Pakistan: पाकिस्तान कुआं चुने या खाई, आईएमएफ की शर्तें मानी तो चीन का नाराज होना तय
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान सरकार से साफ कह दिया है कि अगर उसे इस संस्था से कर्ज की अगली किस्तें हासिल करनी हैं, तो उसे चीनी कंपनियों के साथ हुए ऊर्जा समझौतों की शर्तों पर फिर से बातचीत करनी होगी। चीनी ऊर्जा कंपनियों के तकरीबन 300 बिलियन डॉलर का कर्ज का भुगतान पाकिस्तान को करना है...
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पश्चिमी देशों और चीन की जारी होड़ के बीच दोनों पक्षों से फायदा उठाने की पाकिस्तान की रणनीति औंधे मुंह गिर गई है। अब जल्द ही उसे यह चुनना होगा कि इन दोनों के बीच उसकी प्राथमिकता कौन है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार का साफ झुकाव चीन की तरफ था। समझा जाता है कि शहबाज शरीफ के नेतृत्व में पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) की सरकार बनने के बाद अमेरिका की पैठ पाकिस्तान में बढ़ी है।
इसी बीच खबर है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान सरकार से साफ कह दिया है कि अगर उसे इस संस्था से कर्ज की अगली किस्तें हासिल करनी हैं, तो उसे चीनी कंपनियों के साथ हुए ऊर्जा समझौतों की शर्तों पर फिर से बातचीत करनी होगी। चीनी ऊर्जा कंपनियों के तकरीबन 300 बिलियन डॉलर का कर्ज का भुगतान पाकिस्तान को करना है। आईएमएफ ने पाकिस्तान से कहा है कि वह चीनी कंपनियों के साथ वैसा ही व्यवहार करे, जैसा 1994 से 2002 तक की बिजली नीति के तहत उसने दूसरी कंपनियों के लिए शर्तें तय की थीं।
चीनी कंपनियों ने बनाए हैं बिजली संयंत्र
पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने के मुताबिक पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने आईएमएफ के ताजा शर्त लगाने की पुष्टि की है। अखबार ने अपनी एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया है कि आईएमएफ की शर्त से पाकिस्तान सरकार के सामने कुआं या खाई में से एक में गिरने जैसी हालत पैदा हो गई है। चीनी कंपनियों ने पाकिस्तान में बिजली संयंत्रों का निर्माण चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत किया है, जिसकी शर्तें अलग से तय हुई थीं। चीनी कंपनियों ने उन शर्तों पर फिर से बातचीत की पाकिस्तान की गुजारिश पहले ही ठुकरा चुकी हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक आईएमएफ के फैसलों पर अमेरिका का बड़ा प्रभाव रहता है। ताजा शर्त को इस बात का संकेत समझा जा रहा है कि पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक मुसीबत के बीच अमेरिका ने वहां चीन का प्रभाव घटाने की रणनीति अपनाई है। पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत में आईएमएफ के अधिकारियों ने संदेह जताया कि चीनी कंपनियां पाकिस्तान से बिजली का अधिक शुल्क वसूल कर रही हैं। इसलिए उनसे हुए करार की शर्तें फिर से तय करने की जरूरत है।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इस संबंध में पाकिस्तान स्थित आईएमएफ के प्रतिनिधि एस्तर पेरेज से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र की सभी कंपनियों से समान व्यवहार होना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान के राजकोषीय संसाधन सीमित हैं। उन्होंने कहा कि इस समय सबसे अधिक जरूरत पाकिस्तान पर कर्ज का बोझ कम करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की है।
चीनी कंपनियों को भुगतान पर भड़का आईएमएफ
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया है कि आईएमएफ ने खास एतराज इस बात पर जताया कि पाकिस्तान ने इस वर्ष फरवरी में चीनी कंपनियों को 50 बिलियन डॉलर का भुगतान किया। आईएमएफ का कहना कि इस भुगतान से पहले पाकिस्तान को उन कंपनियों से करार की शर्तों पर दोबारा बातचीत करनी चाहिए थी।
विश्लेषकों का कहना है कि आईएमएफ की आपत्ति से सीपीईसी प्रोजेक्ट में काम की गति धीमी होने से संबंधित चीन की चिंता को दूर करना पाकिस्तान सरकार के लिए और कठिन हो जाएगा। इससे उसे चीन की नाराजगी मोल लेनी पड़ सकती है, जिसे वह अपना ‘हर वक्त में काम आने वाला दोस्त’ बताता रहा है।