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PAK की दगाबाजी: US से अरबों लेने के बाद सऊदी को दिया धोखा, मुश्किल घड़ी में पीठ में छुरा घोंपा; क्या है मामला?
Sat, 11 Apr 2026 05:23 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, काबुल
आईएएनएस, काबुल
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 11 Apr 2026 05:23 PM IST
सार
पाकिस्तान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह केवल आर्थिक फायदे के लिए गठबंधन करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के साथ 'रणनीतिक रक्षा समझौते' के बावजूद, ईरानी हमलों के समय पाकिस्तान ने अपनी सेना और हथियार भेजने से इनकार कर दिया।
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शहबाज शरीफ, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री
- फोटो : @अमर उजाला
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विस्तार
अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए दुनिया भर में कटोरा लेकर घूमने वाले पाकिस्तान का असली चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है। दशकों तक 'इस्लामी भाईचारे' की दुहाई देकर सऊदी अरब के खजाने का फायदा उठाने वाले पाकिस्तान ने अब जरूरत पड़ने पर अपने सबसे बड़े मददगार को ही ठेंगा दिखा दिया है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ हुए द्विपक्षीय रक्षा समझौते (एसएमडीए) को केवल कागज का टुकड़ा बना कर रख दिया है।
ईरानी हमलों के बीच सऊदी को छोड़ दिया अकेला
'अफगान डायस्पोरा नेटवर्क' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब सऊदी अरब पर ईरानी हमलों का खतरा मंडरा रहा था, तब पाकिस्तान ने मदद के नाम पर केवल खोखली बयानबाजी की। पाकिस्तानी उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने 3 मार्च को संसद में दावा किया था कि उन्होंने ईरान को सऊदी के साथ हुए 'रणनीतिक रक्षा समझौते' की याद दिलाई है। लेकिन हकीकत यह है कि जब जमीन पर सैन्य कार्रवाई की बात आई, तो पाकिस्तान पीछे हट गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सऊदी अरब ने उम्मीद की थी कि पाकिस्तान अपनी वायु सेना, लड़ाकू विमान और मिसाइल इंटरसेप्टर बैटरी तैनात करेगा, लेकिन मदद भेजने के बजाय मध्यस्थता का नाटक शुरू कर दिया।
यह भी पढ़ें: US-Iran Talk: जेडी वेंस क्यों कर रहे ईरान से बातचीत का नेतृत्व, ट्रंप के दामाद-दोस्त कैसे पहुंचे पिछली सीट पर?
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एमबीएस के सामने गिड़गिड़ाया
रिपोर्ट के मुताबिक, 12 मार्च को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को जेद्दा बुलाया था। वहां सऊदी अरब ने सीधे तौर पर रक्षा समझौते (एसएमडीए) का हवाला देते हुए सैन्य सक्रियता की मांग की। लेकिन पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद का बहाना बनाकर हाथ खड़े कर दिए। हैरानी की बात यह है कि अफगानिस्तान के साथ संघर्ष खुद पाकिस्तान ने शुरू किया था, जिसे अब वह सऊदी अरब की मदद न करने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। क्राउन प्रिंस इस दगाबाजी से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं।
मदद के नाम पर सिर्फ डॉलर मांगे
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने किसी देश के साथ 'डबल गेम' खेला हो। रिपोर्ट में कुछ अहम उदाहरण दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आतंक के खिलाफ जंग के नाम पर अमेरिका से अरबों डॉलर मांगे, लेकिन बदले में उन्हीं आतंकियों को पनाह दी जिनसे अमेरिका लड़ रहा था। इतना ही नहीं, चीन से सीपीईसी के नाम पर भारी निवेश लिया, लेकिन आज वहां चीनी नागरिकों और प्रोजेक्ट्स को सुरक्षा देने में भी नाकाम है। इसके अलावा, जब सऊदी ने यमन में हूतियों के खिलाफ मदद मांगी थी, तब भी पाकिस्तान की संसद ने वोट देकर सऊदी को बीच मझधार में छोड़ दिया था।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आज जब सऊदी अरब पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अरबों डॉलर अपने बैंक में जमा रखता है और लाखों पाकिस्तानी श्रमिकों को रोजगार देता है, तब पाकिस्तान का यह रवैया एक विश्वासघात से कम नहीं है।
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ईरानी हमलों के बीच सऊदी को छोड़ दिया अकेला
'अफगान डायस्पोरा नेटवर्क' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब सऊदी अरब पर ईरानी हमलों का खतरा मंडरा रहा था, तब पाकिस्तान ने मदद के नाम पर केवल खोखली बयानबाजी की। पाकिस्तानी उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने 3 मार्च को संसद में दावा किया था कि उन्होंने ईरान को सऊदी के साथ हुए 'रणनीतिक रक्षा समझौते' की याद दिलाई है। लेकिन हकीकत यह है कि जब जमीन पर सैन्य कार्रवाई की बात आई, तो पाकिस्तान पीछे हट गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सऊदी अरब ने उम्मीद की थी कि पाकिस्तान अपनी वायु सेना, लड़ाकू विमान और मिसाइल इंटरसेप्टर बैटरी तैनात करेगा, लेकिन मदद भेजने के बजाय मध्यस्थता का नाटक शुरू कर दिया।
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एमबीएस के सामने गिड़गिड़ाया
रिपोर्ट के मुताबिक, 12 मार्च को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को जेद्दा बुलाया था। वहां सऊदी अरब ने सीधे तौर पर रक्षा समझौते (एसएमडीए) का हवाला देते हुए सैन्य सक्रियता की मांग की। लेकिन पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद का बहाना बनाकर हाथ खड़े कर दिए। हैरानी की बात यह है कि अफगानिस्तान के साथ संघर्ष खुद पाकिस्तान ने शुरू किया था, जिसे अब वह सऊदी अरब की मदद न करने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। क्राउन प्रिंस इस दगाबाजी से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं।
मदद के नाम पर सिर्फ डॉलर मांगे
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने किसी देश के साथ 'डबल गेम' खेला हो। रिपोर्ट में कुछ अहम उदाहरण दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आतंक के खिलाफ जंग के नाम पर अमेरिका से अरबों डॉलर मांगे, लेकिन बदले में उन्हीं आतंकियों को पनाह दी जिनसे अमेरिका लड़ रहा था। इतना ही नहीं, चीन से सीपीईसी के नाम पर भारी निवेश लिया, लेकिन आज वहां चीनी नागरिकों और प्रोजेक्ट्स को सुरक्षा देने में भी नाकाम है। इसके अलावा, जब सऊदी ने यमन में हूतियों के खिलाफ मदद मांगी थी, तब भी पाकिस्तान की संसद ने वोट देकर सऊदी को बीच मझधार में छोड़ दिया था।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आज जब सऊदी अरब पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अरबों डॉलर अपने बैंक में जमा रखता है और लाखों पाकिस्तानी श्रमिकों को रोजगार देता है, तब पाकिस्तान का यह रवैया एक विश्वासघात से कम नहीं है।