पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने मौजूदा सरकार और देश की संस्थाओं की आलोचना की है। उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना सैन्य शासक याह्या खान के दौरे से की और आरोप लगाया कि देश की संस्थाओं को तबाह किया जा रहा है।
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इमरान खान
- फोटो : एएनआई (फाइल)
'देश की संस्थाओं को तबाह कर रहा याह्या खान पार्ट-2'
इमरान ने अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की भी आलोचना की और मौजूदा सरकार को 'याह्या खान पार्ट-2' करार दिया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "देश एक बार फिर याह्या खान के शासन को महसूस कर रहा है। याह्या खान ने देश की सबसे बड़ी सियासी पार्टी के खिलाफ ऑपरेशन चलाया था। यह याह्या खान पार्ट-2 वहीं कर रहा है और देश की संस्थाओं को नष्ट कर रहा है।"
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एएनआई
'फैसला सुनाने वाले जज को दी करोड़ों की जमीन'
पीटीआई के संस्थापक ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार जजों को गलत फैसले लेने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा, याह्या खान पार्ट-2 की सरकार ने जज हुमायूं दिलावर को करोड़ों रुपये की जमीन और अवैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दी, जिससे मेरे खिलाफ फैसला सुनाया गया। याह्या खान पाकिस्तान के तीसरे राष्ट्रपति थे और उनके शासन के दौरान पूर्व पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) ने आजादी हासिल की थी। उन्होंने चुनाव के नतीजों को स्वीकार नहीं किया था, जिससे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए था और 1971 का युद्ध हुआ था।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
- फोटो : एएनआई (फाइल)
'शहबाज को प्रधानमंत्री कहने का कोई मतलब नहीं'
उन्होंने मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर भी निशाना साधा। इमरान खान ने कहा, शहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री कहने का कोई मतलब नहीं है। वे केवल एक मोहरे हैं, जिनके फैसले प्रतिष्ठान की मंजूरी पर निर्भर हैं। हगो सकता है कि इस मोहरे को कल जबरन गायब कर दिया जाए।
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पाकिस्तान के करेंसी नोट
- फोटो : आईस्टॉक
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को लेकर साधा निशाना
इसके साथ ही, इमरान ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, सिंगापुर कराची से भी कम आबादी वाला देश है और पाकिस्तान से ज्यादा निवेश आकर्षित कर रहा है। सिंगापुर में निवेशक अरबों डॉलर ला रहे हैं। जबकि पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, उसका विदेशी निवेश अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। निवेश केवल उन्हीं देशों में होते हैं, जहां कानून का राज हो।