Nepal Politics: सियासी मुसीबत और संगीन आरोपों से घिरी पार्टी को ओली ने दिखाया ऊंचा सपना
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली पार्टी के इस फैसले का संकेत यह है कि अब वह कम्युनिस्ट एकता जैसे प्रयासों में अपनी ताकत नहीं लगाएगी। इसके बजाय जमीनी स्तर तक अपना संगठन मजबूत करने को प्राथमिकता देगी। पिछले नवंबर में यूएमएल दूसरे नंबर पर रही थी...
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नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) अब अगले आम चुनाव में अकेले सत्ता में आने का लक्ष्य तय किया है। नेपाल में राजतंत्र के खात्मे के बाद से अकसर साझा सरकारें ही बनती रही हैं। लेकिन रविवार को खत्म हुई सेंट्रल कमेटी की तीन दिन की बैठक में यूएमएल ने अपने पार्टी के वैचारिक और सांगठनिक आधार को मजबूत करने का संकल्प लिया, ताकि वह अगले आम चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल कर सके।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली पार्टी के इस फैसले का संकेत यह है कि अब वह कम्युनिस्ट एकता जैसे प्रयासों में अपनी ताकत नहीं लगाएगी। इसके बजाय जमीनी स्तर तक अपना संगठन मजबूत करने को प्राथमिकता देगी। पिछले नवंबर में यूएमएल दूसरे नंबर पर रही थी। उसके बाद उसने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) को नेपाली कांग्रेस वाले गठबंधन से तोड़ कर उसके साथ साझा सरकार बनाने में सफल रही। लेकिन दो महीनों के अंदर माओइस्ट सेंटर फिर से नेपाली कांग्रेस से जा मिली। समझा जाता है कि इससे फिलहाल यूएमएल कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा हुआ है।
यूएमल की पोलित ब्यूरो के सदस्य कृष्ण राय ने रविवार को कहा- ‘सेंट्रल कमेटी की बैठक में मिशन-150 शुरू करने का फैसला हुआ। इसका अर्थ यह है कि अगले आम चुनाव में पार्टी 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा की 150 सीटें जीते। इस लक्ष्य के लिए पार्टी अब कड़ी मेहनत करेगी।’
अब पार्टी इस आकलन पर पहुंची है कि 2018 में माओइस्ट सेंटर के साथ विलय कर एक पार्टी बनाने का उसे दीर्घकालिक नुकसान हुआ है। इस कारण बड़ी संख्या पार्टी की जमीनी समितियां निष्क्रिय हो गईं। इसका कारण यह है कि एकीक़ृत पार्टी में इनमें से अनेक समितियों की भूमिका तय नहीं थी।
राय ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- पाया यह गया है कि निष्क्रियता के कारण पार्टी के एक तिहाई सदस्यों ने अपनी सदस्यता रिन्यू नहीं कराई है। अब पार्टी ने अपने दस्तावेजों को अपडेट किया है और सदस्यों को संगठित करते हुए नए लक्ष्य तय किए हैं। खबरों के मुताबिक सेंट्रल कमेटी की बैठक के दौरान पार्टी नेतृत्व को कड़ी आलोचना सुननी पड़ी। पोलित ब्यूरो के एक सदस्य ने बताया- ‘पार्टी को जिस तरह चलाया गया है, कई सदस्यों ने उसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने पार्टी को स्वच्छ बनाने का प्रयास ऊपर से शुरू करने की मांग की। कुछ सदस्यों ने कहा कि पार्टी में फैसले सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए, ना कि पार्टी अध्यक्ष फैसला लेकर उसे पार्टी पर थोपना चाहिए।’ इस आलोचना को केपी शर्मा ओली के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक सेंट्रल कमेटी की ये बैठक उस समय हुई, यूएमएल के बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार और घोटालों में शामिल रहने के आरोप लग रहे हैँ। फर्जी भूटानी शरणार्थी घोटाला मामले की आंच पार्टी के कई नेताओं पर आई है। इसे देखते हुए सेंट्रल कमेटी ने तय किया कि ऐसे तमाम मामलों में पार्टी किसी को संरक्षण नहीं देगी और सारे आरोपों की जांच कराने में सरकार से सहयोग करेगी।