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बुलिंग: बुरे दौर ने स्कूल में कर दिया था अलग-थलग, अब दूसरों को लड़ना सिखा रही 15 वर्षीय छात्रा
Wed, 14 Oct 2026 06:11 AM IST
नितिन गौतम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 14 Oct 2026 06:11 AM IST
सार
स्कूलों में बच्चों का उत्पीड़न उन्हें जीवन भर के लिए मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में कैलिफोर्निया में 15 साल की छात्रा आन्या मुखर्जी ने एक संगठन बनाया है, जो छात्रों को उत्पीड़न से लड़ना सिखा रहा है।
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आन्या मुखर्जी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कई किशोरों के लिए स्कूल केवल पढ़ने की जगह नहीं है। यह वह स्थान है जहां वे दोस्ती बनाते हैं, खुद को पहचानते हैं और यह समझना शुरू करते हैं कि वे कहां से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन जब उस दायरे में बुलिंग (उत्पीड़न) प्रवेश करती है, तो ये बच्चे के स्कूल के अनुभव से कहीं अधिक को प्रभावित कर सकती है। यह उनके आत्मविश्वास को हिला सकती है, उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है और उन्हें अलग-थलग महसूस करा सकती है, तब भी जब वे लोगों से घिरे हों।
कैलिफोर्निया की 15 वर्षीय आन्या मुखर्जी के लिए यह सिर्फ एक संभावना नहीं थी। यह एक ऐसा अनुभव था जिससे वह खुद गुजरी थीं। आन्या खुद संभली और अब अन्य किशोरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रही है। उसने 'बाय योरसेल्फ फ्लावर्स' बनाया, जो मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और युवा लोगों को उनकी भलाई के बारे में बातचीत में शामिल करने पर केंद्रित एक किशोर-नेतृत्व वाला गैर-लाभकारी संगठन है।
बच्चों के साथ खड़ा होना पड़ेगा
जब बच्चे किसी कठिन अनुभव को साझा करते हैं, तो वयस्क अनायास ही उसे ठीक करने का प्रयास कर सकते हैं। वे उन्हें अन्य बच्चों को नजरअंदाज करने, अपने लिए खड़े होने या अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कह सकते हैं।
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स्कूलों में उत्पीड़न से उबरने के लिए बांटे किट
आन्या की पहलों में से एक है ‘ब्लूम बॉक्सेस’ का वितरण, जो छोटे मानसिक स्वास्थ्य टूलकिट हैं जिनमें हर्बल चाय, मोमबत्तियां, सकारात्मक बाते, मिनी जर्नल्स, फेस मास्क और सहायता संसाधनों की एक सूची जैसी वस्तुएं शामिल हैं। आन्या ने कहा कि संगठन ने इस क्षेत्र के स्कूलों में लगभग 500 बॉक्स वितरित किए हैं। वह किशोरों द्वारा आयोजित कार्यशालाओं को आयोजित करने में भी मदद करती हैं और उन्होंने एक पॉडकास्ट शुरू किया है।
लगता था बुलिंग कभी खत्म नहीं होगी, पर हुई
पीपल पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में, आन्या ने याद किया कि जिस अवधि में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था, उस दौरान वह कितना अकेलापन महसूस करती थीं। उन्होंने कहा, जब यह मेरे साथ हुआ, तो मैं खुद को बहुत अलग-थलग महसूस करती थी। मुझे नहीं लगता था कि मेरा कोई दोस्त बनेगा और मुझे नहीं लगता था कि यह कभी खत्म होगा... लेकिन यह खत्म हुआ।
माता-पिता के लिए भी सबक
उनका अनुभव माता-पिता को एक महत्वपूर्ण याद दिलाता है, बच्चे हमेशा वयस्कों को यह नहीं बता सकते कि वे किस दौर से गुजर रहे हैं, और बुलिंग के प्रभाव तुरंत दिखाई देने वाली चीजों से कहीं आगे तक जा सकते हैं।
पीपल के अनुसार, आन्या को अपने शुरुआती हाई स्कूल के वर्षों में अफवाहों, उनके और उनके परिवार के बारे में झूठी कहानियों, उत्पीड़न और कभी-कभार पीछा किए जाने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। उसन हिम्मत कर पिता को यह बात बताई तो परिवार ने उनके घर के नजदीक स्थित उस निजी स्कूल से मदद मांगी लेकिन मदद नहीं मिली।
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कैलिफोर्निया की 15 वर्षीय आन्या मुखर्जी के लिए यह सिर्फ एक संभावना नहीं थी। यह एक ऐसा अनुभव था जिससे वह खुद गुजरी थीं। आन्या खुद संभली और अब अन्य किशोरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रही है। उसने 'बाय योरसेल्फ फ्लावर्स' बनाया, जो मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और युवा लोगों को उनकी भलाई के बारे में बातचीत में शामिल करने पर केंद्रित एक किशोर-नेतृत्व वाला गैर-लाभकारी संगठन है।
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बच्चों के साथ खड़ा होना पड़ेगा
जब बच्चे किसी कठिन अनुभव को साझा करते हैं, तो वयस्क अनायास ही उसे ठीक करने का प्रयास कर सकते हैं। वे उन्हें अन्य बच्चों को नजरअंदाज करने, अपने लिए खड़े होने या अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कह सकते हैं।
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स्कूलों में उत्पीड़न से उबरने के लिए बांटे किट
आन्या की पहलों में से एक है ‘ब्लूम बॉक्सेस’ का वितरण, जो छोटे मानसिक स्वास्थ्य टूलकिट हैं जिनमें हर्बल चाय, मोमबत्तियां, सकारात्मक बाते, मिनी जर्नल्स, फेस मास्क और सहायता संसाधनों की एक सूची जैसी वस्तुएं शामिल हैं। आन्या ने कहा कि संगठन ने इस क्षेत्र के स्कूलों में लगभग 500 बॉक्स वितरित किए हैं। वह किशोरों द्वारा आयोजित कार्यशालाओं को आयोजित करने में भी मदद करती हैं और उन्होंने एक पॉडकास्ट शुरू किया है।
लगता था बुलिंग कभी खत्म नहीं होगी, पर हुई
पीपल पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में, आन्या ने याद किया कि जिस अवधि में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था, उस दौरान वह कितना अकेलापन महसूस करती थीं। उन्होंने कहा, जब यह मेरे साथ हुआ, तो मैं खुद को बहुत अलग-थलग महसूस करती थी। मुझे नहीं लगता था कि मेरा कोई दोस्त बनेगा और मुझे नहीं लगता था कि यह कभी खत्म होगा... लेकिन यह खत्म हुआ।
माता-पिता के लिए भी सबक
उनका अनुभव माता-पिता को एक महत्वपूर्ण याद दिलाता है, बच्चे हमेशा वयस्कों को यह नहीं बता सकते कि वे किस दौर से गुजर रहे हैं, और बुलिंग के प्रभाव तुरंत दिखाई देने वाली चीजों से कहीं आगे तक जा सकते हैं।
पीपल के अनुसार, आन्या को अपने शुरुआती हाई स्कूल के वर्षों में अफवाहों, उनके और उनके परिवार के बारे में झूठी कहानियों, उत्पीड़न और कभी-कभार पीछा किए जाने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। उसन हिम्मत कर पिता को यह बात बताई तो परिवार ने उनके घर के नजदीक स्थित उस निजी स्कूल से मदद मांगी लेकिन मदद नहीं मिली।