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महामारी का असर: असल में कहीं ज्यादा गंभीर है ‘लॉन्ग कोविड’ की समस्या, महिलाओं और गरीबों पर सबसे ज्यादा प्रभाव
Sat, 26 Jun 2021 04:09 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 26 Jun 2021 04:09 PM IST
सार
जानकारों का कहना है कि लॉन्ग कोविड के व्यापक प्रचलन के कारण इस संक्रमण के अभी होने वाले इलाज के साथ टीकाकरण रणनीति पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। ये सवाल सिर्फ इंग्लैंड के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए हैं...
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लॉन्ग कोविड
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विस्तार
कोरोना वायरस संक्रमण से उबरने के बाद मरीज कई दूसरी समस्याओं से ग्रस्त हो जाते हैं। ये बात अब पक्के तौर पर साबित हो चुकी है। कोविड मरीजों को बाद में होने वाली शिकायतों में थकान, अनिद्रा, दिग्भ्रमित होने की शिकायत और सांस संबंधी दिक्कतें शामिल हैं। ये समस्याएं महीनों तक जारी रहती हैं। इन समस्याओं को ही विशेषज्ञों ने ‘लॉन्ग कोविड’ यानी कोविड संक्रमण का लंबा असर नाम दिया है।
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इसी हफ्ते इंग्लैंड में जारी एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक ये समस्याएं बहुत आम हैं। इस अध्ययन में पाया गया कि ब्रिटेन में कम से कम 20 लाख लोग इस समय ऐसी दिक्कतों से पीड़ित हैं। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लोग इन समस्याओं से ज्यादा पीड़ित हुए हैं। लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के संक्रमण रोग विशेषज्ञ पॉल इलियट ने कहा- ‘हमारे अध्ययन से कोविड-19 के दीर्घकालिक असर को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर उभरी है। अब नीति और योजना बनाते वक्त इस हालत को ध्यान में रखना होगा।’ ये अध्ययन इलियट के नेतृत्व में ही हुआ।
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जानकारों का कहना है कि लॉन्ग कोविड के व्यापक प्रचलन के कारण इस संक्रमण के अभी होने वाले इलाज के साथ टीकाकरण रणनीति पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। ये सवाल सिर्फ इंग्लैंड के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए हैं। दूसरे देशों में भी लॉन्ग कोविड के लक्षण देखे गए हैं, हालांकि ज्यादातर देशों में इसका अध्ययन नहीं किया गया है। इम्पेरियल कॉलेज के ताजा अध्ययन में बीते सितंबर से फरवरी के बीच संक्रमित हुए 5,08,707 व्यक्तियों के रिकॉर्ड पर गौर किया गया।
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अखबार द वाशिंगटन पोस्ट में छपी एक खबर के मुताबिक ये अध्ययन रिपोर्ट अभी छप कर नहीं आई है। ना ही इसके निष्कर्षों की अभी समकक्ष विशेषज्ञों ने समीक्षा की है। लेकिन अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि लगभग छह फीसदी कोविड मरीजों ने बताया कि ठीक होने के बाद अगले तीन महीने या उससे भी लंबे समय तक उन्हें किसी ना किसी समस्या का सामना करना पड़ा। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक कुल मिला कर 29 ऐसे लक्षणों की लिस्ट उन्होंने बनाई, जिनका सामना कोविड मरीजों को ठीक होने के बाद करना पड़ा।
अध्ययनकर्ताओं ने कहा है कि जो दो सबसे आम लक्षण सामने आए हैं, वे हैं- थकान और सांस लेने संबंधी दिक्कतें। ऐसी समस्याओं का सामना महिलाओं खासकर उम्रदराज महिलाओं, धूम्रपान करने वाले लोगों, मोटे लोगों, गरीब इलाकों में रहने वाले लोगों, या उन लोगों को ज्यादा करना पड़ा, जिन्हें अधिक गंभीर स्थिति के कारण अस्पताल में दाखिल होना पड़ा था। अध्ययनकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि ब्रिटेन में ऐसी समस्याओं से पीड़ित कोविड मरीजों की संख्या लगभग 20 लाख है।
इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर से जुड़े विशेषज्ञ डेविड स्ट्रेन ने द वॉशिंगटन पोस्ट से कहा- ‘लॉन्ग कोविड की समस्या उससे कहीं ज्यादा आम है, जितना हमने पहले सोचा था। ऐसा लगता है कि सभी उम्र के लोग इससे प्रभावित हैं और इसके परिणाम दीर्घकालिक होंगे।’
इसी हफ्ते नॉर्वे में जारी हुई एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया था कि होम आइसोलेशन में ठीक हुए कोरोना मरीजों में लगभग 50 फीसदी को आरंभिक संक्रमण के लगभग छह महीनों के बाद कुछ गंभीर लक्षणों को सामना करना पड़ा है। यूनिवर्सिटी ऑफ बर्गेन के इस अध्ययन में देखा गया कि लॉन्ग कोविड के सबसे आम लक्षण सांस लेने या एकाग्र होने में दिक्कत हैं।