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नेपाल में स्थानीय चुनाव: सत्ताधारी गठबंधन में फूट से यूएमएल का बढ़ा हौसला

Wed, 04 May 2022 05:19 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 04 May 2022 05:19 PM IST
सार

खबरों के मुताबिक जमीनी स्तर पर नेपाली कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच ठीक से तालमेल नहीं बन पाया है। गठबंधन में शामिल दलों में बड़े पैमाने पर बगावत देखने को मिली है। ऐसे बहुत से चुनाव क्षेत्र हैं, जहां सत्ताधारी गठबंधन के औपचारिक उम्मीदवारों को अपने ही बागी उम्मीदवारों से मुश्किल पेश आ रही है...

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Nepal: Political observers saying Communist Party of Nepal led by former PM KP Sharma Oli, is leading in local elections
केपी शर्मा ओली - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल में स्थानीय चुनावों के लिए मतदान में अब नौ दिन बचे हैं। इस बीच राजनीतिक पर्यवेक्षकों में ये धारणा मजबूत होती जा रही है कि इन चुनावों में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) की बढ़त बन गई है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर चुनाव नतीजे इसी अनुमान के मुताबिक आए, तो उसका देश की राजनीति पर गहरा असर होगा। संभव है कि उससे इस साल के अंत में होने वाले आम चुनाव की दिशा तय हो जाए।

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इन चुनावों के महत्त्व को देखते हुए ही यूएमएल ने गठबंधन के बारे में अपना रुख बदला। पहले पार्टी ने कहा था कि वह अकेले इन चुनावों में उतरेगी। लेकिन बाद में उसने कमल थापा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और एकनाथ ढकाल के नेतृत्व वाले नेपाल परिवार पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया। यूएमएल के नेतृत्व वाले गठबंधन का मुकाबला नेपाली कांग्रेस वाले पांच दलों के गठबंधन से है।

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जमीनी स्तर पर तालमेल नहीं

खबरों के मुताबिक जमीनी स्तर पर नेपाली कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच ठीक से तालमेल नहीं बन पाया है। गठबंधन में शामिल दलों में बड़े पैमाने पर बगावत देखने को मिली है। ऐसे बहुत से चुनाव क्षेत्र हैं, जहां सत्ताधारी गठबंधन के औपचारिक उम्मीदवारों को अपने ही बागी उम्मीदवारों से मुश्किल पेश आ रही है। खुद नेपाली कांग्रेस के कई नेता पार्टी नेतृत्व के निर्देश को ठुकराते हुए चुनाव मैदान में उतर गए हैँ। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) को भी कई स्थानीय नेता बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।

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पर्यवेक्षकों के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन में बेहतर तालमेल के अभाव से यूएमएल का हौसला बढ़ा है। यूएमएल की स्थायी समिति के सदस्य सुरेंद्र पांडे ने दावा किया है कि पांच दलों का गठबंधन आपसी फूट के कारण कहीं भी प्रभावी साबित नहीं हो रहा है। उन्होंने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘उनमें आपसी झगड़ा चल रहा है। इसलिए हमें उम्मीद है कि हमारा प्रदर्शन बेहतर रहेगा।’ यूएमएल की स्थायी समिति के एक दूसरे सदस्य शेर बहादुर तमांग ने कहा है- ‘सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टियों के नेतृत्व ने गठबंधन बनाए रखने की हर कोशिश की। लेकिन स्थानीय स्तरों पर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उसे स्वीकार नहीं किया। अब अब स्थिति सत्ताधारी गठबंधन के अनुकूल नहीं रह गई है।’

कई नेताओं को पार्टी से निकाला

राजनीतिक टीकाकार तुला नारायण शाह ने भी राय जताई है कि सत्ताधारी गठबंधन जमीन पर कारगर नहीं हुआ है और यह यूएमएल के लिए अच्छी खबर है। उन्होंने काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘इन हालात के कारण इस बात की संभावना बढ़ गई है कि यूएमएल अधिक सीटें जीत लेगी।’ शाह ने कहा कि सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दलों के नेता एक दूसरे के खिलाफ बयान देते रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले बगावत और पार्टियों ने नेताओं को निकालने की घटनाएं हुई हैं। जनता में इनका खराब संदेश गया है।



स्थानीय चुनावों के दौरान 753 स्थानीय निकायों के 35,221 पदों के लिए निर्वाचन होगा। नेपाल के निर्वाचन आयोग के मुताबिक इन पदों के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं।

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