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Bangladesh: नाहिद इस्लाम, आसिफ महमूद आरक्षण विरोधी आंदोलन के प्रमुख चेहरे; प्रदर्शनकारियों में जोश भर दिया
Wed, 07 Aug 2024 07:18 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Wed, 07 Aug 2024 07:18 AM IST
सार
बांग्लादेश में हो रहे आरक्षण विरोधी आंदोलन के तीन प्रमुख चेहरे आसिफ महमूद, नाहिद इस्लाम और अबु बकर मजूमदार रहे हैं। इन्होंने 15 साल की शेख हसीना की सत्ता को खत्म कर दिया।
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बांग्लादेश में आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा
- फोटो : PTI
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विस्तार
शेख हसीना के 15 साल के अनवरत शासन पर विराम लगाने वाले आरक्षण विरोधी आंदोलन के तीन प्रमुख चेहरे हैं। आसिफ महमूद, नाहिद इस्लाम और अबु बकर मजूमदार।
विश्वविद्यालय कैंपस से आंदोलन शुरू कर इन तीन छात्र नेताओं ने हसीना को सत्ता की कुर्सी से उतारकर देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इनमें आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा है नाहिद इस्लाम। नाहिद ने हसीना को ललकारते हुए कहा था, आज लाठी उठाई है, अगर बात नहीं बनी तो हथियार उठाने के लिए तैयार हैं। यह शेख हसीना को तय करना है कि वह पद से हटेंगी या पद पर बनी रहने के लिए रक्तपात का सहारा लेंगी।
जबरन हिरासत में लिया
ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले नाहिद का आरोप था कि पुलिस ने उसे 20 जुलाई की सुबह जबरन हिरासत में लिया। उसके गायब होने के 24 घंटे बाद वह एक पुल के नीच बेहोशी की हालत में मिला। नाहिद का दावा है कि उसे लोहे की रॉड से पीट-पीटकर बेहोश कर दिया गया। 26 जुलाई को डिटेक्टिव ब्रांच ने सुरक्षा का हवाला देते हुए नाहिद को अस्पताल से हिरासत में लिया। पिटाई के बाद वाले नाहिद के चेहरे ने आंदोलन को नया रंग दिया और प्रदर्शनकारियों को भड़का दिया था।
इंजेक्शन लगाया, कई दिन नहीं आया होश
दूसरा बड़ा चेहरा रहे आसिफ महमूद जून में आरक्षण के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन से जुड़े। 26 जुलाई को डिटेक्टिव ब्रांच ने उन्हें भी हिरासत में लिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के मुताबिक, आसिफ को भी तगड़ी प्रताड़ना सहनी पड़ी। इन लोगों को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिससे ये कई दिनों तक बेहोश रहे। 28 जुलाई को उसके परिवार वालों ने उनसे मिलने की अनुमति मांगी, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। आसिफ ढाका विवि में लैंग्वेज स्टडीज का छात्र है।
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पुलिस ने आंदोलन वापस लेने का दबाव बनाया
तीसरे छात्र नेता अबु बकर मजूमदार को पुलिस ने कमरे में बंद कर आंदोलन वापस लेने का दबाव बनाया था। मना करने पर पीटा गया। अबु नागरिक अधिकार और मानवाधिकारों को लेकर काम करते हैं और ढाका विश्वविद्यालय में भूगोल के छात्र हैं। पांच जून को आए हाईकोर्ट के आरक्षण वाले फैसले के बाद अबु ने दोस्तों के साथ स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन मूवमेंट की शुरुआत की। अबु को 19 जुलाई की शाम धानमंडी इलाके से कुछ लोग अपने साथ ले गए थे, जिसके बाद कई दिनों तक वह लापता रहा।
सेना में शीर्ष स्तर पर बदलाव, एनटीएमसी के महानिदेशक अहसन पद से हटाए गए
बांग्लादेश में राष्ट्रीय दूरसंचार निगरानी केंद्र के महानिदेशक मेजर जनरल जियाउल अहसन को पद से मुक्त कर दिया गया है। वहीं, सेना के शीर्ष पदों में भी फेरबदल किया गया है। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के अनुसार, मेजर जनरल एएसएम रिदवानुर रहमान को एनटीएमसी का महानिदेशक बनाया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद सैफुल आलम का पद विदेश मंत्रालय को सौंप दिया गया। लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर रहमान शमीम को सेना का चीफ ऑफ जनरल स्टाफ बनाया गया है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल मुजीबुर रहमान को आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड का जनरल ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया। लेफ्टिनेंट जनरल अहमद तबरेज शम्स चौधरी को क्वार्टर मास्टर जनरल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद शाहीनुल हक को राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज का कमांडेंट बनाया गया है।
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विश्वविद्यालय कैंपस से आंदोलन शुरू कर इन तीन छात्र नेताओं ने हसीना को सत्ता की कुर्सी से उतारकर देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इनमें आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा है नाहिद इस्लाम। नाहिद ने हसीना को ललकारते हुए कहा था, आज लाठी उठाई है, अगर बात नहीं बनी तो हथियार उठाने के लिए तैयार हैं। यह शेख हसीना को तय करना है कि वह पद से हटेंगी या पद पर बनी रहने के लिए रक्तपात का सहारा लेंगी।
जबरन हिरासत में लिया
ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले नाहिद का आरोप था कि पुलिस ने उसे 20 जुलाई की सुबह जबरन हिरासत में लिया। उसके गायब होने के 24 घंटे बाद वह एक पुल के नीच बेहोशी की हालत में मिला। नाहिद का दावा है कि उसे लोहे की रॉड से पीट-पीटकर बेहोश कर दिया गया। 26 जुलाई को डिटेक्टिव ब्रांच ने सुरक्षा का हवाला देते हुए नाहिद को अस्पताल से हिरासत में लिया। पिटाई के बाद वाले नाहिद के चेहरे ने आंदोलन को नया रंग दिया और प्रदर्शनकारियों को भड़का दिया था।
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इंजेक्शन लगाया, कई दिन नहीं आया होश
दूसरा बड़ा चेहरा रहे आसिफ महमूद जून में आरक्षण के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन से जुड़े। 26 जुलाई को डिटेक्टिव ब्रांच ने उन्हें भी हिरासत में लिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के मुताबिक, आसिफ को भी तगड़ी प्रताड़ना सहनी पड़ी। इन लोगों को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिससे ये कई दिनों तक बेहोश रहे। 28 जुलाई को उसके परिवार वालों ने उनसे मिलने की अनुमति मांगी, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। आसिफ ढाका विवि में लैंग्वेज स्टडीज का छात्र है।
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पुलिस ने आंदोलन वापस लेने का दबाव बनाया
तीसरे छात्र नेता अबु बकर मजूमदार को पुलिस ने कमरे में बंद कर आंदोलन वापस लेने का दबाव बनाया था। मना करने पर पीटा गया। अबु नागरिक अधिकार और मानवाधिकारों को लेकर काम करते हैं और ढाका विश्वविद्यालय में भूगोल के छात्र हैं। पांच जून को आए हाईकोर्ट के आरक्षण वाले फैसले के बाद अबु ने दोस्तों के साथ स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन मूवमेंट की शुरुआत की। अबु को 19 जुलाई की शाम धानमंडी इलाके से कुछ लोग अपने साथ ले गए थे, जिसके बाद कई दिनों तक वह लापता रहा।
सेना में शीर्ष स्तर पर बदलाव, एनटीएमसी के महानिदेशक अहसन पद से हटाए गए
बांग्लादेश में राष्ट्रीय दूरसंचार निगरानी केंद्र के महानिदेशक मेजर जनरल जियाउल अहसन को पद से मुक्त कर दिया गया है। वहीं, सेना के शीर्ष पदों में भी फेरबदल किया गया है। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के अनुसार, मेजर जनरल एएसएम रिदवानुर रहमान को एनटीएमसी का महानिदेशक बनाया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद सैफुल आलम का पद विदेश मंत्रालय को सौंप दिया गया। लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर रहमान शमीम को सेना का चीफ ऑफ जनरल स्टाफ बनाया गया है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल मुजीबुर रहमान को आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड का जनरल ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त किया गया। लेफ्टिनेंट जनरल अहमद तबरेज शम्स चौधरी को क्वार्टर मास्टर जनरल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद शाहीनुल हक को राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज का कमांडेंट बनाया गया है।