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Pakistan Crisis: विशेषज्ञों का दावा- पाकिस्तान में वित्तीय आपातकाल घोषित न हुआ, तो होगा श्रीलंका जैसा हाल

Wed, 18 May 2022 04:30 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 18 May 2022 04:30 PM IST
सार

पाकिस्तानी रुपये की कीमत पिछले हफ्ते रिकॉर्ड सीमा तक गिर गई। एक समय एक डॉलर लगभग 195 रुपये के बराबर हो गया था। उधर, पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में बीते दो दिन में 900 अंकों की और गिरावट आ चुकी है।

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Pakistan Crisis Experts claim If financial emergency is not declared in Pakistan then there will be a situation like Sri Lanka Latest Update
शहबाज शरीफ - फोटो : facebook/ShehbazSharif

विस्तार

पाकिस्तान में बेहद गरम सियासी माहौल के बीच देश की अर्थव्यवस्था के श्रीलंका की राह पर जाने के संकेत मजबूत हो रहे हैं। नीति निर्माताओं को अंदेशा है कि आर्थिक हालात बिगड़ने से देश राजनीतिक अस्थिरता की तरफ जा सकता है। इस ताजा आंकड़े ने यहां सबकी चिंता बढ़ा दी है कि मौजूदा वित्त वर्ष में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 21.72 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। इसे देखते हुए अर्थशास्त्रियों ने देश में वित्तीय आपातकाल लागू करने की सलाह दी है, ताकि हालात को और बिगड़ने से रोका जा सके। इन विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि देश के कॉरपोरेट सेक्टर मिली आठ खरब रुपये की टैक्स रियायत को तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही जमीन और अन्य जायदाद पर नए टैक्स लगाए जाएं, ताकि सरकारी खजाने को खाली होने से बचाया जा सके।

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आर्थिक विशेषज्ञों ने गैर जरूरी रक्षा खर्च घटाने, 1600 सीसी से अधिक क्षमता वाले वाहनों पर इमरजेंसी टैक्स लगाने, बिजली शुल्क दो गुना करने और आठ सौ वर्ग गज से अधिक के आवासीय जायदाद पर कर लगाने की सलाह भी शाहबाज शरीफ सरकार को दी है। कुछ सलाहकारों का मानना है कि कामकाज के दिनों को भी कम कर के ईंधन और बिजली की वजह से पड़ने वाले आर्थिक बोझ से बचा जा सकता है। इस्लामाबाद स्थित विशेषज्ञ फारूख सलीम ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा कि डॉलर की आवक घटने के कारण रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। चीन, सऊदी अरब, और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे मित्र देशों से भी पर्याप्त सहायता नहीं मिली है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से छह बिलियन डॉलर के बेलआउट पैकेज मिलने में हो रही देर से विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई है।
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पाकिस्तानी रुपये की कीमत पिछले हफ्ते रिकॉर्ड सीमा तक गिर गई। एक समय एक डॉलर लगभग 195 रुपये के बराबर हो गया था। उधर, पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में बीते दो दिन में 900 अंकों की और गिरावट आ चुकी है। इससे निवेशकों का भरोसा खत्म हो रहा है। फारूख सलीम ने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास अब सिर्फ 10.44 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचा है। इसमें वो रकम भी शामिल है, जो चीन, सऊदी अरब और यूएई ने सहायता के रूप में दी है।
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सलीम ने कहा कि इतने गंभीर हालात से तभी निकला जा सकता है, जब देश में वित्तीय आपातकाल लागू किया जाए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आपातकालीन स्थिति का अंदाजा लगने के बाद ही पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने बीते दस मई को प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और उनकी सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों को विचार-विमर्श के लिए लंदन बुलाया था।


विश्लेषकों का कहना है कि सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के लिए कुआं और खाई के बीच एक चुनने जैसी स्थिति खड़ी हो गई है। अगर वह अर्थव्यवस्था संभालने के लिए आपातकालीन कदम उठाती है, तो उसका खामियाजा उसे साल भर बाद होने वाले आम चुनाव में उठाना पड़ सकता है। इसलिए पार्टी में एक राय यह बनी है कि यह जोखिम उठाने के बजाय नेशनल और प्रांतीय असेंबलियों को समय से पहले भंग करवा लिया जाए। इससे नए चुनाव की मांग के लिए चलाया जा रहा इमरान खान का अभियान भी खत्म हो जाएगा, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर अभी देश चुनाव में फंसाया गया, तो आर्थिक संकट के श्रीलंका जैसी शक्ल ले लेने की संभावना बढ़ जाएगी।

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