फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   large number of girls arrived after opening school in Kabul

जुनून: काबुल की बेटियों ने आतंकियों को दिया मुंहतोड़ जवाब, धमाके बाद तालीम लेने पहुंचीं स्कूल

Wed, 19 May 2021 06:33 PM IST
प्रशांत कुमार वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला Published by: प्रशांत कुमार Updated Wed, 19 May 2021 06:33 PM IST
सार

जीवन में शिक्षा का महत्व कितना अहम है यह हमें काबुल की लड़कियों से सीखना चाहिए। काबुल की बेटियां कहती हैं कि गोली और बंदूक से जान तो ली जा सकती है, पर हौसले को परास्त नहीं किया जा सकता। शिक्षा हासिल के लिए उनका परिवार भी साथ दे रहा है।

विज्ञापन
large number of girls arrived after opening  school in Kabul
काबुल धमाका (फाइल फोटो)

विस्तार

आतंकी हमले के बाद 17 मई को जब काबुल में स्कूल खुला तो लड़कियों ने अपनी उपस्थिति से यह बता दिया कि गोली और बंदूक से जान तो ली जा सकती है, पर हौसले को परास्त नहीं किया जा सकता।  तालीम कभी गोले-बारूद से नहीं रुकी जा सकती है, विस्फोट से इमरातें तो उड़ाई जा सकती हैं, पर सपनों को नहीं तोड़ा जा सकता।  5 मई को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक स्कूल के बाहर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 80 लोगों की मौत हुई थी और 160 लोग जख्मी हो गए थे। तबाही का मंजर देखकर लगा था कि आतंकी अपने मंसूबे पर कामयाब हो जाएंगे, लेकिन जब स्कूल खुले तो सबसे ज्यादा हैरान आतंकी ही हुए।  उन्होंने देखा बड़ी संख्या में लड़कियां पहुंच रही हैं। 

विज्ञापन


आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए घर से बाहर निकली लड़कियां
आतंकियों ने धमाका ऐसे वक्त किया था कि  जब लड़कियां घर से स्कूल जाने के लिए निकली थीं। इस हमले में फरजाना असगरी की 15 वर्षीय छोटी बहन की भी मौत हो गई थी। धमाके के दौरान फरजाना भी फस गई थीं, लेकिन जिंदा बचकर घर लौटने के बाद फरजाना ने दृढ़ संकल्प लिया कि वह स्कूल खुलने पर दोबारा पढ़ने जाएंगी। और जब पिछले दिनों स्कूल खुला तो सबसे पहले फरजाना ही स्कूल पहुंची। फरजाना ने बताया मेरी छोटी बहन को आंतकियों ने इसलिए मार दिया कि वह पढ़ना चाहती थी, लेकिन तालीम पूरी कर आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब और अपनी बहन को सच्ची श्रद्धांजलि दूंगी इसलिए मैं स्कूल आई हूं। 
विज्ञापन


फरजाना के साथ-साथ अन्य लड़कियां ने कहा कि आतंकी हमले से ना हम कभी रुके थे और ना कभी रुकेंगे। हमारी तालीम ही हमारे देश को आतंकवाद से मुक्त कर सकती है। क्योंकि जब हम पढ़ेंगे तभी नई ऊचाइयों को छूएंगे।  लड़कियों का कहना है कि आतंकी चाहे जितने हमले करे हम स्कूल जाना नहीं छोड़ेंगे। लड़कियों का कहना है कि तालिबान हमें अशिक्षित रखना चाहता है, लेकिन हम शिक्षा के जरिए उनके मंसूबे को कामयाब नहीं होने देंगे। हम शिक्षित होकर ही रहेंगे।’ फरजाना कहती हैं- हम निराश होने वालों में से नहीं हैं। हमें ज्ञान और शिक्षा हासिल करने के लिए डर छोड़ना होगा।’ । 
विज्ञापन
विज्ञापन


35 लाख लड़कियां जा रहीं स्कूल
 अफगानिस्तान के एनजीओ से जुड़ी एक सदस्य का कहना है कि तालिबानी शासन में 1996 से 2001 के दौरान लड़कियों के स्कूल जाने पर रोक लगी थी,  लेकिन अब परिवार भी बिना डरे लड़कियों को स्कूल भेज रहे हैं। अफगानिस्तान ने पिछले दो दशक में क्रांतिकारी बदलाव देखे हैं। देश में अब 35 लाख लड़कियां स्कूल जाने लगी हैं

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed