पाकिस्तान: इमरान खान की पहेली का शहबाज शरीफ सरकार के पास कोई हल नहीं?
बुधवार को आजादी मार्च के सिलसिले में इस्लामाबाद आ रहे पीटीआई के समर्थकों की जगह-जगह पुलिस से भिड़ंत हुई। पीटीआई का दावा है कि उसके पांच समर्थक पुलिस कार्रवाई में मारे गए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि देश में उसके कार्यकर्ताओं और नेताओं को घर-घर जाकर पुलिस ने हिरासत में लिया...
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के ‘आजादी मार्च’ ने शहबाज शरीफ सरकार को सांसत में डाल दिया है। सरकार ने इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इसांफ (पीटीआई) के इस कार्यक्रम को रोकने के लिए देश भर में दमन का रास्ता अपनाया। लेकिन इससे उसे मीडिया के उन हिस्सों की आलोचना भी झेलनी पड़ रही है, जिनका अब तक उसे समर्थन मिल रहा था। उधर न्यायपालिका के दखल के कारण इमरान खान समर्थक प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद न घुसने देने की उसकी योजना भी नाकाम हो गई।
इमरान खान ने गुरुवार सुबह शरीफ सरकार को नए चुनाव का एलान करने के लिए छह दिन का समय दिया। इस्लामाबाद में अपने हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर इस समयसीमा के बीच नए चुनाव का एलान नहीं हुआ, तो वे फिर अपने और लाखों समर्थकों से इस्लामाबाद पहुंचने की अपील करेंगे। इमरान ने कहा- ‘मैंने फैसला किया है कि जब तक सरकार संघीय और प्रांतीय असेंबलियों को भंग कर नए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं करती है, मैं यहीं धरना दूंगा। मैंने पिछले 24 घंटों में यह देखा है कि ये सरकार देश को अराजकता की तरफ ले जा रही है।’
समर्थकों की पुलिस से हो रही भिड़ंत
बुधवार को आजादी मार्च के सिलसिले में इस्लामाबाद आ रहे पीटीआई के समर्थकों की जगह-जगह पुलिस से भिड़ंत हुई। पीटीआई का दावा है कि उसके पांच समर्थक पुलिस कार्रवाई में मारे गए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि देश में उसके कार्यकर्ताओं और नेताओं को घर-घर जाकर पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान लाहौर में एक पीटीआई नेता को हिरासत में लेने जब पुलिस पहुंची, तो वहां उस नेता के समर्थकों से उसकी भिड़ंत हो गई। इसमें एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई।
मीडिया रिपोर्टों में पुलिस कार्रवाई की पुष्टि की गई है। इन रिपोर्टों के मुताबिक पीटीआई के 1,700 से ज्यादा समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है। लेकिन सरकार ने इस बारे में चुप्पी साध रखी है। बुधवार को पीटीआई समर्थकों को इस्लामाबाद पहुंचने से रोकने के लिए रास्तों पर शिपिंग कंटेनर और ट्रक खड़ा कर दिए गए थे। इस वजह से इमरान खान हेलीकॉप्टर से राजधानी आए।
शहबाज शरीफ सरकार ने पहले ही कहा था कि वह आजादी मार्च को इस्लामाबाद नहीं पहुंचने देगी। लेकिन इस्लामाबाद हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उसे एक हद तक अपना इरादा बदलना पड़ा। लेकिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को कहा कि धरने की राजनीति देश की प्रगति और स्थिरता के लिए हानिकारक है।
धरने से खतरे में अर्थव्यवस्था
विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि पीटीआई के अभियान से देश में बन रही अस्थिरता की हालत का असर पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अतिरिक्त आर्थिक सहायता पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ बुधवार को हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। इस बातचीत का मकसद छह बिलियन डॉलर के मंजूर हुए कर्ज की किश्तें जारी करने के लिए आईएमएफ को राजी करना था।
विश्लेषकों के मुताबिक आईएमएफ की नजर पाकिस्तान में बढ़ रही अस्थिरता पर है। उसने शर्त रखी है कि कर्ज की अगली किश्त पाने के पहले पाकिस्तान को पेट्रोलियम पर से सब्सिडी हटानी होगी। लेकिन इमरान खान के जारी हमलों के बीच सरकार के लिए ऐसा करना कठिन बना हुआ है। जबकि अर्थशास्त्रियों की राय है कि आईएमएफ से कर्ज की अगली किश्त जल्द ना मिली, तो पाकिस्तान की आर्थिक हालत श्रीलंका जैसी हो जा सकती है।