक वादे किए गए कि मस्जिद फिर से बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं।'

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