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World News: अंतरिक्ष में ज्यादा दूर तक कर सकेंगे अध्ययन, भारतीय विमान धमाके की 38वीं बरसी पर श्रद्धांजलि
Sun, 25 Jun 2023 06:21 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Sun, 25 Jun 2023 06:21 AM IST
सार
नासा की आर्टेमिस संधि विभिन्न देशों के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए व्यावहारिक नियम तय करती है। भारत को मिलाकर 27 देश इसमें शामिल हो गए हैं। ये सभी चंद्रमा और मंगल ग्रह के लिए नासा के मिशन आर्टेमिस का भी हिस्सा बनेंगे।
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अंतरिक्ष सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Twitter @wonderofscience
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विस्तार
भारत द्वारा अमेरिका की आर्टेमिस संधि पर हस्ताक्षर के बाद नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) प्रशासक बिल नेल्सन ने कहा कि इससे अंतरिक्ष व पृथ्वी के अध्ययन में सहयोग बढ़ेगा, यह खुशी का मौका है। उन्होंने भारतीय नेतृत्व का आभार जताया और कहा कि अब हम अध्ययन के लिए अंतरिक्ष में कहीं ज्यादा दूर जाने के बारे में सोच सकेंगे, अपने लक्ष्यों की ओर शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से बढ़ेंगे। मुश्किल वक्त में एक दूसरे की मदद भी कर पाएंगे।
नासा की आर्टेमिस संधि विभिन्न देशों के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए व्यावहारिक नियम तय करती है। भारत को मिलाकर 27 देश इसमें शामिल हो गए हैं। ये सभी चंद्रमा और मंगल ग्रह के लिए नासा के मिशन आर्टेमिस का भी हिस्सा बनेंगे। वहीं अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग के लिए यह एक मील का पत्थर साबित होने वाला कदम है। भारत एक जिम्मेदार अंतरिक्ष शक्ति है और सहयोग व प्रगति के लिए नये समझौतों का समर्थन करता है। यह संधि अंतरिक्ष के लिए नियम आधारित अध्ययन को महत्व देगी। हम सभी का मानना है कि यह न केवल ज्ञान की तलाश और अज्ञात को जानने का रास्ता है, बल्कि इससे मानवता को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।
भारतीय विमान धमाके की 38वीं बरसी पर श्रद्धांजलि
ओटावा। भारतीय उच्चायोग ने यहां 23 जून 1985 को एअर इंडिया की उड़ान 182 कनिष्क पर हुए आतंकी हमले की 38वीं बरसी पर एक कार्यक्रम में मृतकों को याद किया और मानवता की असहनीय क्षति बताया। ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने त्रासदी को कनाडाई विमानन इतिहास में अब तक की सबसे बुरी घटना बताया। इस में 329 यात्री मारे गए थे। भारत के तत्कालीन एअर इंडिया द्वारा संचालित, उड़ान संख्या एआई 182 कनिष्क, अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ रहा था, तभी इसमें विस्फोट हो गया। ओटावा में भारत के उच्चायोग ने कहा, यह हमला कनाडा स्थित खालिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंक के कायरतापूर्ण कृत्य का नतीजा था।
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नासा की आर्टेमिस संधि विभिन्न देशों के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए व्यावहारिक नियम तय करती है। भारत को मिलाकर 27 देश इसमें शामिल हो गए हैं। ये सभी चंद्रमा और मंगल ग्रह के लिए नासा के मिशन आर्टेमिस का भी हिस्सा बनेंगे। वहीं अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग के लिए यह एक मील का पत्थर साबित होने वाला कदम है। भारत एक जिम्मेदार अंतरिक्ष शक्ति है और सहयोग व प्रगति के लिए नये समझौतों का समर्थन करता है। यह संधि अंतरिक्ष के लिए नियम आधारित अध्ययन को महत्व देगी। हम सभी का मानना है कि यह न केवल ज्ञान की तलाश और अज्ञात को जानने का रास्ता है, बल्कि इससे मानवता को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।
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भारतीय विमान धमाके की 38वीं बरसी पर श्रद्धांजलि
ओटावा। भारतीय उच्चायोग ने यहां 23 जून 1985 को एअर इंडिया की उड़ान 182 कनिष्क पर हुए आतंकी हमले की 38वीं बरसी पर एक कार्यक्रम में मृतकों को याद किया और मानवता की असहनीय क्षति बताया। ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने त्रासदी को कनाडाई विमानन इतिहास में अब तक की सबसे बुरी घटना बताया। इस में 329 यात्री मारे गए थे। भारत के तत्कालीन एअर इंडिया द्वारा संचालित, उड़ान संख्या एआई 182 कनिष्क, अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ रहा था, तभी इसमें विस्फोट हो गया। ओटावा में भारत के उच्चायोग ने कहा, यह हमला कनाडा स्थित खालिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंक के कायरतापूर्ण कृत्य का नतीजा था।
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