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पाकिस्तान: आतंकी हमले का शिकार हुए 36 नागरिकों को मुआवजा देगी इमरान सरकार, रिपोर्ट में दावा

Wed, 19 Jan 2022 07:57 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 19 Jan 2022 07:57 PM IST
सार

गौरतलब है कि पिछले साल 13 जुलाई को आतंकियों ने चीनी कर्मचारियों को खैबर पख्तूनख्वा की दासू पनबिजली परियोजना की साइट पर ले जा रही बस को निशाना बनाया था। इस हमले में दस चीनी कर्मचारियों की मौत हुई थी। वहीं, 26 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

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Pakistan to compensate Chinese nationals who came under Terror attack in Khyber Pakhtunkhwa news and updates
इमरान खान - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पिछले साल आतंकी हमले का शिकार हुए 36 चीनी नागरिकों को इमरान सरकार मुआवजा देगी। एक रिपोर्ट में इससे जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं। इस फैसले को पाकिस्तान की क्षेत्र में अपने सदाबहार करीबी सहयोगी चीन को लुभाने की एक और कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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गौरतलब है कि पिछले साल 13 जुलाई को आतंकियों ने चीनी कर्मचारियों को खैबर पख्तूनख्वा की दासू पनबिजली परियोजना की साइट पर ले जा रही बस को निशाना बनाया था। इस हमले में दस चीनी कर्मचारी, जिनमें अधिकतर इंजीनियर शामिल थे, कि मौत हुई थी। वहीं, 26 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त मंत्री शौकत तरीन की अध्यक्षता वाली पाकिस्तान की आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) चीनी नागरिकों को दिए जाने वाले मुआवजे की रकम तय करेगी। यह रकम 81 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (46 लाख डॉलर) से लेकर 151 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (2.03 करोड़ डॉलर) तक हो सकती है।
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दासू पनबिजली परियोजना का वित्त पोषण विश्व बैंक करता है। यह परियोजना चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपेक) के दायरे में नहीं आती है। अखबार के मुताबिक, आतंकी हमले के पीड़ित चीनी नागरिकों को मुआवजा देकर पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों में आई बड़ी दरार को दूर करना चाहता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने सरकार पर कोई कानूनी या संविदा संबंधी बाध्यता न होने के बावजूद चीनी नागरिकों को मुआवजा देने का निर्णय लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपने नागरिकों पर हमले को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उसने घटना के विरोध में सीपीईसी की संयुक्त सहयोग समिति की एक प्रस्तावित बैठक भी कथित रूप से रद्द कर दी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले के बाद चीनी ठेकेदारों ने परियोजना से जुड़ा काम भी रोक दिया था। उन्होंने पीड़ितों के लिए 3.7 करोड़ डॉलर तक के मुआवजे की मांग की थी। यह रकम चीन में आतंकी हमले की सूरत में सरकार की ओर से दी जाने वाली मुआवजा राशि से 500 फीसदी ज्यादा थी।


पाकिस्तान सरकार ने शुरुआत में हमले को आतंकी वारदात मानने से इनकार कर दिया था। उसने घटना को गैस लीक से जोड़ने की कोशिश की थी। हालांकि, बाद में इस्लामाबाद ने स्वीकार किया था कि यह एक आतंकी वारदात थी। चीन ने घटना की जांच के लिए विशेषज्ञों का एक दल भी पाकिस्तान भेजा था। रिपोर्ट के अनुसार, हमले में चार पाकिस्तानी नागरिकों ने भी जान गंवाई थी। हालांकि, इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन नागरिकों के परिजन भी मुआवजे के हकदार होंगे या नहीं।
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