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न्यूजीलैंड: प्रधानमंत्री जेसिंडा ने दुनिया को दिया 'हाउजिंग बबल' से निपटने का मॉडल, 23 फीसदी तक बढ़ गई थीं मकानों की कीमतें

Tue, 23 Mar 2021 04:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, विलिंग्टन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, विलिंग्टन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 23 Mar 2021 04:58 PM IST
सार

आर्डेन के पैकेज के मुताबिक देश में पहली बार मकान खरीद रहे लोगों की मदद सरकार करेगी। अगली एक अप्रैल से अब ऐसे लोगों को मदद मिलेगी, जिनकी सालाना आमदनी 95 हजार डॉलर तक है।

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New Zealand: Prime Minister Jacinda deal successfully with the housing bubble in country
न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डेन - फोटो : ट्विटर

विस्तार

न्यूजीलैंड में पैदा हुए आवास संकट के समाधान के लिए न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डेन ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। कोरोना महामारी के कारण जिस वक्त अर्थव्यवस्था संकट में है, वहीं न्यूजीलैंड में आवास की कीमतों में पिछले 12 महीनों में 23 फीसदी का उछाल आ गया है। यह देश में हो रही वेतन वृद्धि से बहुत ज्यादा है। इस कारण नौजवान और कम आय वाले लोग आवासीय बाजार से लगभग बाहर हो गए हैं।

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विश्लेषकों का कहना है कि न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री आर्डेन ने उन दूसरे देशों के लिए भी एक मिसाल कायम की है, जो महामारी के समय संपत्ति की कीमतों में कृत्रिम उछाल की समस्या से जूझ रहे हैँ। कोरोना महामारी के समय ये आम ट्रेंड दिखा है कि अलग-अलग देशों में धनी लोगों ने कर्ज लेकर उनका निवेश जायदाद या शेयरों में किया। इससे एक कृत्रिम खुशहाली की सूरत बनी है, जबकि तमाम देशों की बहुसंख्यक आबादी महामारी के कारण आए आर्थिक संकट को झेल रही है। ऐसे में इस तरह के अंसुतलन को हल करने की दिशा में न्यूजीलैंड की पहल ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है।
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इस समस्या के हल के लिए मंगलवार सुबर आर्डेन ने एक बड़ा पैकेज घोषित किया। उन्होंने कहा कि इस पैकेज का मकसद सप्लाई और मांग में संतुलन वापस लाना है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड में आवास संकट लंबे समय से जारी है और इसके हल में होने में वक्त लगेगा। लेकिन इसके लिए कदम उठाने की जरूरत है। देश की अर्थव्यवस्था को इस बात की जरूरत नहीं है कि यहां आवास की कीमत खतरनाक सीमा तक बढ़ जाए।
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आर्डेन के पैकेज के मुताबिक देश में पहली बार मकान खरीद रहे लोगों की मदद सरकार करेगी। अगली एक अप्रैल से अब ऐसे लोगों को मदद मिलेगी, जिनकी सालाना आमदनी 95 हजार डॉलर तक है। अगर खरीदारी दो लोग मिल कर रहे हों, तो ये सीमा डेढ़ लाख डॉलर तक होगी। अभी ऐसी मदद पाने की सीमा सिंगल बायर्स के लिए 85 हजार डॉलर और डबल बायर्स के लिए एक लाख 30 डॉलर थी। अटकलों के जरिए मकानों की कीमत बढ़ाने की प्रवृत्ति रोकने लिए अब नए नियम लागू किए जाएंगे।

विश्लेषकों का कहना है कि देश में कम ब्याज दरों के कारण 'हाउजिंग बबल' की स्थिति बन गई है। ब्याज दरें कोरोना महामारी से निपटने के लिए गिराई गई थीं, लेकिन बहुत से लोगों ने कर्ज लेकर उसका हाउजिंग सेक्टर में निवेश करना शुरू कर दिया। 2020 में 15 हजार ऐसे लोगों ने मकान खरीदे, जिनके पास पहले से ही पांच या उससे ज्यादा संपत्तियां मौजूद थीं।

अब नए नियमों के तहत जायदाद खरीदारी के लिए मिलने वाली रियायतें के नियम भी बदल दिए गए हैँ। अब ये रियायतें उन्हीं खरीदारियों पर मिलेंगी, जिन्हें कम से कम दस साल तक नहीं बेचा जाएगा। सरकार अब नए बने मकानों की बिक्री को ही प्रोत्साहित करेगी। साथ ही जो लोग किराए के मकान में रहते हैं, अगर उन्होंने जायदाद में निवेश कर रखा है, तो किराये पर मिलने वाली आय कर रियायत उन्हें नहीं मिलेगी। वित्त मंत्री ग्रांट रॉबर्ट्सन ने कहा है कि हाउजिंग बबल अस्थिर होते हैं। अभी सरकार जायदाद की कीमतों को अनियंत्रित छोड़ कर आर्थिक संकट से निकलने की कोशिशों के लिए जोखिम नहीं ले सकती।


अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इसी महीने चेतावनी दी थी कि न्यूजीलैंड में मकानों की बढ़ रही कीमत टिकाऊ नहीं है। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड की एक फीसदी आबादी बेघर है। ये दर ऑस्ट्रेलिया से दो गुना ज्यादा है। विकसित देशों के संगठन ओईसीटडी में शामिल देशों में बेघर होने की सबसे ऊंची दर न्यूजीलैंड में ही है। इस बीच मकानों की बढ़ रही कीमत से उन आम लोगों के लिए भी मुश्किल खड़ी हो गई है, जो मकान खरीदने की योजना बना रहे थे। मंगलवार को घोषित नए नियमों के बाद मिली शुरुआती प्रतिक्रियाओं के मुताबिक बड़ी जायदाद के मालिकों ने इस पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे सदमा पहुंचाने वाला कदम बताया है।

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