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यूरोप में कोरोना वायरस के कारण तबाही का नया दौर, जर्मनी में 10 जनवरी तक लॉकडाउन

Mon, 14 Dec 2020 03:27 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 14 Dec 2020 03:27 PM IST
सार

जर्मनी में लॉकडाउन 15 दिसंबर से अगले 10 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दौरान ज्यादा दुकानों को बंद रखा जाएगा। हालांकि ये संभावना है कि जर्मनी के कुछ राज्य क्रिसमस के मौके पर 24 से 26 दिसंबर के बीच लॉकडॉउन में कुछ छूट दें...

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New cases of coronavirus coming in europe, chancellor Angela merkel announced lockdown in Germany till 10 January
Germany enters partial lockdown to curb exponential growth of coronavirus - फोटो : Agency

विस्तार

कोरोना वायरस महामारी से यूरोप फिर से तबाही के दौर में है। रविवार को मौतों के मामले में इटली ने ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया। वहां मृतकों की संख्या 64,520 तक पहुंच गई। ब्रिटेन में ये संख्या रविवार तक 64,267 थी। लेकिन टीवी चैनल यूरो न्यूज की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों देशों में बताई गई मृतकों की संख्या असली संख्या से कम है।

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इस रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि दोनों देशों में संक्रमण टेस्टिंग की अलग-अलग कसौटियां अपनाई जा रही हैं। साथ ही बहुत सी मौतों को कोरोना वायरस के कारण हुई मौतों की संख्या में नहीं गिना गया है। खासकर ऐसा उन मामलों में हुआ है, जिनमें मरीजों की संक्रमण लगने के शुरुआती दिनों में ही मृत्यु हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे बहुत से बुजुर्ग लोगों की नर्सिंग होम्स में मृत्यु हुई है, जिनका कोविड-19 का टेस्ट नहीं हुआ था।
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इस बीच संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने रविवार को सारे देश में लॉकडाउन लागू करने का एलान किया। संघीय और राज्यों के नेताओं के साथ एक बैठक के बाद मर्केल ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि लॉकडाउन 15 दिसंबर से अगले 10 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दौरान ज्यादा दुकानों को बंद रखा जाएगा। हालांकि ये संभावना है कि जर्मनी के कुछ राज्य क्रिसमस के मौके पर 24 से 26 दिसंबर के बीच लॉकडॉउन में कुछ छूट दें।
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ब्रिटेन में रविवार को स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने चेतावनी दी कि कोविड-19 के मामले देश में फिर से बढ़ने लगे हैं। ब्रिटेन में पूरे नवंबर में लॉकडाउन रहा। उस दौरान संक्रमण के मामलों में गिरावट आई थी। लेकिन पिछले एक हफ्ते में रोजाना औसतन 16 हजार नए मामले सामने आए हैं। यह लॉकडाउन के दौरान औसतन रोजाना सामने आए मामलों की संख्या से काफी ज्यादा है। हैनकॉक ने कहा कि लंदन, केंट और एसेक्स में स्थिति ज्यादा बुरी है। सबसे चिंता की बात यह है कि नए मामलों में संक्रमण से सबसे ज्यादा ग्रस्त 11 से 18 वर्ष के किशोर हुए हैँ।

रूस और स्वीडन में भी हालत बिगड़ गई है। रूस में पिछले शुक्रवार को सामने आने वाले नए मामलों का रिकॉर्ड बना। स्वीडन में पिछले हफ्ते के अंत तक स्टॉकहोम इन्टेंसिव केयर यूनिट 99 फीसदी तक भर चुकी थी। फ्रांस में भी पिछले हफ्ते नए मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिसके बाद फ्रांस सरकार ने लॉकडाउन में छूट ना देने का फैसला किया। उसके पहले फ्रांस ने कहा था कि वह इस हफ्ते से लॉकडाउन में छूट देगा।

कोरोना वायरस संक्रमण से होने वाली सारी मौतें दर्ज ना होने की पुष्टि अब रूस में हुई है। रूस की सांख्यिकी एजेंसी रॉसस्टैट ने पिछले हफ्ते ये जानकारी दी कि अक्टूबर में देश में जितनी मौतें हुईं, उनमें लगभग 23 हजार का संबंध कोरोना वायरस से था। रूस में कोरोना वायरस से रोज संक्रमित होने वाले लोगों और होने वाली नई मौतों की जानकारी वहां बना एक विशेष टास्क फोर्स देता है। उसके मुताबिक नवंबर में कोरोना वायरस से 7,344 मौतें हुईं। लेकिन अब अक्टूबर के बारे में जो जानकारी आई है, उसके बाद ये आंकड़ा संदिग्ध हो गया है।

रॉसस्टैट के मुताबिक इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच रूस में 2019 की इसी अवधि की तुलना में एक लाख 64 हजार अधिक मौतें हुई हैँ। रूस में कोरोना वायरस से मौतों का आधिकारिक आंकड़ा अभी लगभग 47 हजार ही है। लेकिन अब विशेषज्ञों ने कहा है कि जो अतिरिक्त एक लाख 64 हजार मौतें हुईं, उनमें आधिकारिक आंकड़े के अलावा भी बहुत सी मौतों का कारण कोरोना संक्रमण रहा होगा। अक्तूबर में इस साल कुल मिलाकर सबसे ज्यादा मौतें हुईं, जब ये संख्या दो लाख पांच हजार से ज्यादा रही।


यूरोप में कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाने का काम शुरू हो गया है। जानकारों ने उम्मीद जताई है कि इसका असर मार्च या अप्रैल से दिखना शुरू होगा। लेकिन उसके पहले संक्रमण के नए मामलों और मौतों में बढ़ोतरी के दिख रहे ट्रेंड से निपटने की कठिन चुनौती यूरोप के सामने बनी रहेगी।

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