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चुनाव का नैरेटिव तैयार: इमरान ने आखिर पाकिस्तान की अंदरूनी सियासत में अमेरिका को क्यों घसीटा?

Tue, 05 Apr 2022 07:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 05 Apr 2022 07:03 PM IST
सार

अमेरिकी विश्लेषकों के मुताबिक इमरान खान ने दक्षिण एशियाई मामलों के प्रभारी अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डॉनल्ड लू की तरफ से भेजे गए एक संदेश को अपने इल्जाम का आधार बनाया है। डॉनल्ड लू इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि उन्होंने अमेरिका स्थित पाकिस्तानी दूतावास को संदेश भेजा था...

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Pakistan Crisis: Experts says in the midst of his loosing political ground in the country, Imran Khan made US cable of Donald Lu an excuse
इमरान खान - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जिस तरह देश की अंदरूनी सियासत मे अमेरिका को घसीटा है, उस पर अमेरिकी विश्लेषक गहरा एतराज जता रहे हैं। जो बाइडन प्रशासन भी इस पर अपनी नाखुशी जता चुका है। बीते दो अप्रैल को इमरान खान ने अमेरिका पर सीधा आरोप लगाया था। उन्होंने कहा- ‘मुझे हटाने की कोशिश पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति में अमेरिका का खुला हस्तक्षेप है।’

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अमेरिकी विश्लेषकों के मुताबिक इमरान खान ने दक्षिण एशियाई मामलों के प्रभारी अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डॉनल्ड लू की तरफ से भेजे गए एक संदेश को अपने इल्जाम का आधार बनाया है। डॉनल्ड लू इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि उन्होंने अमेरिका स्थित पाकिस्तानी दूतावास को संदेश भेजा था। लू के मुताबिक इसमें उन्होंने आग्रह किया था कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन मसले पर रूस की निंदा के लिए लाए गए प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करे।
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विश्लेषकों की राय है कि देश में अपनी खिसकती सियासी जमीन के बीच इमरान खान ने लू के इस पत्र को बहाना बना लिया। इसको लेकर उन्होंने बीते 27 मार्च को देश की सुरक्षा संबंधी सर्वोच्च संस्था- नेशनल सिक्योरिटी कमेटी की बैठक बुला ली। इस कमेटी में सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख, खुफिया एजेंसियों के प्रमुख, और विदेश एवं रक्षा मंत्रालय से संबंधित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
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इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में फेलॉ शुजा नवाज ने कहा- ‘पाकिस्तान में सस्ती लोकप्रियता की सियासत करने वाले नेताओं को आर्थिक और घरेलू आर्थिक समस्याओं का समाधान ढूंढने के बजाय अमेरिका को निशाना बनाना आसान तरीका लगता है।’ शुजा द बैटल फॉर पाकिस्तानः द बिटर यूएस फ्रेंडशिप एंड ए टफ नेबरहुड नाम की किताब लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में ऐसी सियासत इसलिए चल जाती है कि क्योंकि वहां सिविल सोसायटी विखंडित अवस्था में है।

पाकिस्तान के रिटायर्ड खुफिया अधिकारी मोहम्मद जीशान ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘एक समय अमेरिका पाकिस्तान का सबसे बड़ा सहयोगी देश था। लेकिन अब दोनों देशों के बीच रिश्ता लेन-देन पर आधारित हो गया है। पाकिस्तान के लोग अमेरिकी चीजों, परंपरा और संस्कृति को पसंद करते हैं। लेकिन अतीत में जिस तरह अमेरिका ने पाकिस्तान और पाकिस्तानियों का दुरुपयोग किया, वह बात लोग अब नहीं पचा पाते। पाकिस्तान की आम जनता धार्मिक होने की वजह से दक्षिणपंथी है। लेकिन सिर्फ वही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे लोग भी अमेरिकी हस्तक्षेप की बात से सहमत हो जाते हैं। आज कल पाकिस्तान की सड़कों पर फैशन अमेरिका विरोधी होने का है।’


वाशिंगटन स्थित हडसन इंस्टीट्यूट में सीनियर स्कॉलर हुसैन हक्कानी ने कहा- ‘इमरान खान सेना की मदद से सत्ता में आए। लेकिन अब अगर सेना ने कहा है कि वह राजनीति में तटस्थ है, तो इसका मतलब है कि इमरान खान ने सेना का समर्थन खो दिया है। इसलिए इमरान खान अब अल्लाह और इस्लाम के नाम पर जन समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही वे अमेरिकी खतरे का भय भी दिखा रहे हैं।’ हक्कानी पहले अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत भी रह चुके हैं।

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