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जिनेवा: 'मणिपुर हिंसा पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों का कोई आधार नहीं', भारतीय कार्यकर्ता ने UNHRC को बताया

Thu, 28 Sep 2023 05:10 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 28 Sep 2023 05:10 AM IST
सार

एलिनेरी लियानहलवांग ने यूएनएचआरसी को बताया कि मणिपुर संघर्ष की मुख्य वजह भूमि अधिकार, नियंत्रण को लेकर है। इसलिए, जैसा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कहा जा रहा है कि मणिपुर संघर्ष धार्मिक प्रकृति का है, इसका कोई आधार नहीं है।

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Narratives peddled by international media on Manipur violence hold no ground, activist tells UNHRC
Alinery Lianhlawng - फोटो : ANI

विस्तार

मिजोरम की एक ईसाई सामाजिक कार्यकर्ता एलिनेरी लियानहलवांग ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को बताया कि मणिपुर हिंसा पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा फैलाई जा रही बातों का कोई आधार नहीं है और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में समृद्ध जातीय विविधता है।

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जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 54वें सत्र में एक आम बहस के दौरान एलिनेरी ने कहा, 'भारत के पूर्वोत्तर की एक स्वदेशी महिला होने के नाते मुझे मणिपुर संघर्ष और क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए भारत सरकार के दृढ़ संकल्प पर प्रकाश डालने का सौभाग्य मिला है।'

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एलिनेरी ने कहा, 28 लाख की आबादी वाला मणिपुर 35 से अधिक समुदायों का घर है, उनमें से अधिकांश को तीन मुख्य जातीय समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है- मेतई, नागा और कुकी। भौगोलिक रूप से राज्य को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है- इंफाल घाटी और पहाड़ी क्षेत्र। घाटी में 11 फीसदी से कुछ अधिक क्षेत्र है, लेकिन कुल आबादी का 57 फीसदी हिस्सा है, जिसमें मुख्य रूप से मैतई लोग हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में नगा और कुकी जनजातियों का प्रभुत्व है और वे राज्य की आबादी का 43 फीसदी हिस्सा हैं।

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कार्यकर्ता ने कहा कि वर्तमान संघर्ष को जटिल जातीय संबंधों के चश्मे से देखने की जरूरत है। इस संघर्ष का एक मुख्य कारण भूमि अधिकार, नियंत्रण और दो समुदायों के बीच भूमि के स्वामित्व को लेकर है। इसलिए, जैसा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कहा जा रहा है कि मणिपुर संघर्ष धार्मिक प्रकृति का है, इसका कोई आधार नहीं है।

उन्होंने कहा, वास्तविकता यह है कि संघर्ष को बहुसंख्यक मैतई और अल्पसंख्यक ईसाई कुकी के बीच एक धार्मिक संघर्ष के रूप में वर्णित नहीं किया जा सकता है क्योंकि नगा, जो मुख्य रूप से ईसाई हैं, संघर्ष में भागीदार नहीं हैं। मैतई, आबादी के हिस्से का जिक्र न करने के लिए ईसाई धर्म का भी अभ्यास करता है।
 

एलिनेरी ने संयुक्त राष्ट्र से कहा, शुक्र है कि भारत की केंद्र सरकार ने दोनों समुदायों के मुद्दों पर बातचीत को जारी रखी हुई है। उसने सभी समूहों से संबंधित समुदाय के नेताओं की शांति समिति और राहत पैकेजों के साथ संघर्ष को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की कोशिश की है और पूरे राज्य में डेरा डाला है।  

पाकिस्तान हिंदू समुदाय को बना रहा निशाना
बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने बुधवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 54वें सत्र के दौरान पाकिस्तान पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय का उत्पीड़न कर रहा है।
 

विश्व सिंधी कांग्रेस के ब्रिटेन और यूरोप के आयोजक हिदायत उल्लाह भुट्टो ने कहा कि सिंधी हिंदुओं के खिलाफ हिंसा पाकिस्तान के इतिहास में एक काला धब्बा है। पाकिस्तान बनने के बाद से समुदाय के 80 फीसदी लोगों को अपनी मातृभूमि से जाने के लिए मजबूर किया गया। हाल के वर्षों में इन मामलों में चिंताजनक ढंग से बढ़ोतरी हुई है। 

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