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अमेरिका में हिंसा: ट्रंप उतार सकते हैं सेना, जानें कौन सा कानून देता है इसकी अनुमति
Wed, 03 Jun 2020 01:29 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Wed, 03 Jun 2020 01:29 PM IST
सार
- अमेरिका में प्रदर्शनकारियों के सामने सेना को उतार सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप
- राजद्रोह के कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को मिलती है शक्ति
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे पहले इस्तेमाल किया गया था कानून
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डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद अमेरिका के तमाम शहरों में सड़कों पर प्रदर्शनकारी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिका के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इसे लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना उतारने की भी चेतावनी दी है। दरअसल, अमेरिका में एक राजद्रोह कानून है जिसके तहत राष्ट्रपति सेना को उतार सकते हैं। क्या है ये कानून, आइए समझते हैं...
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क्या कहता है यह कानून?
1807 में अमेरिका में राजद्रोह का कानून लाया गया, जिसके तहत किसी भी तरह के राजद्रोह, कानून के प्रतिरोध, चाहे वो संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के हो या फिर किसी भी देश या प्रांत के, अमेरिका के राष्ट्रपति स्थिति को काबू करने के लिए सेना को सड़कों पर उतार सकते हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का क्या मतलब है?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कथन में यह साफ नहीं किया है कि कानून के तहत वो राष्ट्रीय गार्ड का सहारा लेंगे या फिर अमेरिका की सेना का। हालांकि ट्रंप के पास इतनी शक्ति है कि वो दोनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
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राष्ट्रीय गार्ड और सेना में क्या अंतर है?
राष्ट्रीय गार्ड में ज्यादातर आम नागरिक होते हैं जिन्हें हर महीने के दो दिन या फिर वीकेंड पर या साल में दो हफ्ते के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। हालांकि राष्ट्रीय गार्ड का नियंत्रण राज्यों के गवर्नर के अधीन होता है, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिली हुई शक्तियों के जरिए इन्हें तैनात करने का फैसला सुना सकते हैं।
ऐसा देखा गया है कि राष्ट्रीय गार्ड प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने में ज्यादा सफल नहीं हो पाते क्योंकि इनको प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रशिक्षण नहीं मिला होता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार राजद्रोह कानून का इस्तेमाल किया गया था।
पूर्व राष्ट्रपति डी आइजनहावर ने अर्कांसस नेशनल गार्ड के विरुद्ध सेना के 101वें एयरबोर्न डिवीजन को बुलाया था, जो स्कूल में अश्वेत छात्रों का घुसने से रोक रहे थे। इसके बाद इस कानून को 1992 में इस्तेमाल में लाया गया था। तब लॉस एंजेलिस के गवर्नर ने सेना को तैनात करने की अपील की थी।
लॉस एंजेलिस में उस वक्त बड़े पैमाने पर दंगे भड़के थे जब एक पैरोल पर अश्वेत अपराधी रॉडनी किंग की पिटाई करने वाला वीडियो सामने आया था। वीडियो सामने आने के बावजूद अधिकारियों को दोषी नहीं ठहराया गया। उन दंगों में कुल 50 लोगों की मौत हुई थी और दो हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए थे।