फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Officials of American and British intelligence agencies came on one platform and accused China of industrial espionage

औद्योगिक जासूसी का आरोप: चीन के खिलाफ अमेरिका-ब्रिटेन की खुफिया लामबंदी के मकसद पर कयास

Fri, 08 Jul 2022 04:37 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 08 Jul 2022 04:37 PM IST
सार

लंदन में दुनिया के भर प्रमुख कारोबारियों की बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर व्रेय ने कहा- ‘जब आप किसी चीनी कंपनी से कारोबार करते हैं, तो आपको इस बात से वाकिफ होना चाहिए कि आप चीन सरकार से डील कर रहे हैं। चीन की सेना भी उनकी खामोश सहभागी होती है।’

विज्ञापन
Officials of American and British intelligence agencies came on one platform and accused China of industrial espionage
एफबीआई निदेशक क्रिस्टोफर रे - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन के खिलाफ अमेरिका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी की लामबंदी ने दुनिया में बन रहे शीत युद्ध जैसे माहौल को और गरमा दिया है। एक असाधारण कदम उठाते हुए अमेरिकी और ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने एक मंच पर आकर चीन पर औद्योगिक जासूसी करने के इल्जाम लगाए। बुधवार को उन्होंने पश्चिमी कंपनियों को इस बारे में आगाह किया। लंदन में दुनिया के भर प्रमुख कारोबारियों की बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने कहा- ‘जब आप किसी चीनी कंपनी से कारोबार करते हैं, तो आपको इस बात से वाकिफ होना चाहिए कि आप चीन सरकार से डील कर रहे हैं। चीन की सेना भी उनकी खामोश सहभागी होती है।’

विज्ञापन


इस बैठक को ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एमआई-5 के महानिदेशक केन मैक्लम ने भी संबोधित किया। उन्होंने व्यापारियों से कहा- ‘चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के आक्रमण से सबसे ज्यादा जोखिम मेरे लिए नहीं, बल्कि आपके लिए है।’ व्रेय ने कहा- चीन सरकार से पश्चिम के कारोबारियों को उससे कहीं ज्यादा खतरा है, जितना आम तौर पढ़े-लिखे लोग समझ पाते हैं। उन्होंने व्यापारियो से इस बारे में दीर्घकालिक नजरिया अपनाने की अपील की।

विज्ञापन

पश्चिमी कंपनियां कमा रहीं मुनाफा

इन टिप्पणियों को अमेरिका और ब्रिटेन की तरफ से उद्योगपतियों और व्यापारियों को आगाह करने की एक विशेष पहल के रूप में देखा गया है। हाल के वर्षों में अमेरिका, ब्रिटेन, और यूरोपीय देशों ने चीन पर कई तरह के व्यापार प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बावजूद पश्चिमी कंपनियों ने चीन में अपना कारोबार जारी रखा है। समझा जाता है कि ऐसा उन्होंने मुनाफे को ध्यान में रख कर किया है। अब ब्रिटेन और अमेरिका ने उन्हें यह बताने की कोशिश की है कि तात्कालिक मुनाफा उनके लिए दीर्घकालिक नुकसान का सौदा साबित हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन


अमेरिका कई वर्षों से चीन पर बौद्धिक संपदा और तकनीक चुराने के आरोप लगा रहा है। यही आरोप लगाते हुए पूर्व डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने चीन से कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की नीति अपनाई थी। जो बाइडन प्रशासन ने भी उन नीतियों को जारी रखा है। खास कर उन कंपनियों से कारोबार पर रोक लगाई गई है, जिनका संबंध चीनी सेना- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से समझा जाता है।

अमेरिका में बढ़े चीनी उत्पाद

लेकिन अमेरिकी सरकार अपनी कंपनियों को चीन में कारोबार बंद करने के लिए राजी नहीं कर पाई है। बल्कि बीते तीन वर्षों में अमेरिका में चीनी उत्पादों का आयात बढ़ा है। अमेरिका में बढ़ी महंगाई के बीच कई उद्योग समूहों ने बाइडेन प्रशासन से मांग की है कि चीनी उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को वह हटा ले। इस बीच बाइडन प्रशासन ने चीन के प्रांत शिनजियांग से होने वाले आयात को रोकने के लिए नया कानून लागू किया है।



अमेरिकी और ब्रिटिश खुफिया अधिकारियों की ताजा चेतावनी को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। इस बारे में मीडियाकर्मियों के सवाल पर वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा- ‘अमेरिका के कुछ राजनेता चीन की छवि खराब करते रहे हैं। वे झूठे आरोपों को आधार पर चीन को एक खतरे के रूप में पेश करते रहे हैं। हम ऐसी टिप्पणियों का सिरे से विरोध करते हैं।’

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed