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Pakistan: पूर्व ISI महानिदेशक को जांच आयोग ने दी क्लीन चीट, 2017 में हुए टीएलपी के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला

Tue, 16 Apr 2024 08:51 PM IST
जलज मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 16 Apr 2024 08:51 PM IST
सार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा के नेतृत्व वाली एक पीठ ने प्रदर्शन की जांच और आरोपियों की पहचान करने के आदेश दिए। पूर्व अफसर सैयद अख्तर अली शाह ने जांच आयोग का नेतृत्व किया।

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Pakistan Inquiry commission clean chit to Former ISI chief General Faiz Hamid
पाकिस्तान - फोटो : एएनआई

विस्तार

पाकिस्तान के खुफिया विभाग इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के पूर्व महानिदेशक को राहत मिल गई है। पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) फैज हामिद को इस्लामाबाद-रावलपिंडी में हुए कट्टरपंथी धार्मिक समूह के विरोध प्रदर्शन की जांच कर रही टीम ने क्लीन चिट दे दिया है। दरअसल, 2017 में तहरीक-ए-लबैक पाकिस्तान नाम के कट्टरपंथी समूह ने इस्लामाबाद की घेराबंदी कर मांग की थी कि पाकिस्तान से फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित किया जाए। समूह ईशनिंदा और कार्टून बनाए जाने से खफा था।

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2019 में मुख्य न्यायाधीश ने दिए जांच के आदेश 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा के नेतृत्व वाली एक पीठ ने प्रदर्शन की जांच और आरोपियों की पहचान करने के आदेश दिए। पूर्व अफसर सैयद अख्तर अली शाह ने जांच आयोग का नेतृत्व किया। आयोग में इस्लामाबाद के पूर्व पुलिस प्रमुख ताहिर आलम खान और आंतरिक मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव खुशाल खान शामिल थे। आयोग को जिम्मेदारी थी कि वे उन लोगों की पहचान करे, जिन्होंने प्रदर्शन की योजना बनाई और फंडिंग की। 

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पूर्व आईएसआई महानिदेशक को बरी करने का बताया यह कारण
जांच आयोग ने खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों को यह कहते हुए बरी किया कि प्रांतीय और संघीय सरकारों के किसी भी पूर्व उच्च अधिकारी ने एजेंसी या उनके अधिकारियों पर कट्टरपंथी समूह की सहायता करने का आरोप नहीं लगाया है। मामले में खुफिया विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी कोई अन्य सबूत सामने नहीं आ पाए हैं इसलिए इन्हें बरी किया जाता है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो पूर्व आईएसआई प्रमुख ने विरोध को समाप्त कराने के लिए टीएलपी के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर हामिद की काफी आलोचना हुई थी। आयोग की जांच में सामने आया कि हामिद को शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तत्कालीन डीजी आईएसआई और तत्कालीन सेना प्रमुख ने उन्हें इसकी अनुमति भी दी थी।

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