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Pakistan: सत्तारूढ़ पार्टी और न्यायपालिका के बीच टकराव, CJP से जुड़े विधेयक पर सरकार व राजनीतिक दलों को नोटिस

Thu, 13 Apr 2023 07:26 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, इस्लामाबाद।
पीटीआई, इस्लामाबाद। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 13 Apr 2023 07:26 PM IST
सार

शीर्ष अदालत की आठ-न्यायाधीशों की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट (अभ्यास और प्रक्रिया) विधेयक, 2023 के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई की। यह विधेयक पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करने और अपने दम पर बेंच गठित करने की शक्तियों को कम करता है।

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Pakistan Supreme Court issues notices to federal govt, political parties on bill clipping Chief Justice powers
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सत्तारूढ़ गठबंधन और न्यायपालिका के बीच बढ़ते टकराव के बीच देश के मुख्य न्यायाधीश की शक्तियों को कम करने वाले बिल के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई की और संघीय सरकार और राजनीतिक दलों को नोटिस जारी किए। शीर्ष अदालत ने यह कहते हुए सुनवाई अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी कि न्यायाधीशों की उपलब्धता को देखते हुए कार्यवाही की तारीख की घोषणा की जाएगी।

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डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता एक महत्वपूर्ण मामला है, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि संसद के लिए उनके मन में बहुत सम्मान है। शीर्ष अदालत की आठ-न्यायाधीशों की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट (अभ्यास और प्रक्रिया) विधेयक, 2023 के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई की। यह विधेयक पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू करने और अपने दम पर बेंच गठित करने की शक्तियों को कम करता है।
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इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश बंदियाल के अलावा न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन, न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर, न्यायमूर्ति मजहर अली अकबर नकवी, न्यायमूर्ति मुहम्मद अली मजहर, न्यायमूर्ति आयशा मलिक, न्यायमूर्ति हसन अजहर रिजवी और न्यायमूर्ति शाहिद वहीद शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने राजनीतिक दलों, संघीय सरकार, पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (एजीपी) मंसूर अवान, पाकिस्तान बार काउंसिल (पीबीसी), सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान और मामले में अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए।
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याचिकाकर्ता के वकील इम्तियाज ने कहा कि दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, लेकिन राष्ट्रपति ने आपत्ति जताते हुए इसे वापस संसद को भेज दिया। हालांकि, राष्ट्रपति की आपत्तियों की समीक्षा नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि संयुक्त सत्र द्वारा अनुमोदन के बाद दस दिनों में यह विधेयक कानून बन जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 191 के तहत सुप्रीम कोर्ट अपने नियम खुद बनाता है। इम्तियाज ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय संसद द्वारा पारित विधेयक को अमान्य कर सकता है, क्योंकि मुख्य न्यायाधीश के बिना शीर्ष अदालत का अस्तित्व नहीं हो सकता।

संसदीय पैनल ने पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतीय चुनावों के लिए धन की मांग वाले बिल को खारिज किया

पाकिस्तान के संसदीय पैनल ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में चुनावों के लिए धन की मांग करने वाले एक विधेयक को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने चार अप्रैल को संघीय सरकार को पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) को सोमवार तक 21 अरब रुपये मुहैया कराने का आदेश दिया था ताकि वह पंजाब और खैबर-पख्तूनख्वा प्रांतों में चुनाव करा सके।

इसके बजाय, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने चुनाव कराने के लिए ईसीपी को आवश्यक धनराशि जारी करने को अधिकृत करने के लिए सोमवार को संसद में "आम चुनाव के लिए शुल्क (पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय विधानसभाएं) विधेयक 2023" नामक एक विधेयक पेश किया। इस बिल को नेशनल असेंबली स्पीकर द्वारा चर्चा के लिए वित्त और राजस्व के लिए सदन की स्थायी समिति को भेजा गया, जिसे गुरुवार को खारिज कर दिया गया।

डॉन अखबार की खबर के मुताबिक, समिति की बैठक के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के पैनल अध्यक्ष कैसर अहमद शेख ने विधेयक को खारिज करने की घोषणा की। रिपोर्ट में अहमद शेख के हवाले से कहा गया है कि यह विधेयक हमारे बजट में आवंटित नहीं किया गया था और वित्त मंत्री ने कहा है कि धन उपलब्ध नहीं है, कोई अन्य विकल्प नहीं था इसलिए हमने इसे खारिज कर दिया। बता दें कि पंजाब में 14 मई को चुनाव होने हैं, लेकिन खैबर पख्तूनख्वा के लिए चुनाव की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

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