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हड्डियों तक फैला बाइडन को हुआ कैंसर: हर 100 में से 13 पुरुषों के पीड़ित होने की रहती है आशंका, ये कितना गंभीर?
Mon, 19 May 2025 05:50 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 19 May 2025 05:50 PM IST
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सार
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन को हुआ प्रोस्टेट कैंसर।
- फोटो :
PTI/Adobe Stock
विस्तार
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित हैं। बाइडन के दफ्तर की तरफ से जारी हालिया बयान के मुताबिक, बाइडन को पिछले हफ्ते 'आक्रामक तरह' के प्रोस्टेट कैंसर का पता चला, जो कि उनकी हड्डियों तक फैल चुका है। इस समस्या का पता लगने के बाद अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने संवेदना प्रकट की है और बाइडन को मजबूत नेता करार दिया है।ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर बाइडन को जो कैंसर हुआ है, वह कितना गंभीर है? इसके लक्षण क्या हैं? यह कितना खतरनाक है? इसके इलाज का तरीका क्या है? बाइडन इससे पहले कब इस तरह की गंभीर बीमारी से पीड़ित हो चुके हैं? आइये जानते हैं...
पहले जानें- प्रोस्टेट कैंसर क्या है?
प्रोस्टेट कैंसर की समस्या प्रोस्टेट से जुड़ी है। यह मुख्यतः पुरुषों को प्रभावित करता है। पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि ब्लैडर (मूत्राशय) के ठीक नीचे और मलाशय के ठीक सामने होती है। यह ग्रंथि एक ऐसे तरल पदार्थ को छोड़ती है, जो कि वीर्य के साथ मिलता है। इससे पुरुषों में पाए जाने वाले शुक्राणु स्वस्थ रहते हैं। यही शुक्राणु महिलाओं में गर्भधारण को संभव बनाते हैं।
आमतौर पर प्रोस्टेट कैंसर जब बढ़ना शुरू होता है, तो यह प्रोस्टेट ग्रंथि को प्रभावित करता है। हालांकि, यहां यह ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाता। हालांकि, कुछ प्रोस्टेट कैंसर (जैसे कि बाइडन के मामले में) आक्रामक हो सकते हैं और तेजी से शरीर के अन्य अंगों और हड्डियों में भी पहुंच सकते हैं।
US: पूर्व राष्ट्रपति बाइडन के कैंसर का पता चलने पर निशाने पर आईं पत्नी जिल, लोगों ने बताया दुष्ट महिला
प्रोस्टेट कैंसर की समस्या प्रोस्टेट से जुड़ी है। यह मुख्यतः पुरुषों को प्रभावित करता है। पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि ब्लैडर (मूत्राशय) के ठीक नीचे और मलाशय के ठीक सामने होती है। यह ग्रंथि एक ऐसे तरल पदार्थ को छोड़ती है, जो कि वीर्य के साथ मिलता है। इससे पुरुषों में पाए जाने वाले शुक्राणु स्वस्थ रहते हैं। यही शुक्राणु महिलाओं में गर्भधारण को संभव बनाते हैं।
आमतौर पर प्रोस्टेट कैंसर जब बढ़ना शुरू होता है, तो यह प्रोस्टेट ग्रंथि को प्रभावित करता है। हालांकि, यहां यह ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाता। हालांकि, कुछ प्रोस्टेट कैंसर (जैसे कि बाइडन के मामले में) आक्रामक हो सकते हैं और तेजी से शरीर के अन्य अंगों और हड्डियों में भी पहुंच सकते हैं।
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बाइडन को कैसे लगी प्रोस्टेट कैंसर की जानकारी?
चौंकाने वाली बात यह है कि 2015 में जो बाइडन के एक बेटे- ब्यू बाइडन की कैंसर के चलते ही मौत हो गई थी। बाइडन के लिए यह घटना इतनी दुख देने वाली रही कि कई वर्षों तक उन्होंने इस मुद्दे पर बात तक नहीं की। हालांकि, अब 10 वर्ष बाद वे खुद इससे पीड़ित हो गए हैं। बाइडन की टीम के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति को पिछले हफ्ते ही प्रोस्टेट में एक गांठ का पता चला, जिससे उनकी मूत्र संबंधी समस्याएं बढ़ गई थीं। जांच के आधार पर पता लगा कि उनकी बीमारी हड्डियों तक फैल गई है। हालांकि, भले ही यह बीमारी अधिक आक्रामक है, लेकिन यह हार्मोन-संवेदनशील भी है। इसका प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है।
प्रोस्टेट नोड्यूल की खोज के बाद बाइडन के कई मेडिकल परीक्षण किए गए। परीक्षणों के दौरान ग्लीसन स्कोर 9 (ग्रेड ग्रुप 5) पाया गया। इससे बाइडन को उच्च श्रेणी का कैंसर होने की पुष्टि हुई। यह हड्डी में फैलने का यानी मेटास्टेसिस का संकेत देता है। उनका परिवार इलाज के तरीकों पर डॉक्टरों से परामर्श कर रहा है। बताया जाता है कि मेटास्टेसाइज्ड कैंसर (कई अंगों में फैले) कैंसर का इलाज लोकलाइज्ड (एक स्थान पर फैले) कैंसर के इलाज से मुश्किल होता है। क्योंकि लोकलाइज्ड कैंसर से उलट इसमें दवाओं का सभी ट्यूमर्स तक पहुंचना मुश्किल होता है, जिससे बीमारी को पूरी तरह खत्म करना भी समस्या बन जाता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि 2015 में जो बाइडन के एक बेटे- ब्यू बाइडन की कैंसर के चलते ही मौत हो गई थी। बाइडन के लिए यह घटना इतनी दुख देने वाली रही कि कई वर्षों तक उन्होंने इस मुद्दे पर बात तक नहीं की। हालांकि, अब 10 वर्ष बाद वे खुद इससे पीड़ित हो गए हैं। बाइडन की टीम के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति को पिछले हफ्ते ही प्रोस्टेट में एक गांठ का पता चला, जिससे उनकी मूत्र संबंधी समस्याएं बढ़ गई थीं। जांच के आधार पर पता लगा कि उनकी बीमारी हड्डियों तक फैल गई है। हालांकि, भले ही यह बीमारी अधिक आक्रामक है, लेकिन यह हार्मोन-संवेदनशील भी है। इसका प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है।
प्रोस्टेट नोड्यूल की खोज के बाद बाइडन के कई मेडिकल परीक्षण किए गए। परीक्षणों के दौरान ग्लीसन स्कोर 9 (ग्रेड ग्रुप 5) पाया गया। इससे बाइडन को उच्च श्रेणी का कैंसर होने की पुष्टि हुई। यह हड्डी में फैलने का यानी मेटास्टेसिस का संकेत देता है। उनका परिवार इलाज के तरीकों पर डॉक्टरों से परामर्श कर रहा है। बताया जाता है कि मेटास्टेसाइज्ड कैंसर (कई अंगों में फैले) कैंसर का इलाज लोकलाइज्ड (एक स्थान पर फैले) कैंसर के इलाज से मुश्किल होता है। क्योंकि लोकलाइज्ड कैंसर से उलट इसमें दवाओं का सभी ट्यूमर्स तक पहुंचना मुश्किल होता है, जिससे बीमारी को पूरी तरह खत्म करना भी समस्या बन जाता है।
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मेडिकल ओन्कोलॉजिस्ट ओटिस ब्रॉली के मुताबिक, अगर किसी का ग्लीसन स्कोर 6 है तो यह आमतौर पर दूसरे अंगों में फैलने लायक यानी मेटास्टैटिक नहीं होता। लेकिन अगर यह स्कोर 7, 8 या 9 या 10 आता है, तो यह मेटास्टैटिक हो सकता है। कोशिकाएं जितनी असामान्य होंगी, उनके दूसरी कोशिकाओं तक फैलने और घातक होने की उतनी ही ज्यादा आशंका होगी।
कितना सामान्य है प्रोस्टेट कैंसर?
प्रोस्टेट कैंसर को पुरुषों में होने वाले कैंसर में सबसे सामान्य माना जाता है। खासकर बुजुर्गों में इसके होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। स्किन कैंसर के बाद यह पुरुषों को प्रभावित करने वाली दूसरी बड़ी वजह है। अमेरिके सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, हर 100 में से 13 पुरुष अपने जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर इस तरह के कैंसर का सामना करते हैं। कैंसर से होने वाली मौतों में प्रोस्टेट कैंसर भी बड़ी वजह बनता है।
US: 'बाइडन और उनके परिवार के लिए प्रार्थना कर रहे', कैंसर की खबर पर भारतीय-अमेरिकी सांसदों की प्रतिक्रिया
2021 में अमेरिका में प्रोस्टेट कैंसर के 2 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए थे। 2025 तक इनके 3 लाख से ज्यादा केस आने की आशंका है। अकेले अमेरिका में इस कैंसर की वजह से हर साल 36 हजार लोगों की मौत हो जाती है। हालांकि, जहां 65 साल से कम उम्र के लोगों के बचने की संभावना 98 फीसदी तक है, वहीं 80 के ऊपर के लोगों की जान बचने की संभावना 85 फीसदी से कम होती जाती है। इतना ही नहीं, अगर प्रोस्टेट कैंसर मेटास्टैसिस (जैसा कि बाइडन को हुआ है) की स्टेज तक पहुंच गया है तो पांच साल के अंतराल में जान बचने की संभावना 30-40 प्रतिशत तक रह जाती है।
प्रोस्टेट कैंसर को पुरुषों में होने वाले कैंसर में सबसे सामान्य माना जाता है। खासकर बुजुर्गों में इसके होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। स्किन कैंसर के बाद यह पुरुषों को प्रभावित करने वाली दूसरी बड़ी वजह है। अमेरिके सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, हर 100 में से 13 पुरुष अपने जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर इस तरह के कैंसर का सामना करते हैं। कैंसर से होने वाली मौतों में प्रोस्टेट कैंसर भी बड़ी वजह बनता है।
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2021 में अमेरिका में प्रोस्टेट कैंसर के 2 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए थे। 2025 तक इनके 3 लाख से ज्यादा केस आने की आशंका है। अकेले अमेरिका में इस कैंसर की वजह से हर साल 36 हजार लोगों की मौत हो जाती है। हालांकि, जहां 65 साल से कम उम्र के लोगों के बचने की संभावना 98 फीसदी तक है, वहीं 80 के ऊपर के लोगों की जान बचने की संभावना 85 फीसदी से कम होती जाती है। इतना ही नहीं, अगर प्रोस्टेट कैंसर मेटास्टैसिस (जैसा कि बाइडन को हुआ है) की स्टेज तक पहुंच गया है तो पांच साल के अंतराल में जान बचने की संभावना 30-40 प्रतिशत तक रह जाती है।
क्या है प्रोस्टेट कैंसर का इलाज?
मैसाच्युसेट्स जनरल ब्रिघम कैंसर सेंटर के डॉ. मैथ्यू स्मिथ के मुताबिक, हाल के दशकों में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में काफी सुधार हुआ है। इलाज के माध्यम से मरीज चार-पांच साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। स्मिथ ने कहा- इसका इलाज तो किया जा सकता है पर इसे ठीक नहीं किया जा सकता।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए उन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर में हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करती हैं और कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा करती हैं। ज्यादातर पुरुषों का इलाज दवाओं से किया जा सकता है। हालांकि, कुछ स्थितियों में रेडिएशन, सर्जरी और अन्य प्रकार के उपचार का इस्तेमाल किया जा सकता है।
मैसाच्युसेट्स जनरल ब्रिघम कैंसर सेंटर के डॉ. मैथ्यू स्मिथ के मुताबिक, हाल के दशकों में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में काफी सुधार हुआ है। इलाज के माध्यम से मरीज चार-पांच साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। स्मिथ ने कहा- इसका इलाज तो किया जा सकता है पर इसे ठीक नहीं किया जा सकता।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए उन दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर में हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करती हैं और कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा करती हैं। ज्यादातर पुरुषों का इलाज दवाओं से किया जा सकता है। हालांकि, कुछ स्थितियों में रेडिएशन, सर्जरी और अन्य प्रकार के उपचार का इस्तेमाल किया जा सकता है।