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US: भारत-चीन संबंधों को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ऐसा संतुलन बनाना जरूरी, जो हमारे हितों के लिए सही हो

Tue, 01 Jul 2025 11:24 PM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 01 Jul 2025 11:24 PM IST
सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों में एक संतुलन बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच ऐसा संतुलन बनाना जरूरी है, जो भारत के लिए उचित हो। साथ ही लाभ को अधिकतम करने के लिए अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों का भी फायदा उठाना चाहिए।

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On India-China relations MEA Jaishankar says it necessary to maintain balance which right for our interests
एस जयशंकर, विदेश मंत्री, भारत - फोटो : एएनआई

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को भारत-चीन संबंधों को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच ऐसा संतुलन बनाना जरूरी है, जो भारत के हितों के लिए सही हो। उन्होंने यह बात अमेरिका की मैगजीन न्यूजवीक के साथ बातचीत के दौरान कही। 

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विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि भारत इंडो-पैसिफिक में अपनी भूमिका को मजबूत करने के लिए रणनीतिक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। 
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अमेरिका-चीन संबंधों में पहले जैसी बात नहीं रही
विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और चीन के रिश्तों में अब पहले जैसी बात नहीं रही, बल्कि अब उनके बीच प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। यह देखते हुए कि दोनों देशों के पास एक-दूसरे के प्रति रणनीतिक दृष्टिकोण और सामरिक दृष्टिकोण हैं। ऐसे माहौल में भारत इस बात का आकलन कर रहा है कि कैसे अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाया जाए। 
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भारत-चीन संबंधों में संतुलन की आवश्यकता पर डाला प्रकाश
विदेश मंत्री ने भारत-चीन संबंधों में एक संतुलन बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच ऐसा संतुलन बनाना जरूरी है, जो भारत के लिए उचित हो। साथ ही लाभ को अधिकतम करने के लिए अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों का भी फायदा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम चीन के सबसे बड़े पड़ोसी हैं। हमारे बीच व्यापार भी बहुत बड़ा है, हालांकि उसमें असंतुलन है। हमें यह देखना है कि चीन के साथ हमारे रिश्ते कैसे स्थिर रहें और हमें नुकसान न हो। साथ ही, अमेरिका के साथ हम कैसे और गहराई से सहयोग करें ताकि हमें ज्यादा लाभ मिले।'


भारत-चीन संबंधों में सुधार की उम्मीद
पिछले साल अक्तूबर में भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दो टकराव बिंदुओं- देपसांग और डेमचोक में गश्त को लेकर समझौता हुआ था। इससे उम्मीद बनी है कि दोनों देशों के रिश्ते सामान्य हो सकते हैं। यह समझौता कई बैठकों और सैनिकों की वापसी के बाद हुआ।

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इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका और क्वाड के उद्देश्यों को रेखांकित किया
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिय का समूह 'क्वाड' इंडो-पैसिफिक की स्थिरता और समृद्धि के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि क्वाड की शुरुआत 2017 में हुई और तब से इसमें काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, 'क्वाड एक ऐसा समूह है जिसमें चार देश- भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया हिंद-प्रशांत के चार कोनों से जुड़े हैं। ये सभी मिलकर इस क्षेत्र को सुरक्षित और खुशहाल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।'

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