म्यांमार: सैनिक शासन के खिलाफ ‘जन युद्ध’ की अपील का ज्यादा असर नहीं
हाल के समय में सैनिक शासन ने नागरिक संगठनों का दमन बढ़ा दिया है। उसे देखते हुए इस मंगलवार को एनयूजी ने लोगों से सैनिक शासन को उखाड़ फेंकने के लिए निर्णायक लड़ाई छेड़ने की अपील की। एनयूजी के अध्यक्ष लशी ला ने ‘सैनिक शासन के खिलाफ जन युद्ध’ और ‘पूरे म्यांमार में जन क्रांति’ छेड़ देने का आह्वान देश की जनता से किया....
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म्यांमार के विपक्ष गुटों की तरफ से बनाए गए नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (एनयूजी) के देशव्यापी आंदोलन के एलान का तुरंत ज्यादा असर नहीं हुआ है। जानकारों की नजर आने वाले दिनों में इसके संभावित असर पर टिकी है। एनयूजी ने ये आह्वान पिछले एक फरवरी को तख्ता पलट के बाद सत्ता में आए सैनिक शासकों के खिलाफ किया है।
हाल के समय में सैनिक शासन ने नागरिक संगठनों का दमन बढ़ा दिया है। उसे देखते हुए इस मंगलवार को एनयूजी ने लोगों से सैनिक शासन को उखाड़ फेंकने के लिए निर्णायक लड़ाई छेड़ने की अपील की। एनयूजी के अध्यक्ष लशी ला ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में ‘सैनिक शासन के खिलाफ जन युद्ध’ और ‘पूरे म्यांमार में जन क्रांति’ छेड़ देने का आह्वान देश की जनता से किया। इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक दस्तावेज भी अटैच किया, जिसमें ‘राष्ट्र-व्यापी क्रांति’ के 14 सूत्रों का जिक्र किया गया।
एनयूजी के मुताबिक अगस्त महीने में सैनिक शासन के विरोध में बनाए गए पीपुल्स डिफेंस फोर्स ने 150 से ज्यादा हमले किए। उसमें 800 से अधिक सैनिक हताहत हुए। लशी ला ने अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा है कि वे तुरंत अपने पद छोड़ दें। पर्यवेक्षकों के मुताबिक सैनिक शासन विरोधी गुट देश भर में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में लशी ला की ताजा अपील के बाद सरकारी कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का सिलसिला शुरू हो सकता है।
पूर्व सैनिकों की राजनीतिक पार्टी यूनियन सॉलिडरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी ने कहा है कि सैनिक तख्ता पलट के बाद से उसके 253 सदस्यों की हत्या की जा चुकी है। पार्टी ने इसके लिए एनयूजी को दोषी ठहराया है। वेबसाइट एशिया टाइम्स ने एक रिपोर्ट में कहा है कि स्वतंत्र रूप से दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन अब इस बात के संकेत हैं कि दोनों पक्ष ‘सॉफ्ट टारगेट्स’ (यानी जहां हमला करना आसान हो) पर अपने हमले तेज कर देंगे।
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सैनिक शासन के खिलाफ लड़ाई बिखरे हुए सशस्त्र गुट चला रहे हैं। एनयूजी को उन्हें एकजुट करने और उन्हें अपने कमांड में लेने में कोई कामयाबी मिली है, इस बात के संकेत नहीं हैँ। कुछ गुटों ने एनयूजी के प्रति अपनी वफादारी का एलान जरूर किया है। उनमें कचिन, कयन और कयाह गुट शामिल हैं। इन तीनों गुटों ने सैनिक शासन का विरोध किया है। उधर शान और रखाइन प्रांतों में सक्रिय गुटों ने एनयूजी को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि ज्यादातर गुटों की चिंता अपने प्रभाव वाले इलाकों की गतिविधियों तक सीमित है। जबकि एनयूजी लड़ाई को राष्ट्र-व्यापी संदर्भ देना चाहती है।
लशी ला ने सैनिक शासन नियंत्रित बॉर्डर गार्ड फोर्सेज और सभी अर्धसैनिक बलों से सरकार का साथ छोड़ कर जनता की तरफ से लड़ाई में शामिल होने की अपील भी की है। जानकारों का कहना है कि ऐसा सचमुच होगा, इसकी फिलहाल कोई संभावना नहीं दिखती है। लेकिन लशी ला के आह्वान को सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रियता मिली है। बुधवार तक उसे पांच लाख 58 हजार लोग देख चुके थे। 65 हजार से ज्यादा लोगों ने उसे लाइक किया, जबकि आठ हजार से ज्यादा कमेंट उस पर किए गए।
खबरों के मुताबिक लशी ला के आह्वान के बाद से यंगून की सड़कों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। मगर जानकारों का कहना है कि एनयूजी की अपील के मुताबिक देश में सैनिक शासन के खिलाफ कोई निर्णायक लड़ाई शुरू हो जाएगी, इसके कोई संकेत नहीं हैं। आम लोगों में फिलहाल सैनिक शासकों के दमन का भय गहराई तक समाया हुआ है।