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पाकिस्तान: आईएमएफ के हाथ देश की ‘संप्रभुता गिरवी’ रख रही है इमरान सरकार

Mon, 03 Jan 2022 04:02 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 03 Jan 2022 04:02 PM IST
सार

आईएमएफ शर्तों को पूरा करने के लिए इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सरकार संसद से वित्त पूरक बिल-2021 पारित कराना चाहती है। इसे यहां आम बोलचाल में मिनी बजट कहा जा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक अगर ये बिल पारित हो गया, तो आईएमएफ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति की समीक्षा को फिलहाल टाल सकता है...

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Pakistan: If Imran Khan government does not fulfill the conditions of the IMF, then the IMF can stop the payment of the first installment of the loan sanctioned
जो बाइडन और इमरान खान - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

पाकिस्तान की इमरान खान सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की शर्तों को पूरा करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। अगर ये शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो आईएमएफ पाकिस्तान के लिए मंजूर कर्ज की पहली किस्त का भुगतान रोक सकता है। इस बारे में निर्णय के लिए आईएमएफ बैठक इसी महीने होने वाली है। आईएमएफ ने पिछले साल पाकिस्तान के लिए कर्ज मंजूर करते समय कुछ शर्तें लगाई थीं। प्रस्तावित बैठक में इस बात की समीक्षा होगी कि इमरान खान सरकार ने उन शर्तों को पूरा किया या नहीं।

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सरकार लाए मिनी बजट

आईएमएफ शर्तों को पूरा करने के लिए इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सरकार संसद से वित्त पूरक बिल-2021 पारित कराना चाहती है। इसे यहां आम बोलचाल में मिनी बजट कहा जा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक अगर ये बिल पारित हो गया, तो आईएमएफ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति की समीक्षा को फिलहाल टाल सकता है। इसलिए ऐसी खबरें हैं कि पीटीआई सरकार संबंधित विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद के ऊपरी सदन सीनेट की विशेष बैठक बुलाने की तैयारी में है।

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प्रस्तावित बिल में टैक्स और शुल्क से संबंधित कई कानूनों में संशोधन किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान बिल भी पारित करना चाहती है, जिसके तहत बैंक की निर्णय प्रक्रिया से संबंधित आईएमएफ की कुछ शर्तों को कानूनी रूप मिल जाएगा। आईएमएफ ने अपनी ईपीएफ (विस्तारित कोष सुविधा) से पाकिस्तान के लिए छह अरब डॉलर का कर्ज मंजूर किया था। लेकिन उसने शर्त लगाई थी कि ये रकम उसकी शर्तों के पालन पर निर्भर करेगा। आईएमएफ बोर्ड की बैठक 12 जनवरी को होने वाली है, जिसमें ईपीएफ से पाकिस्तान को एक अरब डॉलर के भुगतान पर फैसला होना है।

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बिलों के खिलाफ अड़ा विपक्ष

सीनेट की बैठक बीते 29 दिसंबर को अचानक स्थगित कर दी गई थी। उसके ठीक पहले दोनों प्रस्तावित बिल उसमें पेश कर दिए गए थे। इन दोनों विधेयकों पर विपक्ष का रुख गरम रहा है। विपक्षी दलों ने एलान किया था कि वे इन विधेयकों को पारित नहीं होने देंगे, क्योंकि इनसे देश की आर्थिक संप्रभुता खतरे में पड़ेगी। उन्होंने इमरान खान सरकार पर पाकिस्तान की आर्थिक संप्रभुता को गिरवी रखने का आरोप लगाया है और कहा है कि प्रस्तावित कानूनी संशोधनों से देश के आम इनसान की मुसीबत बढ़ेगी।


लेकिन सरकार के लिए राहत की बात यह है कि पीटीआई के सभी सहयोगी दल इस मुद्दे पर इमरान खान सरकार के साथ खड़े हैं। पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) ने विधेयकों को समर्थन देने का एलान किया है। सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने दावा किया है कि मुतैहिदा कौमी मूवमेंट ने भी दोनों विधेयकों का समर्थन किया है।


इसके बावजूद विश्लेषकों का कहना है कि अगर विपक्षी दल अड़े रहे, तो सरकार को इन विधेयकों को संसदीय समिति के पास भेजना पड़ सकता है। तब वह आईएमएफ की समयसीमा के अंदर इन्हें पारित नहीं करा पाएगी। शायद सरकार इस संभावना के लिए भी तैयार है। एक सरकारी प्रवक्ता ने अखबार द डॉन से बातचीत में दावा किया कि आईएमएफ ने जो संशोधन सुझाए हैं, उसके लिए उसने कोई समयसीमा तय नहीं की है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि तुरंत बिल पारित ना होने पर मंजूर कर्ज के तहत भुगतान में और देर हो सकती है। जबकि बिगड़ती आर्थिक स्थिति के कारण पाकिस्तान को तुरंत विदेशी मुद्रा की जरूरत है।

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