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Trump Tariffs: 'ट्रंप का टैरिफ ऐसा, जैसे कोई चूहा हाथी को मार रहा', अमेरिकी राष्ट्रपति पर भड़के अर्थशास्त्री
Fri, 29 Aug 2025 09:25 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 29 Aug 2025 09:25 AM IST
सार
अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने कहा कि 'अगर अमेरिका भारत के लिए अपने रास्ते बंद कर देता है, तो भारत अपना सामान बेचने के लिए अन्य बाजार ढूंढ लेगा, और यह कदम ब्रिक्स देशों को और मजबूत करेगा।'
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Donald Trump, PM Modi
- फोटो : ANI
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर घर में ही घिर गए हैं। कई अमेरिकी अर्थशास्त्री इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अमेरिकी विदेश नीति के लिए आत्मघाती कदम बता रहे हैं। अब अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने एक कदम आगे बढ़ते हुए दावा किया है कि ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले से ब्रिक्स संगठन मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। रिचर्ड वोल्फ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा देश है। अमेरिका का भारत को ये बताना कि उसे क्या करना है, 'ये ऐसा है जैसे कोई चूहा, हाथी को मुक्का मार रहा हो'।
'भारत नए बाजार ढूंढ लेगा'
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा कई भारतीय उत्पादों पर लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ बुधवार से लागू हो गया। रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर दोगुना टैरिफ लगाया है। ट्रंप का कहना है कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है। उन्होंने भारत पर दबाव बनाने को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के अभियान का हिस्सा बताया है।
रशिया टुडे के साथ एक बातचीत में अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने कहा कि 'अगर अमेरिका भारत के लिए अपने रास्ते बंद कर देता है, तो भारत अपना सामान बेचने के लिए अन्य बाजार ढूंढ लेगा, और यह कदम ब्रिक्स देशों को और मजबूत करेगा।' उन्होंने कहा, 'जिस तरह रूस ने कच्चे तेल के लिए नए बाजार ढूंढ लिए हैं, उसी तरह भारत भी अब अपना निर्यात अमेरिका को नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों को बेचेगा।'
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ये भी पढ़ें- US: 'तुम्हारे बेटों के सिर कलम होंगे, बेटियों का दुष्कर्म...', रिपब्लिकन नेता ने धार्मिक ग्रंथ से की अभद्रता
रिचर्ड वोल्फ बोले- ये वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक पल
ब्रिक्स देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इस समूह का उद्देश्य पश्चिमी देशों के वित्तीय प्रभुत्व का मुकाबला करना और डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए विकल्प तलाशना है। वोल्फ ने कहा, 'अगर आप चीन, भारत, रूस और ब्रिक्स को लें, तो इन देशों की कुल वैश्विक उत्पादन में हिस्सेदारी 35% है। जो जी7 देशों की हिस्सेदारी अब घटकर लगभग 28% रह गई है।' वोल्फ ने चेतावनी देते हुए कहा, 'आप (ट्रंप) जो कर रहे हैं, उससे ब्रिक्स को पश्चिमी देशों के मुकाबले एक बड़ा, अधिक एकीकृत और सफल आर्थिक विकल्प बनाने में मदद मिलेगी। हम एक ऐतिहासिक क्षण देख रहे हैं।'
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'भारत नए बाजार ढूंढ लेगा'
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा कई भारतीय उत्पादों पर लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ बुधवार से लागू हो गया। रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर दोगुना टैरिफ लगाया है। ट्रंप का कहना है कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है। उन्होंने भारत पर दबाव बनाने को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के अभियान का हिस्सा बताया है।
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रशिया टुडे के साथ एक बातचीत में अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने कहा कि 'अगर अमेरिका भारत के लिए अपने रास्ते बंद कर देता है, तो भारत अपना सामान बेचने के लिए अन्य बाजार ढूंढ लेगा, और यह कदम ब्रिक्स देशों को और मजबूत करेगा।' उन्होंने कहा, 'जिस तरह रूस ने कच्चे तेल के लिए नए बाजार ढूंढ लिए हैं, उसी तरह भारत भी अब अपना निर्यात अमेरिका को नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों को बेचेगा।'
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रिचर्ड वोल्फ बोले- ये वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक पल
ब्रिक्स देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इस समूह का उद्देश्य पश्चिमी देशों के वित्तीय प्रभुत्व का मुकाबला करना और डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए विकल्प तलाशना है। वोल्फ ने कहा, 'अगर आप चीन, भारत, रूस और ब्रिक्स को लें, तो इन देशों की कुल वैश्विक उत्पादन में हिस्सेदारी 35% है। जो जी7 देशों की हिस्सेदारी अब घटकर लगभग 28% रह गई है।' वोल्फ ने चेतावनी देते हुए कहा, 'आप (ट्रंप) जो कर रहे हैं, उससे ब्रिक्स को पश्चिमी देशों के मुकाबले एक बड़ा, अधिक एकीकृत और सफल आर्थिक विकल्प बनाने में मदद मिलेगी। हम एक ऐतिहासिक क्षण देख रहे हैं।'
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