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New Year 2026: दूरी दिल्ली से करनाल जितनी, पर नया साल आने में 24 घंटे का फर्क, जानें कहां-क्यों है इतना अंतर
Thu, 01 Jan 2026 07:52 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 01 Jan 2026 07:52 PM IST
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सार
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समोआ और अमेरिकी समोआ में 24 घंटे का अंतर।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
जिस वक्त दिल्ली-मुंबई में लोग आतिशबाजी कर के नए साल का स्वागत कर रहे थे। उस दौरान प्रशांत महासागर क्षेत्र में आने वाले कई द्वीप देशों में लोग गहरी नींद ले रहे थे। दरअसल, यहां या तो नया साल कुछ घंटों पहले ही मना लिया गया था, या इसके आने में लंबा इंतजार बाकी था। सीधे शब्दों में समझें तो एक ही क्षेत्र में पड़ने वाले कुछ द्वीप देश, जिनके बीच कुछ सौ किलोमीटर की ही दूरी है, उनमें कुछ नववर्ष की शुभकामनाएं दे रहे थे, तो कुछ और देशों को लगभग एक दिन बाद तक नए साल का इंतजार करना था।यह सुनने में किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की पटकथा जैसा लग सकता है, लेकिन अगर प्रशांत महासागर में पड़ने वाले दो द्वीपों- समोआ और अमेरिकी समोआ को ही ले लें तो सच्चाई की परतें काफी हद तक खुल जाती हैं। दरअसल, दोनों द्वीप एक-दूसरे से सिर्फ 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसके बावजूद दोनों स्थानों के बीच समय का अंतर लगभग 24 घंटे का है। नतीजतन समोआ दुनिया में सबसे पहले नए साल का स्वागत करता है, जबकि अमेरिकी समोआ में साल की शुरुआत सबसे आखिर में होती है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिल्ली से करनाल के बराबर दूरी वाले दो क्षेत्रों में नया साल आने में 24 घंटे का फर्क क्यों है? यह फैसला किस आधार पर और कैसे होता है? टाइम जोन की इसमें क्या भूमिका है और यह कितनी वैज्ञानिक है? आइये जानते हैं...
अगल-बगल मौजूद दो देशों में समय का इतना फर्क क्यों?
भारत के आसपास मौजूद दो शहरों- दिल्ली और करनाल का ही उदाहरण लें तो इन दोनों की दूरी करीब 130 किमी के बीच है। इन दोनों ही जगहों पर एक ही समय में न्यू ईयर मनाया गया। लेकिन इसी दूरी पर मौजूद समोआ और अमेरिकी समोआ में न्यू ईयर में एक दिन का फासला है। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा (इंटरनेशनल डेट लाइन) है। यह एक काल्पनिक रेखा है, जो उत्तर से दक्षिण ध्रुव तक प्रशांत महासागर के बीच से गुजरती है और दुनिया के कैलेंडर दिनों को विभाजित करती है।
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अगल-बगल मौजूद दो देशों में समय का इतना फर्क क्यों?
भारत के आसपास मौजूद दो शहरों- दिल्ली और करनाल का ही उदाहरण लें तो इन दोनों की दूरी करीब 130 किमी के बीच है। इन दोनों ही जगहों पर एक ही समय में न्यू ईयर मनाया गया। लेकिन इसी दूरी पर मौजूद समोआ और अमेरिकी समोआ में न्यू ईयर में एक दिन का फासला है। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा (इंटरनेशनल डेट लाइन) है। यह एक काल्पनिक रेखा है, जो उत्तर से दक्षिण ध्रुव तक प्रशांत महासागर के बीच से गुजरती है और दुनिया के कैलेंडर दिनों को विभाजित करती है।
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समोआ इस रेखा के ठीक पश्चिम में स्थित है, जबकि अमेरिकी समोआ इसके पूर्व में। जब कोई इस रेखा को पश्चिम से पूर्व की ओर पार करता है, तो वह कैलेंडर में एक दिन पीछे चला जाता है। यही कारण है कि विमान या नाव से एक घंटे से भी कम समय में तय होने वाली यह दूरी यात्रियों को टाइम ट्रैवल का अनुभव कराती है।
क्यों बदला समोआ ने अपना समय?
दिलचस्प बात यह है कि समोआ हमेशा से इस स्थिति में नहीं था। साल 2011 तक समोआ-अमेरिकी समोआ के साथ तिथि रेखा के पूर्व में ही था। हालांकि, 29 दिसंबर 2011 को समोआ ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा के दूसरी तरफ जाने का निर्णय लिया। इसके लिए समोआ ने अपने कैलेंडर से 30 दिसंबर 2011 के पूरे दिन को हटा दिया था।
बताया जाता है कि समोआ ने यह फैसला कुछ कारणों से लिया था। इनमें सबसे अहम वजह थी अर्थव्यवस्था और व्यापार।
दिलचस्प बात यह है कि समोआ हमेशा से इस स्थिति में नहीं था। साल 2011 तक समोआ-अमेरिकी समोआ के साथ तिथि रेखा के पूर्व में ही था। हालांकि, 29 दिसंबर 2011 को समोआ ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा के दूसरी तरफ जाने का निर्णय लिया। इसके लिए समोआ ने अपने कैलेंडर से 30 दिसंबर 2011 के पूरे दिन को हटा दिया था।
बताया जाता है कि समोआ ने यह फैसला कुछ कारणों से लिया था। इनमें सबसे अहम वजह थी अर्थव्यवस्था और व्यापार।
1. बेहतर व्यापारिक साझेदारी
समोआ के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और चीन शामिल हैं। ऐसे में पुरानी व्यवस्था के तहत जब समोआ और अमेरिकी समोआ का समय एक ही था, तब समोआ का व्यापार अपने साझेदारों से काफी कम रहा था। इसकी वजह थी कि टाइम जोन के तहत ऑस्ट्रेलिया में जब सोमवार होता था, तब समोआ में रविवार होता था। इससे दोनों देशों के बीच हफ्ते में सिर्फ 3-4 दिन ही व्यापारिक कामकाज संभव हो पाता था। ऐसे में समय क्षेत्र बदलने से समोआ का व्यापार का समय भी बढ़ा।
2. बैंकिंग, संचार व्यवस्था में बेहतर समन्वय
समय क्षेत्र बदलने से समोआ को अपने प्रमुख निर्यात बाजारों के साथ बैंकिंग, स्टॉक मार्केट और संचार व्यवस्था बेहतर बनाने में आसानी हुई। दूसरी तरफ अमेरिकी समोआ ने अमेरिका के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को प्राथमिकता देते हुए तिथि रेखा के पूर्व में ही बने रहने का फैसला किया।
ये भी पढ़ें: 2026 में कहां-कहां चुनाव: राज्यसभा से विधानसभा तक कहां कैसे हैं मौजूदा समीकरण, इस बार कौन किसे दे रहा चुनौती?
समोआ के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और चीन शामिल हैं। ऐसे में पुरानी व्यवस्था के तहत जब समोआ और अमेरिकी समोआ का समय एक ही था, तब समोआ का व्यापार अपने साझेदारों से काफी कम रहा था। इसकी वजह थी कि टाइम जोन के तहत ऑस्ट्रेलिया में जब सोमवार होता था, तब समोआ में रविवार होता था। इससे दोनों देशों के बीच हफ्ते में सिर्फ 3-4 दिन ही व्यापारिक कामकाज संभव हो पाता था। ऐसे में समय क्षेत्र बदलने से समोआ का व्यापार का समय भी बढ़ा।
2. बैंकिंग, संचार व्यवस्था में बेहतर समन्वय
समय क्षेत्र बदलने से समोआ को अपने प्रमुख निर्यात बाजारों के साथ बैंकिंग, स्टॉक मार्केट और संचार व्यवस्था बेहतर बनाने में आसानी हुई। दूसरी तरफ अमेरिकी समोआ ने अमेरिका के साथ अपने राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को प्राथमिकता देते हुए तिथि रेखा के पूर्व में ही बने रहने का फैसला किया।
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3. पर्यटन की अच्छी संभावनाएं
करीब 70 किमी की दूरी पर स्थित यह समय अंतराल न केवल भूगोलवेत्ताओं के लिए शोध का विषय है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी एक बड़ा आकर्षण बन गया है। कई पर्यटक समोआ में नए साल का जश्न मनाने के तुरंत बाद छोटी सी उड़ान भरकर अमेरिकी समोआ पहुँचते हैं। इस तरह वे दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में शामिल हो जाते हैं जो एक ही साल का स्वागत दो बार करते हैं।
पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, यह टाइम-लैप अनुभव स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए विशेष रूप से नए साल पर राजस्व का एक बड़ा स्रोत बनता है। इसके अलावा अलग-अलग त्योहार और दिन का फर्क दिखाने के लिए भी बड़ी संख्या में पर्यटक इन दोनों क्षेत्रों का दौरा करते रहते हैं।
करीब 70 किमी की दूरी पर स्थित यह समय अंतराल न केवल भूगोलवेत्ताओं के लिए शोध का विषय है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी एक बड़ा आकर्षण बन गया है। कई पर्यटक समोआ में नए साल का जश्न मनाने के तुरंत बाद छोटी सी उड़ान भरकर अमेरिकी समोआ पहुँचते हैं। इस तरह वे दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में शामिल हो जाते हैं जो एक ही साल का स्वागत दो बार करते हैं।
पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, यह टाइम-लैप अनुभव स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए विशेष रूप से नए साल पर राजस्व का एक बड़ा स्रोत बनता है। इसके अलावा अलग-अलग त्योहार और दिन का फर्क दिखाने के लिए भी बड़ी संख्या में पर्यटक इन दोनों क्षेत्रों का दौरा करते रहते हैं।
समोआ और अमेरिकी समोआ के बीच समय का यह अंतर केवल एक भौगोलिक घटना नहीं है, बल्कि यह इस बात को भी दर्शाने वाली घटना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में समय और स्थान प्रबंधन कितना अहम है। जहां एक तरफ समोआ ने आर्थिक प्रगति के लिए भविष्य की ओर छलांग लगाई, वहीं अमेरिकी समोआ अपनी प्रशासनिक प्रतिबद्धताओं के कारण पुरानी व्यवस्था के साथ बना रहा। महज 130 किलोमीटर के दायरे में सिमटा यह एक दिन का अंतर आधुनिक दुनिया की सबसे रोचक कूटनीतिक और भौगोलिक दास्तानों में से एक है।