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फिर चीन की पनाह में इमरान: बढ़ते संकट के बीच बीजिंग जाने का बनाया कार्यक्रम

Sat, 08 Jan 2022 12:56 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 08 Jan 2022 12:56 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान की कोशिश चीन को यह बताने की है कि सीपीईसी को लेकर फैलने वाली ज्यादातर खबरें निराधार हैं। पाकिस्तान उनके अमल में पूरी कोशिश से जुटा हुआ है। बताया जाता है कि यही संदेश लेकर इमरान खान बीजिंग जाएंगे। विश्लेषकों के मुताबिक इमरान खान सरकार इस समय कई आर्थिक और राजनीतिक मुश्किलों से घिरी हुई है...

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Pakistan Prime Minister Imran Khan will visit China next month to strengthen the bilateral ties between China and Pakistan
चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अगले महीने चीन जाएंगे। बताया गया है कि उनकी यात्रा का मकसद चीन और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना होगा। इस बीच चीन को खुश करने के प्रयास में उन्होंने चीनी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में रुकावट बन रही लालफीताशाही को तुरंत खत्म करने का आदेश दिया है। इमरान की प्रस्तावित चीन यात्रा का एलान चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के लिए प्रधानमंत्री के विशेष सहायक खालिद मंसूर ने किया है।

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खफा हैं चीनी अधिकारी

खबरों के मुताबिक इमरान खान अब पाकिस्तान में चीनी उद्यमों से जुड़े मामलों की सीधी देखरेख कर रहे हैं। खालिद मंसूर ने दावा किया कि सीपीईसी प्राधिकरण इस परियोजना पर अमल के रास्ते में मौजूद सभी रुकावटों को दूर करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है। इसके तहत थार कोल एनर्जी प्रोजेक्ट को चालू किया जा चुका है। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि सीपीईसी से जुड़ी कई परियोजनाओं पर विभिन्न कारणों से उम्मीद के मुताबिक काम आगे नहीं बढ़ा है। इससे चीनी अधिकारी खफा हैं।

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पिछले दिनों ऑल पाकिस्तान चाइनीज एंटरप्राइज एसोसिएशन (एपीसीईए) की एक विशेष बैठक हुई थी। बताया जाता है कि उसमें 100 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसे जिन लोगों ने संबोधित किया, उनमें एपीसीईए के अध्यक्ष यांग जियानदोउ भी थे। ये संस्था मुख्य रूप से पाकिस्तान में काम कर रही चीनी कंपनियों की नुमाइंदगी करती है। एपीसीईए की बैठक में सीपीईसी से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति पर असंतोष जताया गया। उसी बैठक में पाकिस्तान सरकार के प्रतिनिधि ने एलान किया कि इमरान खान फरवरी में चीन जाएंगे। पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने कहा कि इमरान खान की यात्रा से पाकिस्तान और चीन के रिश्ते और मजबूत होंगे।
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पर्यवेक्षकों का कहना है कि एपीसीईए की बैठक में यह घोषणा कर पाकिस्तान सरकार ने संकेत दिया कि वह चीनी परियोजनाओं को सर्वोच्च महत्त्व देती है। बताया जाता है कि बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने इस एलान का स्वागत किया। बैठक में पाकिस्तान स्थित चीनी राजदूत नोंग रोंग भी शामिल थे।

पाक सीनेटर ने किया आगाह

इस बैठक में मौजूद पाकिस्तान के सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने ध्यान दिलाया कि हाल में अमेरिका ने स्ट्रेटेजिक कॉम्पीटिशन एक्ट पारित किया है। उसके तहत 30 करोड़ डॉलर का एक फंड बनाया गया है, जिसका मकसद चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना है। हुसैन ने चीनी कंपनियों को आगाह किया कि इस फंड का इस्तेमाल दुष्प्रचार अभियान चलाने के लिए किया जा सकता है। इसलिए संभावित ‘गलत खबरों’ के लिए उन्हें तैयार रहना चाहिए।



पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान की कोशिश चीन को यह बताने की है कि सीपीईसी को लेकर फैलने वाली ज्यादातर खबरें निराधार हैं। पाकिस्तान उनके अमल में पूरी कोशिश से जुटा हुआ है। बताया जाता है कि यही संदेश लेकर इमरान खान बीजिंग जाएंगे। विश्लेषकों के मुताबिक इमरान खान सरकार इस समय कई आर्थिक और राजनीतिक मुश्किलों से घिरी हुई है। इसके बीच चीन की किसी प्रकार की नाराजगी झेलने की स्थिति में वह नहीं है। इसीलिए इमरान खान ने चीन जाकर सफाई देने का फैसला किया है।

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