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यूएनजीए: पाकिस्तानी PM ने खालिस्तानी आतंकी की हत्या को बताया दुर्भाग्यपूर्ण, कहा- हिंदुत्व के विचारकों का काम
Fri, 22 Sep 2023 11:24 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 22 Sep 2023 11:24 PM IST
सार
काकर ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में फिर कश्मीर का राग अलापा और दावा किया कि जम्मू-कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुद्दों में से एक है।
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Anwaarul Haq Kakar
- फोटो : UN TV
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विस्तार
पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मुद्दे पर अब वह भी कनाडा के साथ खड़ा हो गया है। इसके कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर उल-हक काकर ने शुक्रवार निज्जर की हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि यह हिंदुत्व के विचारकों का कृत्य है।
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काकर ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में फिर कश्मीर का राग अलापा और दावा किया कि जम्मू-कश्मीर मुद्दा संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुद्दों में से एक है। उन्होंने कहा कि पाकस्तान भारत सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण और उपयोगी संबंध चाहता है और कश्मीर पाकिस्तान और भारत के बीच शांति की कुंजी है।
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पाकिस्तान की यह फितरत बन बन गई है कि वह संयुक्त राष्ट्र या अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एजेंडा या बातचीत का मुद्दा कोई भी हो कश्मीर को लेकर रोना रोता ही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र में कुछ ऐसा ही हुआ। काकर ने कहा कि पाकिस्तान भारत समेत अपने सभी पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण और सकारात्मक संबंध चाहता है। लेकिन यह भी जोड़ दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुख्य मुद्दा है।
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भारत संयुक्त राष्ट्र समेत हर मंच पर बहुत ही स्पष्टता और मजबूती के साथ कहता आया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे। भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वह उसके साथ आतंकवाद, दुश्मनी और हिंसा मुक्त माहौल में सामान्य पड़ोसी वाला संबंध चाहता है। भारत ने यह कहा कि पाकिस्तान को कश्मीर राग अलापने की जगह अपने घरेलू मामलों को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने कहा, 'भारत सुरक्षा परिषद के उन प्रस्तावों को लागू करने से बचता रहा है जिसमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के अंतिम फैसले का फैसला वहां के लोगों द्वारा संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह के जरिए किया जाए। अगस्त 2019 के बाद से, भारत ने कश्मीर के लिए अंतिम समाधान को लागू करने के लिए अवैध रूप से कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में 900,000 सैनिकों को तैनात किया है।'
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के भारत सरकार के फैसले के बाद इमरान खान के नेतृत्व वाली तत्कालीन पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में भारत के राजदूत को निष्कासित कर दिया और द्विपक्षीय व्यापार को रोक दिया।
इमरान के समर्थकों ने उड़ाया काकर का मजाक
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक काकर के शब्दों के चयन को लेकर उनका मजाक उड़ा रहे हैं और उनके देश के साथ चीन के मजबूत संबंधों की तुलना इस्राइल के लिए अमेरिका के समर्थन से कर रहे हैं।
'डॉन' अखबार की खबर के मुताबिक, सोशल मीडिया पर यह आलोचना ऐसे समय में हो रही है जब एक दिन पहले ही काकर ने 78वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान विदेश संबंध परिषद में यह तुलना की।